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Same Gender Marriage: 21 पूर्व जज बोले- समाज के लिए विनाशकारी होगा समलैंगिक विवाह
Thu, 30 Mar 2023 07:40 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Thu, 30 Mar 2023 07:40 AM IST
सार
पत्र में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के लिए चल रही मुहिम की तरफ सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है। इसमें कहा गया है, समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से विचार किया जा रहा है और संविधान पीठ को भेजे जाने के बाद देश में हाल के दिनों में इसमें तेजी आई है।
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समलैंगिक (सांकेतिक तस्वीर)
विस्तार
हाईकोर्ट के पूर्व जजों के एक समूह ने कहा है कि समलैंगिक विवाह को वैध बनाने से समाज पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। बुधवार को एक खुले पत्र में 21 पूर्व जजों ने कहा, निहित स्वार्थी समूहों की ओर से भारतीय विवाह परंपराओं और परिवार व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ निरंतर हमले से वे नाराज और व्यथित हैं।
पत्र में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के लिए चल रही मुहिम की तरफ सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है। इसमें कहा गया है, समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से विचार किया जा रहा है और संविधान पीठ को भेजे जाने के बाद देश में हाल के दिनों में इसमें तेजी आई है। विभिन्न क्षेत्रों और धर्म से आने वाले समाज के विभिन्न स्तरों के लोग भारतीय समाज और संस्कृति को कमजोर के लिए पश्चिम के इस दृष्टिकोण को थोपने की कोशिशों से गहरे आहत हैं। पत्र पर 21 पूूर्व जजों के हस्ताक्षर हैं। इनमें राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एसएन झा, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) एमएम कुमार, गुजरात के लोकायुक्त जस्टिस (सेवानिवृत्त) एसएम सोनी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एसएन ढींगरा शामिल हैं।
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पत्र में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के लिए चल रही मुहिम की तरफ सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया है। इसमें कहा गया है, समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से विचार किया जा रहा है और संविधान पीठ को भेजे जाने के बाद देश में हाल के दिनों में इसमें तेजी आई है। विभिन्न क्षेत्रों और धर्म से आने वाले समाज के विभिन्न स्तरों के लोग भारतीय समाज और संस्कृति को कमजोर के लिए पश्चिम के इस दृष्टिकोण को थोपने की कोशिशों से गहरे आहत हैं। पत्र पर 21 पूूर्व जजों के हस्ताक्षर हैं। इनमें राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एसएन झा, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) एमएम कुमार, गुजरात के लोकायुक्त जस्टिस (सेवानिवृत्त) एसएम सोनी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एसएन ढींगरा शामिल हैं।
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