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Govt Data: 19 राज्यों की विधानसभाओं में 10 फीसदी से कम महिला विधायक, लोकसभा और राज्यसभा में यह है हाल

Sun, 11 Dec 2022 10:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 11 Dec 2022 10:15 PM IST
सार

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिला सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधित्व के बारे में सवाल लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने उठाया, जिन्होंने केंद्र से उनके समग्र प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा।

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19 state legislatures have less than 10 per cent women lawmakers Govt data Parliament Session Updates
संसद भवन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की संसद और अधिकांश राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 15 फीसदी से भी कम है। 19 राज्यों की विधानसभाओं में महिला विधायक भी 10 फीसदी से कम हैं। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है।

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राज्यों का हाल
जिन राज्यों में 10 प्रतिशत से अधिक महिला विधायक हैं, उनमें बिहार (10.70), छत्तीसगढ़ (14.44), हरियाणा (10), झारखंड (12.35), पंजाब (11.11), राजस्थान (12), उत्तराखंड (11.43), उत्तर प्रदेश (11.66), पश्चिम बंगाल (13.70) और दिल्ली (11.43) शामिल हैं। देश भर की विधानसभाओं में महिला विधायकों की औसत संख्या महज आठ फीसदी है।
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इन राज्यों में आंकड़ा 10 फीसदी से कम
कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु और तेलंगाना में 10 फीसदी से भी कम महिला विधायक हैं। हाल ही में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में निर्वाचित प्रतिनिधियों में 8.2 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में इस बार केवल एक महिला विधायक निर्वाचित हुईं हैं।

लोकसभा और राज्यसभा में यह है हाल
आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा में महिला सांसदों की हिस्सेदारी 14 फीसदी से ज्यादा है। लोकसभा में 14.94 प्रतिशत और राज्यसभा में 14.05 फीसदी सांसद हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने उठाया मुद्दा
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिला सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधित्व के बारे में सवाल लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने उठाया, जिन्होंने केंद्र से उनके समग्र प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा। उन्होंने आगे पूछा कि क्या सरकार की संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने की कोई योजना है।

केंद्रीय  मंत्री ने दिया यह जवाब
जिस पर रिजिजू ने कहा कि लैंगिक न्याय सरकार की एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है। संसद के समक्ष संविधान संशोधन विधेयक लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को सर्वसम्मति के आधार पर इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक चर्चा करने की आवश्यकता है।

महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ी मांग भी उठी

  • हाल ही में, बीजू जनता दल (BJD), शिरोमणि अकाली दल (SAD), जनता दल यूनाइटेड JD(U) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसे राजनीतिक दलों ने सरकार से महिला आरक्षण विधेयक को नए सिरे से संसद में पेश करने और पारित करने के लिए कहा है। 
  • राज्यसभा सदस्य डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि बीजद ने केंद्र से संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में विधेयक पारित करने को कहा है। अगर सरकार विधेयक लाती है तो हमारी पार्टी उसका समर्थन करेगी। 
  • कुछ दिनों पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, जिसका अन्य दलों ने समर्थन किया था। 
  • शिअद सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित करने और महिलाओं को उनका हक देने का समय आ गया है। जदयू सांसद राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने का समय है और सरकार को यह विधेयक लाना चाहिए।


1996 में संसद में पेश किया गया था बिल
महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रयास करने वाला बिल पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था। इसे 2010 में राज्यसभा में पारित किया गया था, लेकिन 15वीं लोकसभा के भंग होने के बाद यह बिल लैप्स हो गया।

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