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पंजाब यूनिवर्सिटी ने लिया अजीबोगरीब फैसला, हेरिटेज लाइब्रेरी से बाहर किया गया स्टाफ, जानिए क्यों
Fri, 28 Jun 2019 12:54 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 12:54 PM IST
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पंजाब विश्वविद्यालय का एक और अजीबो-गरीब फैसला सामने आया है। यह फैसला है, हेरिटेज एसी जोशी लाइब्रेरी का तकनीकी स्टॉफ बाहर कर दिया गया, इनकी जगह आईसीएसएसआर का ऑफिस शिफ्ट किया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि तकनीकी स्टॉफ को बाहर किया गया है, लेकिन उन्हें शिफ्ट करने के लिए जगह नहीं दी गई, जबकि 30 जून तक खाली करने को कहा गया है। इसे लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। इसके साथ ही शिक्षकों ने भी नाराजगी जताई है।
उनका कहना है कि पीयू प्रशासन यह फैसला वापस ले। उधर, डीयूआई प्रो. शंकर जी झा ने कहा है कि तकनीकी स्टाफ को बाहर नहीं किया गया है, उन्हें जगह दी गई है। एसी जोशी लाइब्रेरी को आगे बढ़ाने के लिए उसमें तैनात हर कर्मचारी का योगदान है। उनकी बदौलत हेरिटेज भवन बना है। हर चीज का यहां बेहतर रखरखाव है। यहां से हजारों विद्यार्थी पढ़कर निकले हैं, जो देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। लाइब्रेरी में स्थापित हर विभाग का अपना रोल होता है।
तकनीकी विभाग नई किताबों को देखता है और टेकिभनकल रूप से आने वाली बाधाओं को दूर करता है। महत्वपूर्ण विभाग है, हर समय इसकी जरूरत लाइब्रेरी को रहती है। हाल ही में पीयू ने आदेश जारी कर इस विभाग को लाइब्रेरी से बाहर जाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन कहां स्थापित होगा, यह नहीं बताया गया। इसकी जगह आईसीएसएसआर का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है।जानकारों का कहना है कि आईसीएसएसआर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का भवन है, उस पर पूरा आधिपत्य मंत्रालय का होता है। निदेशक भी वहीं से चयनित होते हैं।
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ऐसे में पीयू की लाइब्रेरी में उसे क्यों स्थान दिया जा रहा है, जबकि उसका अलग से भवन है। यह केवल राजनीतिक रूप से किया जा रहा है। वहीं, पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल व सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने वाइस चांसलर को चिट्ठी भेजी है। उन्होंने कहा है कि तकनीकी स्टाफ की लाइब्रेरी को जरूरत है, उन्हें बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इस आदेश को वापस लिया जाए ताकि कर्मचारियों में हीन भावना न पैदा हो।
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उनका कहना है कि पीयू प्रशासन यह फैसला वापस ले। उधर, डीयूआई प्रो. शंकर जी झा ने कहा है कि तकनीकी स्टाफ को बाहर नहीं किया गया है, उन्हें जगह दी गई है। एसी जोशी लाइब्रेरी को आगे बढ़ाने के लिए उसमें तैनात हर कर्मचारी का योगदान है। उनकी बदौलत हेरिटेज भवन बना है। हर चीज का यहां बेहतर रखरखाव है। यहां से हजारों विद्यार्थी पढ़कर निकले हैं, जो देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। लाइब्रेरी में स्थापित हर विभाग का अपना रोल होता है।
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तकनीकी विभाग नई किताबों को देखता है और टेकिभनकल रूप से आने वाली बाधाओं को दूर करता है। महत्वपूर्ण विभाग है, हर समय इसकी जरूरत लाइब्रेरी को रहती है। हाल ही में पीयू ने आदेश जारी कर इस विभाग को लाइब्रेरी से बाहर जाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन कहां स्थापित होगा, यह नहीं बताया गया। इसकी जगह आईसीएसएसआर का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है।जानकारों का कहना है कि आईसीएसएसआर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का भवन है, उस पर पूरा आधिपत्य मंत्रालय का होता है। निदेशक भी वहीं से चयनित होते हैं।
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ऐसे में पीयू की लाइब्रेरी में उसे क्यों स्थान दिया जा रहा है, जबकि उसका अलग से भवन है। यह केवल राजनीतिक रूप से किया जा रहा है। वहीं, पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल व सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने वाइस चांसलर को चिट्ठी भेजी है। उन्होंने कहा है कि तकनीकी स्टाफ की लाइब्रेरी को जरूरत है, उन्हें बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इस आदेश को वापस लिया जाए ताकि कर्मचारियों में हीन भावना न पैदा हो।