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Hindi News ›   India News ›   10 key points of monday debate on noteban in parliament winter session

अघोषित आय 50 फीसदी टैक्स देकर जमा करें, पकड़े गए तो देना होगा 85 फीसदी कर

Tue, 29 Nov 2016 05:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 29 Nov 2016 05:37 AM IST
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10 key points of monday debate on noteban in parliament winter session
- फोटो : फाइल फोटो

कालेधन रखने वालों को एक और मौका देते हुए सरकार ने अघोषित आय का खुलासा करने पर करीब 50 प्रतिशत और नहीं बताने वालों पर जुर्माना सहित 85 प्रतिशत कर चुकाने का प्रावधान रखा है। इस संबंध में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोकसभा में आयकर संशोधन विधेयक पेश किया। इस विधेयक के मुताबिक, नोटबंदी के बाद जमा की गई अघोषित आय पर 30 प्रतिशत कर, 10 प्रतिशत जुर्माना और कर का 33 प्रतिशत सरचार्ज वसूला जाएगा। 

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इस बिल के कानूनी जामा पहनने के बाद अघोषित संपत्ति रखने वालों को बड़ी कीमत चुकानी होगी। मसलन, नोटबंदी के बाद कालेधन घोषित करने वालों की आय का 49.9 प्रतिशत हिस्सा कर, जुर्माना और गरीब कल्याण योजना सेस में ही चला जाएगा। इतना ही नहीं, अघोषित आय का खुलासा नहीं करने वाले व्यक्तियों को अपनी अघोषित आय का 75 प्रतिशत हिस्सा कर और 10 प्रतिशत जुर्माने के तौर पर चुकाना पड़ जाएगा। कालेधन रखने वालों को 25 फीसदी रकम सरकार द्वारा लाई जाने वाली गरीबी उन्मूलन योजना में कम से कम चार साल (लॉक-इन अवधि) के लिए निवेश करना होगा। निवेशकों को इस रकम पर ब्याज नहीं मिलेगा। 
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वर्तमान कानून के मुताबिक, अघोषित आय पर अधिकतम 30 फीसदी ही कर वसूले जाने का प्रावधान है। विधेयक में संशोधन के जरिये सरकार ने 33 फीसदी सरचार्ज के रूप में वसूलने का प्रावधान किया है, जिसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना सेस का नाम दिया गया है। इस योजना के तहत जमा धन से गरीबों के कल्याण से संबंधित कार्य कराए जाएंगे। इस राशि को शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना पर खर्च किया जाएगा। आयकर संशोधन बिल के मुताबिक स्वत: अघोषित आय की घोषणा करने वालों को 30 फीसदी कर, 10 फीसदी जुर्माना और कर (30 फीसदी) का  33 फीसदी गरीब कल्याण सेस के रूप में चुकाना होगा। 

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खुलासा नहीं करने वालों के लिए कड़ा प्रावधान

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संसद

बिल के मुताबिक, अघोषित आय का खुलासा नहीं करने वालों के लिए और भी कड़ा प्रावधान है। अगर आयकर विभाग ने अघोषित संपत्ति पकड़ी तो ऐसे लोगों को कर और जुर्माने के रूप में अघोषित संपत्ति की 85 फीसदी रकम चुकानी होगी। दरअसल नोटबंदी के बाद जनधन खातों के जरिये काली कमाई को सफेद बनाने की गतिविधियों को देखते हुए सरकार ने आयकर कानून में संशोधन का फैसला किया है। सरकार को इस फैसले से जनधन खातों में 22000 करोड़ रकम जमा होने का अनुमान है। 

विपक्ष का विरोध झेल रही सरकार ने इस विधेयक को पेश करने के लिए मनी बिल का सहारा लिया। इसका मतलब यह हुआ कि इसे अब राज्यसभा से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोकसभा में वित्त मंत्री ने जिस समय संशोधन बिल पेश किया, उस दौरान कई विपक्षी दलों के सांसद वेल में जम कर नारेबाजी कर रहे थे। भोजनावकाश के बाद हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री ने बिल को पेश किया।

अघोषित आय का खुलासा करने पर 
यदि किसी ने 100 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा किया तो उसे 30 करोड़ टैक्स, 10 करोड़ जुर्माना और टैक्स पर 33 प्रतिशत सरचार्ज यानी 9.90 करोड़ देना होगा। इस प्रकार उसके कुल 49.90 करोड़ रुपये कट जाएंगे। इसके अलावा 25 करोड़ रुपये चार साल के लिए लॉक-इन में भी चले जाएंगे। यानी तत्काल उसके हाथ आएंगे सिर्फ 25.10 करोड़ रुपये। 

अघोषित आय का खुलासा नहीं करने पर 
यदि किसी के पास आयकर विभाग ने 100 करोड़ रुपये की अघोषित आय पकड़ी तो बतौर टैक्स 75 प्रतिशत और जुर्माना 10 प्रतिशत उसके 85 करोड़ रुपये सरकारी खाते में चले जाएंगे। उसके हाथ सिर्फ 15 करोड़ रुपये आएंगे। 

आईटी विभाग नहीं पूछेगा जमा रकम का स्रोत: अढ़िया 

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राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया

राजस्व सचिव हसमुख अढ़िया ने स्पष्ट किया है कि नोटबंदी की घोषणा के बाद जो लोग अपनी आय का खुलासा और 50 प्रतिशत कर चुकाते हुए बैंकों में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट जमा करते हैं, उनसे आयकर विभाग इस रकम के स्रोत नहीं पूछेगा। इस खुलासे में संपत्ति कर, निगम कर और अन्य कर नहीं चुकाने की तो छूट रहेगी लेकिन फेमा, पीएमएलए, नारकोटिक्स तथा कालेधन कानून के तहत छूट नहीं मिलेगी। अढ़िया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संशोधन 8 नवंबर से पूर्व उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जिन लोगों ने अभी तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है क्योंकि वित्त वर्ष शुरू हो चुका है।

गांव और सरकारी केंद्र भी जुड़ेगे कैशलेस योजना से: प्रसाद 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांवों में कैशलेस लेनदेन को लोकप्रिय और सुविधासंपन्न बनाने के लिए सरकारी स्कूलों, सहकारी संस्थाओं, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्रामीण बैंकों तथा डाकघरों को जोड़ने की योजना बनाई है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने छह सदस्यीय मंत्रिमंडल समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता के दौरान यह जानकारी दी। इस बैठक में बिजली और कोयला मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र तोमर शामिल थे। 

जब-जब जरूरत पड़ी, छूट देती रही सरकार: हाईकोर्ट 
नोटबंदी के बाद शादी के खर्च के लिए 2.5 लाख रुपये देने में और छूट की मांग करने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार तक फैसला सुरक्षित रखा। अदालत ने कहा कि जब-जब जरूरत महसूस की गई, सरकार ने नकद निकासी पर छूट देने का प्रावधान किया है। याचिका में जुर्माना और कोर्ट फीस भरने के लिए पुराने नोट को वैध कराने की भी मांग की गई थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने मंगलवार तक के लिए फैसला सुरक्षित रखा।

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