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केरल में बाढ़ से बच्चों के नोट्स खराब, अब 8वीं और 9वीं के बच्चे कर रहे 10वीं के बच्चों की मदद

Wed, 12 Sep 2018 03:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरूवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरूवनंतपुरम Updated Wed, 12 Sep 2018 03:08 PM IST
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10th exam kerala: class eighth and ninth students helping class 10th students in making school notes
केरल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्कूल जाती छात्राएं
अगस्त में केरल में आई सदी की सबसे भीषण बाढ़ के असर रह-रहकर सामने आते ही जा रहे हैं। अब वहां 4-5 महीने में परीक्षाएं होने को हैं। स्कूल स्तर की परीक्षाओं में तो कुछ नरमी बरती जा सकती है, लेकिन असल समस्या उन बच्चों की है, जिनके 10वीं के एग्जाम हैं। बच्चों के नोट्स तो बाढ़ की वजह से खराब हो चुके हैं।
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अब इतने कम समय में सभी विषयों के पूरे नोट्स दोबारा तैयार करना और फिर उन्हें याद करना बेहद मुश्किल है। ऐसे में दूसरे जिलों के जूनियर छात्र तक उनकी मदद के लिए आगे आ गए हैं। राज्य के जो हिस्से बाढ़ से बच गए थे, वहां 8वीं, 9वीं तक के बच्चे 10वीं क्लास के नोट्स तैयार कर रहे हैं और इसे बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में भेज रहे हैं।
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ताकि वहां बच्चों को इन नोट्स से मदद मिल सके। तिरुअनंतपुरम की ईसाई संस्था लैटिन आर्चडायोसिस की तरफ से शुरू की गई इस पहल को अलग-अलग स्कूलों के 200 से ज्यादा बच्चों को जोड़ा गया है। ये बच्चे स्कूल में अपने पीरियड खत्म होने के बाद भी रुकते हैं। छुट्टी वाले दिन भी स्कूल आ रहे हैं।
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इस समय में वो 10वीं के अलग-अलग विषयों के नोट्स तैयार करते हैं। स्कूल के शिक्षक बच्चों को बोल-बोलकर ये नोट्स लिखवाते हैं। अभी तक जो नोट्स तैयार हुए हैं, उन्हें अलप्पुझा और कोच्चि भेजा जा रहा है।  

बच्चे और शिक्षक छुट्टी वाले दिन स्कूल आ रहे

10th exam kerala: class eighth and ninth students helping class 10th students in making school notes
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शिक्षक बताते हैं कि बच्चे तो बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर लोगों की मदद करना चाह रहे थे, लेकिन वो छोटे हैं इसलिए वहां जा तो नहीं सकते। लेकिन अब इस तरह से मदद करके बच्चों को भी अच्छा लग रहा है। आगे और भी नोट्स तैयार कर अलग-अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की कोशिश करेंगे। 

बच्चे और शिक्षक छुट्टी वाले दिन स्कूल आ रहे

मुहिम से जुड़े फादर डायसन बताते हैं, "इस मुहिम से एक तरफ कुछ बच्चों की मदद हो रही है, वहीं दूसरी तरफ बाकी बच्चे मदद करना भी सीख रहे हैं। हम फोटोकॉपी कराकर भी नोट्स बांट सकते हैं, लेकिन कोशिश ये है कि बच्चों के अंदर मदद का भाव विकसित हो। बच्चे बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के हाल देखकर बहुत दुखी थे। सारे बच्चे और शिक्षक खुशी-खुशी छुट्टी वाले दिन भी स्कूल आ रहे हैं।" 
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