Pollution: सिगरेट-तंबाकू से पैदा हो रहा 1.70 लाख टन कचरा, कचरे से 43.2% निकल रही प्लास्टिक
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा कि बीड़ी, सिगरेट और अन्य धुआं रहित तंबाकू से देश में सालाना 170,330.49 टन कचरा पैदा हो रहा है जिसमें बड़ा हिस्सा धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के कारण है। इनसे करीब 115,714.83 टन कचरा एकत्रित हो रहा है।
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देश में हर साल सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों से 1.70 लाख टन कचरा पैदा हो रहा है। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 20.91% कचरा एकत्रित हो रहा है। वहीं महाराष्ट्र में 8.85%, पश्चिम बंगाल में 8.57%, बिहार में 6.57% और मध्य प्रदेश में तंबाकू उत्पादों का 6.22% कचरा पैदा हो रहा है।
देश का 50 फीसदी से ज्यादा कचरा इन्हीं पांच राज्य में निकल रहा है, जिसके निस्तारण के लिए नगर निकाय और निगम प्रशासन के पास संसाधन नहीं हैं। यह जानकारी नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के नोएडा स्थित राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान, इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरक्लोसिस एंड लंग डिजीज और जोधपुर एम्स के एक संयुक्त अध्ययन में सामने आया है, जिसे मेडिकल जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया ने प्रकाशित किया है।
40 टन कचरे का कारण सिगरेट
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कहा कि बीड़ी, सिगरेट और अन्य धुआं रहित तंबाकू से देश में सालाना 170,330.49 टन कचरा पैदा हो रहा है जिसमें बड़ा हिस्सा धुआं रहित तंबाकू उत्पादों के कारण है। इनसे करीब 115,714.83 टन कचरा एकत्रित हो रहा है। वहीं, सिगरेट से 40,846.15 और 13,769.51 टन कचरे का कारण बीड़ी है। गंभीर तथ्य यह हैं कि तंबाकू उत्पादों से एकत्रित कचरे में सर्वाधिक 43.2% यानी 73,500.66 टन हिस्सा प्लास्टिक का है और बाकी 6074 टन फॉइल, फिल्टर 1354.23 और 89,402.13 टन कागज कचरे में शामिल है।
पर्यावरण के लिए बहुत घातक
शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि प्लास्टिक के साथ मिश्रित करके इस कचरे को निस्तारित किया जाए तो यह गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा बन जाता है जो पर्यावरण के लिए काफी घातक है। इनका यह निष्कर्ष राष्ट्रीय स्तर पर जनवरी से अप्रैल 2022 के बीच करीब 222 ब्रांड के तंबाकू उत्पादों के कचरे को 17 राज्यों से एकत्रित करने के बाद उनका निस्तारण करने का प्रयास किया। केंद्र, राज्य सरकार के गंभीर फैसले जरूरी शोधकर्ताओं का कहना है कि तंबाकू उत्पादों से एकत्रित कचरे के निस्तारण को लेकर केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि पूरी दुनिया में 81 फीसदी धुआं रहित तंबाकू का सेवन दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में हो रहा है। भारत में 27 करोड़ से ज्यादा लोग सक्रिय तंबाकू का सेवन कर रहे हैं।