Gujarat Election: आज भी यहां पानी लेने मीलों दूर जाती है महिलाएं, आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे और जानवर साथ-साथ
Gujarat Election: स्थानीय लोगों का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने जो अपने वादे किए हैं वह लुभावने लगते हैं। गांव के हीरेन कहते हैं कि बिजली-पानी फ्री और महिलाओं को फ्री में मिलने वाले रुपये लोगों को आम आदमी पार्टी की ओर आकर्षित करते हैं...
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द्वारका से राजकोट अहमदाबाद हाईवे पर एक गांव पड़ता है गोंडाला। एकदम हाईवे से लगे इस गांव में पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का बड़ा संकट बना हुआ है। इस गांव में राज्य सरकार की ओर से जो आंगनवाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है, वहां जानवर और बच्चे एक साथ बैठते हैं। गांव के लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उन्हें पेय जल के लिए तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जो पानी नहीं लाते हैं, तो उसके लिए 500 रुपये खर्च करके पानी वाला टैंकर मंगाना पड़ता है, जो गांव के सभी लोगों के लिए आसान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार इस समस्या से जिम्मेदार अधिकारियों को रूबरू भी कराया गया, लेकिन आज तक उनकी समस्या का निदान नहीं हुआ। अमर उजाला डॉट कॉम से गोंडाला के स्थानीय लोगों ने अपनी ऐसी ही समस्याओं पर खुलकर बातचीत की।
नहीं मिल रहा समस्या का कोई निदान
राजकोट जाने वाले हाईवे से उतरकर बमुश्किल 100 मीटर चलते ही गोंडाल गांव में दाहिनी ओर आंगनबाड़ी चलता हुआ केंद्र मिला। इस केंद्र में जाने पर सबसे पहले छुट्टा जानवर अंदर बैठे दिखे और चल रहे आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की एक्टिविटीज दिखीं। इस आंगनवाड़ी केंद्र पर काम करने वालीं कैलाश सोलंकी कहती हैं कि इसी परिसर में जानवरों के बीच आंगनवाड़ी केंद्र चलाना बच्चों के लिए खतरनाक है। कैलाश कहती हैं कि इसी वजह से वह बच्चों को मैदान में नहीं जाने देती हैं। उनका कहना है कि बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र पर सुविधाएं तो सारी हैं, लेकिन यहां पर एक स्टाफ होने के चलते समस्याओं का सामना ज्यादा करना पड़ता है। वह कहती हैं कि जानवरों को और बच्चों के इस सेंटर के एक साथ होने की समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन से उन्होंने कहा भी है, लेकिन उसका कोई निदान नहीं हुआ।
इसी केंद्र पर मौजूद गांव की ऊषाबेन कहती हैं कि गांव में कई तरह की समस्याएं हैं। उनका कहना है सबसे ज्यादा पानी को लेकर समस्या बनी रहती है। ऊषाबेन कहती हैं कि पानी लेने के लिए उन्हें गांव से तकरीबन तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस सेंटर पर मौजूद गांव की और भी महिलाएं यह बताती हैं कि पानी के लिए जो लोग दूर नहीं जाते हैं उन्हें 500 रुपये खर्च करके पानी का टैंकर मंगाना पड़ता है। यहां मौजूद महिलाओं का कहना है कि पानी की समस्या बीते कई सालों से बनी हुई है। उनका कहना है कि लगातार स्थानीय प्रशासन से गांव के पंच-सरपंच गुहार लगाते रहते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। हालांकि इन सबके बीच जब गुजरात में चल रहे चुनावों के माहौल को लेकर बात शुरू होती है, तो महिलाओं का कहना है कि उनके पास भाजपा के नेता लगातार आते रहते हैं। इसलिए वोट तो वे भाजपा को ही देंगी।
फ्री बिजली-पानी के 'आप' के वादे लुभावने
गांव के ही रहने वाले मनसुखभाई बताते हैं कि समस्याएं तो बनी हुई हैं। उन्होंने गांव की एक बुजुर्ग महिला से मुलाकात कराते हुए कहा कि इन्हें सरकार की ओर से दिया जाने वाला घर अब तक नहीं मिला है। बुजुर्ग महिला ने बताया कि जो दस्तावेज घर लेने के लिए दिए जाने थे, वे सभी उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को दे दिए हैं, बावजूद इसके उन्हें अभी तक घर नहीं मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में चुनाव के दौरान तो सभी पार्टियों भाजपा, आप और कांग्रेस के नेता आते हैं। चुनावी माहौल को समझने के लिए जब गांव के युवाओं से बात की, तो उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी ने जो अपने वादे किए हैं वह लुभावने लगते हैं। गांव के हीरेन कहते हैं कि बिजली-पानी फ्री और महिलाओं को फ्री में मिलने वाले रुपये लोगों को आम आदमी पार्टी की ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन उनका कहना है कि उनका गांव ज्यादातर कांग्रेस और भाजपा को ही वोट देता आया है। ऐसे में इस बार भी चुनावी माहौल कुछ उसी तरीके से बन रहा है।
गांव के स्थानीय लोग कहते हैं कि इस गांव में चुनावी मुद्दों के तौर पर सबसे बड़ी समस्या पानी की ही बनी हुई है। हालांकि गांव के अंदर सड़कें बेहतर और साफ सुथरी हैं। हाईवे से लगते हुए इस गांव के भीतर जो और सुविधाएं होनी चाहिए वह भी हैं। जिसमें ग्राम पंचायत में डिस्पेंसरी और सरकारी स्कूल के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्र भी बना हुआ है। कहते हैं कि अगर उन्हें पीने के लिए बेहतर पानी मिल जाए, तो उनकी एक बड़ी समस्या का निदान हो जाएगा। लेकिन कोई भी राजनीतिक दल उनकी समस्या के साथ खड़ा नहीं होता है। यही वजह है कि इस गांव में पानी समस्या बनी हुई है और यहां की महिलाओं को पीने का पानी लेने के लिए बड़ी दूर जाना पड़ता है।