फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   10 years before death Jayalalithaa was living in a house that had been attached by IT department

जयललिता ने जिस घर में बिताए अपने आखिरी दिन उसपर आयकर विभाग का था कब्जा

Fri, 25 Jan 2019 08:45 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 25 Jan 2019 08:45 AM IST
विज्ञापन
10 years before death Jayalalithaa was living in a house that had been attached by IT department
जे जयललिता - फोटो : PTI

अपनी मौत से दस साल पहले तक तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जिस घर में रहती थी उसे आयकर विभाग ने 16.74 करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से अटैच किया हुआ था। यह तथ्य तब सामने आया जब मद्रास हाईकोर्ट के सामने आयकर विभाग ने कहा कि वेद निलायम, जयललिता का पॉ़श गार्डन रेसीडेंस साल 2007 से ही विभाग ने अटैच किया हुआ था।

विज्ञापन


विभाग के स्थायी वरिष्ठ परामर्शदाता एपी श्रीनिवास ने बताया कि वेद नियालम के अलावा तीन और संपत्ति- दो चेन्नई में और एक हैदराबाद को भी विभाग ने अटैच किया हुआ था। यह प्रस्तुतियां जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं। याचिका राज्य सरकार को वेद निलायम को स्मारक के तौर पर बदलने से रोकने के लिए दाखिल की गई है। जिसे सामाजिक कार्यकर्ता केआर रामास्वामी ने दाखिल किया है।
विज्ञापन


हाल ही में अदालत ने आयकर विभाग से वेद निलायम को स्मारक में बदलने को लेकर उसकी आपत्तियां पूछी थीं। जिसके बाद श्रीनिवास ने अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था। ताकि वह आकलन की स्थिति, वसूली को लेकर विभाग का पक्ष और वर्तमान याचिका में दी गई राहत को लेकर जारी आपत्ति पर जवाब दे सकें। इसके जवाब में एडवोकेट जनरल विजय नारायण का कहना है कि इस तरह के टैक्स को राज्य सरकार मुआवजा देकर क्लीयर कर सकती है। इस मामले पर अब अगली 7 फरवरी को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं मद्रास हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि आय से अधिक मामले में जयललिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया है जिसमें जयललिता की याद में बनाए जा रहे स्मारक के निर्माण को चुनौती दी गई थी। जस्टिस एम. सत्यनारायणन और जस्टिस पी. राजामाणिकम ने यह फैसला दिया।


देसीय मक्काल शक्ति काची के अध्यक्ष एमएल रवि ने स्मारक निर्माण को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। उन्होंने तमिलनाडु सरकार को स्मारक निर्माण पर सार्वजनिक कोष से धन खर्च नहीं करने का निर्देश देने की मांग की थी। याची ने यह भी कहा था कि यदि सरकार ने खर्च किया है तो पूर्व मुख्यमंत्री की संपत्ति से धन वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी करार दी गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed