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दागी सांसद व विधायकों पर लंबित 1233 आपराधिक मामले विशेष अदालत में ट्रांसफर, बनी 12 विशेष अदालतें

Wed, 12 Sep 2018 03:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Sep 2018 03:17 AM IST
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1233 criminal cases pending on MP and MLA, transfer to special court
ravi shankar prasad, PM Modi
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 11 राज्यों से मिली अब तक की जानकारी के मुताबिक, दागी सांसदों व विधायकों पर लंबित 1233 आपराधिक मामलों को विशेष अदालत में ट्रांसफर किया जा चुका है। 136 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 1097 मामले अभी लंबित हैं। 
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कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा गया है कि दागी सांसद व विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों के निपटारे के लिए गठित 12 विशेष अदालतों में से छह सत्र न्यायालय स्तर के जबकि पांच मजिस्ट्रेट स्तर की हैं। वहीं तमिलनाडु की ओर से अभी तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है कि वहां विशेष अदालत किस स्तर की है। दिल्ली में दो विशेष अदालत जबकि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, कर्नाटक, केरल, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में एक-एक विशेष अदालत का गठन किया जाएगा। 
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मंत्रालय ने बताया कि जिन राज्यों में सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या 65 से कम हैं, वहां नियमित अदालत में फास्ट ट्रैक के माध्यम से मुकदमों का निपटारा किया जाएगा। इस संबंध में सभी राज्यों को एडवायजरी जारी कर दी गई है। गत 23 अगस्त को विधि विभाग ने विभिन्न हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर यह जानना चाहा था कि उनके यहां अतिरिक्त विशेष अदालत की दरकार है या नहीं? 
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कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पटना, कलकत्ता और केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि उनके यहां और विशेष अदालत की जरूरत नहीं है। वहीं, बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि उनके यहां कुछ और विशेष अदालतों की दरकार है। इलाहाबाद, मद्रास और हैदराबाद हाईकोर्ट ने इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे सरकार के विवेक पर छोड़ दिया है। 

पिछले साल 1 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और संबंधित अथॉरिटी को यह बताने के लिए कहा था कि दागी 1581 सांसदों व विधायकों के मुकदमों का क्या हुआ। इनमें से कितने मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर हुआ? मालूम हो कि 18 मार्च 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर करने का निर्देश दिया था। साथ ही पीठ ने यह भी पूछा था कि कितने मामलों में सजा हुई और कितने मामले में आरोपी बरी हुए।

सरकार को यह भी बताने के लिए कहा गया था कि वर्ष 2014 से 2017 के बीच कितने ऐसे नए मामले आए। सांसदों व विधायकों के मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त को फिर से जानना चाहा था कि कितनी विशेष अदालतें गठित हुईं और इनमें से कितने सत्र न्यायालय और कितने मजिस्ट्रेट कोर्ट हैं। 


बिहार में सर्वाधिक मामले हुए विशेष अदालतों में ट्रांसफर

मंत्रालय ने कहा है कि अब तक की मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार में सबसे अधिक 249 आपराधिक मामलों को विशेष अदालत में ट्रांसफर किया गया। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट से अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को इस हलफनामे पर विचार करेगा। पिछली सुनवाई में आधी-अधूरी जानकारी देने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। 
 
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