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‘अमर उजाला बेस’ की अनूठी पहल: 'संवाद' में विशेषज्ञों ने किया मंथन, कैसे बढ़े रोजगार?

Fri, 31 Jan 2020 03:56 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Fri, 31 Jan 2020 03:56 AM IST
सार

अमर उजाला फेसबुक पेज पर इस संवाद कार्यक्रम को दो घंटे में आठ हजार लोगोें ने लाइव देखा। वहीं इस प्रोग्राम तक 32 हजार लोगों की रीच रही।

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amar ujala base first event sanwad covered by gorakhpur fb page on live, ask questions to expert
संवाद के तहत अपने विचार रखते विशेषज्ञ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

रोजगार की कहीं कोई कमी नहीं है। सिर्फ सरकारी नौकरी ही रोजगार नहीं है, स्वरोजगार के क्षेत्र में बहुत सारी संभावनाएं है। बस जरूरत है हमें अपना नजरिया बदलने की। यह कहना था शहर के बुद्धजीवी, अधिवक्ता, चिकित्सकों , उद्यमी, खिलाड़ी और विद्यार्थियों का।
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जिन्होंने अमर उजाला के सिटी कार्यालय में बृहस्पतिवार को बेस (बिजनेस एकेडमिक एंड सोशल आंत्रप्रेन्योर) एक्टिविटी के अंतर्गत आयोजित संवाद ‘रोजगार-वर्तमान स्थिति, अवसर, चुनौतियां एवं समाधान’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि युवा खुद की प्रतिभा को पहचाने। कॅरियर की राह में सही विकल्प चुने। अभिभावक भी अपनी इच्छा को मत बच्चों पर न थोपें।
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समाज में हर काम को सम्मान मिले। अगर समाज के सभी वर्ग के लोग मिलकर ऐसा करें, तो रोजगार के क्षेत्र में आने वाली समस्याएं अपने आप समाप्त हो सकती हैं।  

अमर उजाला के पाठकों ने इसे गोरखपुर हाइपर लोकल (डिजिटल संस्करण) gorakhpur.amarujala.com पर, फेसबुक यूजर्स ने  https//www.facebook.com/aunewsgorkhpur/ पर पूरे आयोजन को लाइव देखा। आप भी फेसबुक लाइव के पूरे वीडियो को यहां भी देख सकते हैं
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स्कूलों में पढ़ाई व्यवहारिक नहीं है। बच्चे डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन रोजगार नहीं पाते हैं। इसके बाद उनमें कुंठा आती है। गलत रास्ते पर चले जाते हैं। अगर उन्हें हम बचपन से ही कॅरियर की जानकारी दें। तो बड़ा होने पर वे भटकेंगे नहीं। उनके जिस तरह की प्रतिभा होगी, उसी दिशा में कॅरियर चुनने की कोशिश करेंगे।
रूपल त्रिपाठी, अधिवक्ता

समस्या शिक्षा पद्धति में है। अतीत से लेकर आज तक युवाओं में मेधा की कमी नहीं है। अगर कमी है तो अवसर की। हम सैद्धांतिक पद्धति को लेकर चल रहे हैं, लेकिन यह व्यवहारिक होनी चाहिए। शिक्षा ऐसी हो कि बच्चे में कौशल विकास बढ़ाए। जब तक हमारी सोच बदलेगी तभी समाज भी बदलेगा। युवाओं को खुद के कौशल को पहचानना होगा।
शालिनी श्रीवास्तव, रिसर्च स्कॉलर

मॉडलिंग के क्षेत्र में कॅरियर की संभावनाएं हैं, लेकिन अभिभावक इस क्षेत्र में अपने बच्चों को भेजने में रुचि नहीं लेते हैं। सरकार की ओर से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि पूर्वांचल में इस विधा में युवा कॅरियर  नहीं चुन रहे हैं।
श्रेया सिंह, मॉडल
 
खेल के क्षेत्र में सरकार की ओर से सुविधाएं बहुत कम है। अगर सरकारी सहयोग मिले तो खेल भी रोजगार का जरिया बन सकता है।
प्रतिज्ञा उपाध्याय, ताइक्वांडो खिलाड़ी

अभिभावक और बच्चों में संवादहीनता बढ़ी है। यह एक बड़ा पहलू है कि बच्चे अपनी रुचि के क्षेत्र में कॅरियर नहीं बना पा रहे हैं। पूर्वांचल में एडवेंचर कंपनी नहीं है। इसमें भी रोजगार की संभावनाएं है।
नितिश सिंह, पर्वतारोही

