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एससीओ बैठक में उठा आतंकवाद का मुद्दा, भारत ने बताया सबसे बड़ी चुनौती
Mon, 30 Nov 2020 09:56 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 30 Nov 2020 09:56 PM IST
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एससीओ
- फोटो : iStock
भारत ने सोमवार को कहा कि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है और इसका इस्तेमाल ‘राज्य नीति’ के साधन के रूप में करने के लिए पाकिस्तान की निंदा की। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से इस खतरे का सामना मिलकर करने और आतंकवाद को समर्थन देने वाले सुरक्षित ठिकानों, बुनियादी ढांचे और उनके वित्तीय नेटवर्क को व्यापक रूप से खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कानूनी व्यवस्थाओं को लागू करने का आह्वान किया।
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आठ सदस्यीय एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद का उल्लेख किया। हालांकि, नायडू ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। नायडू के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार उन्होंने आतंकवाद को समर्थन देने वाले ठिकानों, बुनियादी ढांचों और वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने का आह्वान किया।
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भारत की मेजबानी में हुई ऑनलाइन बैठक को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा, ‘आतंकवाद सही मायने में मानवता का दुश्मन है। यह एक ऐसा गंभीर संकट है जिसका हमें सामूहिक रूप से मुकाबला करने की आवश्यकता है। हम अनजान स्थानों से उत्पन्न खतरों के बारे में चिंतित हैं और विशेष रूप से उन देशों के बारे में चिंतित हैं जो राज्य नीति के साधन के रूप में आतंकवाद का फायदा उठाते हैं। ऐसा दृष्टिकोण पूरी तरह से एससीओ की भावना और चार्टर के खिलाफ है।’
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एससीओ में जानबूझकर किए गए द्विपक्षीय मुद्दे लाने के प्रयास
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खतरे का ‘खात्मा’ करने से अपनी वास्तविक क्षमताओं को साकार करने में क्षेत्र को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर स्थिति का माहौल बनेगा और आर्थिक विकास और सतत विकास होगा। पाकिस्तान के एक अन्य अप्रत्यक्ष संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एससीओ में जानबूझकर द्विपक्षीय मुद्दों को लाने के प्रयास किये गए। उन्होंने इन कोशिशों को एससीओ के सिद्धांतों और मानदंडों का उल्लंघन बताया।
सितंबर के मध्य में, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एससीओ के सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की डिजिटल बैठक से उस वक्त बाहर निकल गए थे, जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने एक मानचित्र पेश किया, जिसमें कश्मीर को गलत तरीके से चित्रित किया गया था। बैठक के मानदंडों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने के लिए भारत ने पाकिस्तान की आलोचना की थी। भारत 2017 में इस समूह का पूर्ण सदस्य बना था और पहली बार बैठक की मेजबानी कर रहा है।
कोरोना संकट के बीच व्यापार में तेजी आने की जताई उम्मीद
एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व प्राय: कैबिनेट स्तर के मंत्री करते है। पिछले वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उज्बेकिस्तान में इस बैठक में शामिल हुए थे। कोरोना संकट और उसके प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व के बारे में बात करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए व्यापार और निवेश में तेजी आएगी। आर्थिक विकास और व्यापार केवल शांति और सुरक्षा के वातावरण में चल सकता है।
नायडू ने कहा, ‘हालांकि कोविड-19 महामारी ने सभी सदस्य देशों की आर्थिक रफ्तार को धीमा कर दिया है। भारत ने वैश्विक महामारी का बहादुरी से मुकाबला किया है और वायरस से लड़ने के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है।’ उपराष्ट्रपति ने 2021-2025 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना को मंजूरी देने के लिए एससीओ व्यापार मंत्रियों को भी बधाई दी।