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और कितना इंतजार...72 साल में भी रिजर्व सीटों के लिए रोस्टर लागू नहीं कर पाई पंजाब यूनिवर्सिटी
Sun, 09 Jun 2019 02:31 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jun 2019 02:31 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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देश को आजाद हुए 72 साल हो गए। रिजर्वेशन के लिए रोस्टर हर जगह लागू हो गया, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी में आज तक टीचर्स व कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला है। हर छह माह में एक रोस्टर प्रस्तुत किया जाता है, मगर वह नियमों का पालन ही नहीं कर पाता। टीचर्स की सीटों के बंटवारे के लिए पुराना एक रोस्टर बना हुआ है, लेकिन उसको लागू करने में पीयू की सिंडिकेट व सीनेट बहाने बनाने लगती है।
लगातार हो रही देरी में 1550 से अधिक शिक्षक व कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। सीटें निर्धारित नहीं होने के कारण उनकी भर्तियां भी नहीं हो पा रही हैं। इससे इनमें आक्रोश पनप रहा है। टीचर व कर्मचारी मिलकर नए शैक्षिक सत्र में बड़ा आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं।
शिक्षण संस्थानों में सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी व डिसेबल की सीटें निर्धारित हैं। रिजर्व कैटेगरी को भी हर सातवीं सीट दिया जाना तय है, लेकिन पीयू में ऐसा अब तक नहीं किया गया। यहां 7000 हजार शिक्षक व कर्मचारी काम कर रहे हैं। 22.50 फीसदी कोटा है, इस तरह 1550 से अधिक सीटें एससी एसटी को जानी हैं। इसके लिए पूर्व में रोस्टर बनाया गया, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
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इसी तरह कर्मचारियों का रोस्टर भी अभी अटका हुआ है। कई बार इसको लेकर मांग की गई मगर पीयू के जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हाल ही में सीनेट की बैठक में एक रोस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसकी जांच एसोसिएशन के लोगों ने की तो वह गलत पाया गया। डॉ. अजय रंगा समेत कई सदस्यों ने इस मामले को उठाया और पुराना रोस्टर लागू करने की मांग की।
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लगातार हो रही देरी में 1550 से अधिक शिक्षक व कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। सीटें निर्धारित नहीं होने के कारण उनकी भर्तियां भी नहीं हो पा रही हैं। इससे इनमें आक्रोश पनप रहा है। टीचर व कर्मचारी मिलकर नए शैक्षिक सत्र में बड़ा आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं।
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शिक्षण संस्थानों में सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी व डिसेबल की सीटें निर्धारित हैं। रिजर्व कैटेगरी को भी हर सातवीं सीट दिया जाना तय है, लेकिन पीयू में ऐसा अब तक नहीं किया गया। यहां 7000 हजार शिक्षक व कर्मचारी काम कर रहे हैं। 22.50 फीसदी कोटा है, इस तरह 1550 से अधिक सीटें एससी एसटी को जानी हैं। इसके लिए पूर्व में रोस्टर बनाया गया, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
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इसी तरह कर्मचारियों का रोस्टर भी अभी अटका हुआ है। कई बार इसको लेकर मांग की गई मगर पीयू के जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हाल ही में सीनेट की बैठक में एक रोस्टर प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसकी जांच एसोसिएशन के लोगों ने की तो वह गलत पाया गया। डॉ. अजय रंगा समेत कई सदस्यों ने इस मामले को उठाया और पुराना रोस्टर लागू करने की मांग की।
शिक्षकों और कर्मचारियों का मारा जा रहा हक
रोस्टर काफी पहले बना दिया गया था लेकिन इसे लागू करने के लिए राजनीति की जा रही है। तमाम शिक्षकों और कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। रिजर्व कैटेगरी के शिक्षकों को हक दिलाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
- डॉ. अजय रंगा, सीनेट सदस्य
आर पार की लड़ाई लड़ेंगे
पीयू की नियत में खोट है, इसलिए अब तक रोस्टर लागू नहीं किया जा सका। तमाम बार कर्मचारियों की इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया। अब इसके लिए आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
- हरप्रीत सिंह, प्रधान, एससी, एसटी, ओबीसी एसोसिएशन
कमेटी बनाकर
रोस्टर लागू करवाने का वायदा मैंने शिक्षक व कर्मचारियों से कर रखा है। सोमवार के बाद कमेटी बनाकर यह तैयार करवाया जाएगा। जैसे तैयार होगा तो इसे लागू करवाएंगे।
--- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार
- डॉ. अजय रंगा, सीनेट सदस्य
आर पार की लड़ाई लड़ेंगे
पीयू की नियत में खोट है, इसलिए अब तक रोस्टर लागू नहीं किया जा सका। तमाम बार कर्मचारियों की इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया। अब इसके लिए आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।
- हरप्रीत सिंह, प्रधान, एससी, एसटी, ओबीसी एसोसिएशन
कमेटी बनाकर
रोस्टर लागू करवाने का वायदा मैंने शिक्षक व कर्मचारियों से कर रखा है। सोमवार के बाद कमेटी बनाकर यह तैयार करवाया जाएगा। जैसे तैयार होगा तो इसे लागू करवाएंगे।
--- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार