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मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चे हो रहे नोमोफोबिया के शिकार  

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 06:40 PM IST
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मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चे हो रहे नोमोफोबिया के शिकार  
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बच्चों के मानसिक प्रभाव पर डाल रहा असर अनिद्रा और आंखों में सूखेपन की भी शिकायत  अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। लॉकडाउन और अनलॉक के बीच चल रहे ऑनलाइन क्लास के जरिए बच्चे मोबाइल के बेहद करीब हो गए हैं। क्लास के बाद भी उनका मोबाइल से मोह नहीं छूट रहा है। यही वजह है कि नींद में भी उन्हें मोबाइल के मैसेज आने का आभास हो रहा है। ऐसी समस्या केवल एक दो किशोरों और किशोरियों की नहीं है। बल्कि तमाम ऐसे किशोर और किशोरियां हैं, जिन्हें इस तरह की शिकायतें हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक तरह का मानसिक डिस्ऑर्डर  (नोमोफोबिया) है। कोरोना महामारी के बीच किशोर और किशोरियों को छह से आठ घंटे मोबाइल स्क्रीन पर ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसकी वजह से अधिकांश समय इनका समय मोबाइल पर ही बीत रहा है। ऐसे में अब यह सुविधा उनके लिए और अभिभावकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। इसका नतीजा यह है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग में इस तरह की शिकायतें अभिभावकों ने की है। कई किशोरों की काउंसिलिंग भी कराई गई है। प्रतिदिन दो से तीन बच्चे नोमोफोबिया के पहुंच भी रहे हैं। कई तो फोन पर ही सलाह भी ले रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज मनोविज्ञान विभाग के एचओडी डॉ तपस ने बताया कि किशोरों में नोमोफोबिया के लक्षण सबसे अधिक पाए जाते हैं। ऑनलाइन क्लास के बाद किशोरों में यह तेजी से बढ़ा है। बार-बार मोबाइल के नोटिफिकेशन को चेक करना। किसी दूसरे के मोबाइल बजने पर खुद का मोबाइल चेक करना, नींद खुलते ही मोबाइल चेक करना इसके लक्षण हैं। बताया कि कई बच्चे अनिद्रा और आंखों के सूखेपन की भी शिकायत कर रहे हैं। उन्हें आंखों के डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी जा रही है। 
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----------- इन तरीकों से बचाएं  डॉ तपस ने बताया कि ऑनलाइन क्लास के बाद हो सके तो बच्चों को तत्काल मोबाइल से दूर कर दें। क्लास के बाद उनसे परिवार के लोग बात करें। सोशल साइट फेसबुक, ट्विटर जैसे एप से दूर रहने की सलाह दें। उन्हें सलीके से समझाएं। बताया कि ऐसी स्थिति में कोई दवा की जरूरत नहीं है। बेहतर काउंसिलिंग के जरिए उनकी इन आदतों को दूर किया जा सकता है। 
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--------- केस-एक  रूस्तपुर के रहने वाले एक प्रशांत जायसवाल ने बच्चे के ऑनलाइन क्लास के लिए नया मोबाइल खरीद कर दिया। क्लास के बाद बच्चा सोशल साइट फेसबुक,ट्विटर जैसे सोशल साइट से जुड़ गया। क्लास खत्म होते ही वह सोशल साइट पर बिजी हो जाता है। इसकी वजह उसे नींद न आने की शिकायत होने लगी। डॉक्टरों ने काउंसिलिंग की और बताया कि बच्चो नोमोफोबिया का शिकार है। 
--------- राजेंद्र नगर के रहने वाले शिक्षक संजय द्विवेदी ने ऑनलाइन क्लास के लिए बेटे को नया मोबाइल दिलाया। बेटा क्लास के बाद दोस्तों का एक व्हाट्सग्रुप बनाकर बात करने लगा। बात के बीच-बीच में वह जोर-जोर से हंसने भी लगता था। नींद खुलते ही वह पहले मोबाइल के मैसेज को चेक करता था। परिजन डॉक्टर के पास लें गए। काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि नोमोफोबिया हुआ है। इसके बाद परिजन क्लास के बाद बच्चे का मोबाइल अपने पास रख लेते हैं।  ---------
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