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गुजरात दंगा: जकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, तत्कालीन सीएम मोदी को फंसाने की कोशिश नहीं की 

Wed, 08 Dec 2021 09:24 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 08 Dec 2021 09:24 PM IST
सार

दंगे में मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने एसआईटी द्वारा नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को क्लीन चिट दिए जाने को चुनौती दी है।

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2002 Gujarat riots: Didn't try to implicate ex-chief minister, Zakia Jafri tells SC
जकिया जाफरी - फोटो : ANI

विस्तार

2002 के गुजरात दंगों में बड़ी साजिश का आरोप लगाने वाली जकिया जाफरी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री को किसी भी स्तर पर फंसाने की कोशिश नहीं की थी और उन्होंने अब भी इस पर बहस नहीं की है। 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा के दौरान मारे गए मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने एसआईटी द्वारा नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को क्लीन चिट दिए जाने को चुनौती दी है। मोदी दंगों के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री थे।  

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कपिल सिब्बल ने रखी दलील
जकिया जाफरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री की किसी भी कथित संलिप्तता के बारे में बिल्कुल भी तर्क नहीं दिया है। हमारा जोर इस बात पर है कि साजिश के बड़े मुद्दे हैं जिनकी विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच नहीं की गई थी। 
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बेंच में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार भी शामिल थे, जिन्होंने पाया कि एसआईटी द्वारा उच्चतम स्तर पर उन लोगों की संलिप्तता के आरोपों की जांच की गई थी और सामग्री एकत्र की गई थी, जिसके आधार पर जांच अधिकारी ने एक राय बनाते हुए रिपोर्ट पेश की थी। 
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पीठ ने कहा कि टेप में उस दावे के संबंध में एसआईटी ने समकालीन आधिकारिक रिकॉर्ड की ओर इशारा किया है कि राज्य ने किस तरह की प्रतिक्रिया दी, क्या कार्रवाई की और कैसे कदम उठाए। अब यह उस बात को झुठलाता है और जांच अधिकारी की भी यही राय है। इसे देखने का यही तरीका है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं किया जा सकता है।

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