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Karnataka: क्यासानूर वन रोग के चलते 19 वर्षीय युवती की मौत, जानें जानलेवा बीमारी के लक्षण
Tue, 09 Jan 2024 05:45 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरु
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Tue, 09 Jan 2024 05:45 PM IST
सार
कर्नाटक में क्यासानूर वन रोग के चलते 19 साल की युवती की अस्पताल में मौत हो गई है। गौरतलब है कि इस वर्ष इस बीमारी के कारण यह पहली मौत है। क्यासानूर वन रोग मुख्यत: बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है, जो वायरस के कारण होता है।
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वायरस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
कर्नाटक के शिवमोगा जिले के होसानगर की रहने वाली 19 साल की युवती की एक अस्पताल में क्यासानूर वन रोग के चलते मौत हो गई हैं। शिवमोगा के अरमने कोप्पा गांव की रहने वाली युवती में क्यासानूर वन रोग(केएफडी) पॉजिटिव पाए जाने पर चार जनवरी को उडुपी जिले के मणिपाल के केएमसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गौरतलब है कि इस वर्ष इस बीमारी के कारण यह पहली मौत है। केएफडी एक तरह की वायरल बीमारी है, जो किलनी से फैलती हैं।
केएफडी के चलते युवती की मौत
एनालेकोप्पा गांव में 26 दिसंबर को सुपारी निकालने के लिए गई युवती को बुखार हो गया था, जिसके बाद इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया था। इस दौरान शुरुआती जांचे के बाद युवती की हालत में सुधार हुआ, लेकिन चार दिन बाद फिर से लड़की हालत बिगड़ गई। फिर से शिवमोगा के मैकगैन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां वह दिमागी बुखार से पीड़ित पाई गई थी। बता दें दो जनवरी को केएफडी के लिए उनका परीक्षण नेगेटिव आया, लेकिन चार जनवरी को फिर से जांच में बीमारी की पुष्टि की गई। सोमवार को दिमागी बुखार के चलते युवती ने दम तोड़ दिया हैं।
क्या है क्यासूनर वन रोग (केएफडी)
क्यासानूर वन रोग मुख्यत: बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है, जो वायरस के कारण होता है। 1957 में इस रोग की पहचान सबसे पहले कर्नाटक के क्यासानूर जंगल के एक बीमार बंदर में की गई थी। जिसके बाद से हर साल 400 से 500 लोगों के इस रोग से संक्रमित होने के मामले सामने आते हैं। दरअसल, क्यासानूर वन रोग पूरे पश्चिमी घाट में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर उभरने लगी है। यह वायरस बंदरों, रोडेंट्स और पक्षियों में पाया जाता है। इंसानों में यह कुटकी/टिक नामक कीट के काटने या संक्रमित जानवर के संप्रक में आने से फैसला है। संक्रमित व्यक्तियों में ठंड लगना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और 5 से 12 दिनों तक तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं।
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केएफडी के चलते युवती की मौत
एनालेकोप्पा गांव में 26 दिसंबर को सुपारी निकालने के लिए गई युवती को बुखार हो गया था, जिसके बाद इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया था। इस दौरान शुरुआती जांचे के बाद युवती की हालत में सुधार हुआ, लेकिन चार दिन बाद फिर से लड़की हालत बिगड़ गई। फिर से शिवमोगा के मैकगैन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां वह दिमागी बुखार से पीड़ित पाई गई थी। बता दें दो जनवरी को केएफडी के लिए उनका परीक्षण नेगेटिव आया, लेकिन चार जनवरी को फिर से जांच में बीमारी की पुष्टि की गई। सोमवार को दिमागी बुखार के चलते युवती ने दम तोड़ दिया हैं।
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क्या है क्यासूनर वन रोग (केएफडी)
क्यासानूर वन रोग मुख्यत: बंदरों और मनुष्यों को प्रभावित करता है, जो वायरस के कारण होता है। 1957 में इस रोग की पहचान सबसे पहले कर्नाटक के क्यासानूर जंगल के एक बीमार बंदर में की गई थी। जिसके बाद से हर साल 400 से 500 लोगों के इस रोग से संक्रमित होने के मामले सामने आते हैं। दरअसल, क्यासानूर वन रोग पूरे पश्चिमी घाट में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के तौर पर उभरने लगी है। यह वायरस बंदरों, रोडेंट्स और पक्षियों में पाया जाता है। इंसानों में यह कुटकी/टिक नामक कीट के काटने या संक्रमित जानवर के संप्रक में आने से फैसला है। संक्रमित व्यक्तियों में ठंड लगना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और 5 से 12 दिनों तक तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं।
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