युवाओं को सबसे पहले अपनी क्षमता और योग्यता को पहचानने की जरूरत है। हम जिस लायक हैं, उसी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशें। जानकारी के अभाव में गलत राह चुनते हैं और क्षमता के बावजूद भी रोजगार नहीं पाते हैं।
देव येंदुनाथ, आयकर अधिवक्ता

स्वरोजगार ही बेरोजगारी की समस्या का विकल्प है। जनसख्ंया के अनुपात में संसाधन और सुविधाएं दोनों कम हैं। 94 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में रोजगार कर रहे हैं। इसे संगठित क्षेत्र में शिफ्ट करना होगा। ऐसे में लेबर लॉ में बदलाव की जरूरत है। इनवेस्टर्स को आकर्षित करने के उपाय भी ढूंढ़ने होंगे।
नमित आनंद, मैनेजर यूनियन बैंक आफ इंडिया

युवाओं में स्किल व टैंलेंट का डेवलपमेंट कम है। उनके पास ज्ञान तो है, लेकिन कौशल विकास कम होने से भटकाव की स्थिति है। ऐसे में ज्यादा आवश्यकता है कि कौशल विकास पर फोकस किया जाएगा। हालांकि सरकारी प्रयास हो रहें हैं लेकिन उनका नतीजा भी सरकारी योजनाओं की तरह है।
ऐश्वर्या श्रीवास्तव, एमबीए स्टूडेंट आईटीएम गीडा

अभिभावकों के दृष्टिकोण में समस्या है। वे अपनी शर्तों और इजाजत को बच्चों पर थोपते हैं। इसलिए उनकी काउंसिलिंग बहुत जरूरी है। हमारे समाज में काम को समुदाय से जोड़ दिया गया है। मसलन, हज्जाम ही हजामत करेगा और और धोबी ही कपड़ा धोएगा। इस अवधारणा को बदलना होगा, रोजगार के बहुत अवसर सामने होंगे।
प्रो. धनंजय कुमार, मनोविज्ञानी गोरखपुर विश्वविद्यालय

प्राइवेट नौकरी में युवा असुरक्षा की भावना महसूस कर रहे हैं। ऐसे में हर किसी की उम्मीद सरकारी नौकरी पाने की होती है। अपने नजरिए को बदलना होगा। वहीं सरकार को भी प्राइवेट नौकरी में सुरक्षा की भावना जागृत करनी पड़ेगी। पढ़ाई के दौरान अनुभवी लोगों से कॅरियर चुनने में मदद लें। माता-पिता की काउंसिलिंग भी अनिवार्य है।
प्रो. विनीता पाठक, कैप्टन एनसीसी 15वीं यूपी गर्ल्स बटालियन

जिस विद्यार्थी में स्किल है वह बेरोजगार नहीं हो सकता है, लेकिन कई बार माता-पिता बच्चों को कॅरियर चुनने में गलत सुझाव देते हैं। वहीं गांव के लोग सरकारी योजनाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं। हमें छोटे-बड़े हर जॉब को सम्मान देना होगा। एक बात और, अपने को अपग्रेड कर मार्केट के लिए तैयार रखना पड़ेगा, तभी बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो पाएगी।
अजय शाही, प्रबंध निदेशक आरपीएम एकेडमी

रोजगार, समाज के एप्रोच और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। सही दृष्टिकोण और सही कौशल का होना जरूरी है। हमें अपनी सोच बदलनी होगी। स्वरोजगार की संभावनाएं प्रबल हैं। पेशा कोई भी हो, छोटा और बड़ा नहीं होता है। प्राइवेट संस्थाओं के प्रति हमें नजरिया बदलना पड़ेगा। बहुत सारी प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं जो समाज को अपना योगदान कर रही हैं।    
प्रो एनके सिंह, निदेशक आईटीएम गीडा

सरकार जनसंख्या के अनुपात में कभी भी रोजगार उपलब्ध नहीं कर सकती। ऐसे में स्वरोजगार पर ही हमें ध्यान देना चाहिए। गांव अपने आप में स्वावलंबी हैं। शहरीकरण और उद्योगों से छोटे-छोटे उद्योग खत्म होते गए। उद्यमशीलता अपनाकर स्वरोजगार अपनाएं। खासकर गांव के युवाओं का इस दिशा में सोचने की जरूरत है।
डॉ अर्चना सिंह, समाजशास्त्री डीवीएनपीजी

पढ़ाई के दौरान बच्चों को कॅरियर को लेकर सही विकल्प का पता नहीं होता है। 80 फीसदी ऐसे विद्यार्थी इंजीनियरिंग की कोचिंग करते हैं, जिनके अंदर इंजीनियर बनने की क्षमता नहीं होती है। बहुत सारे क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं हैं, लेकिन समाज उसे छोटा आंकता है। अगर किसान हैं तो समझा जाता है कि बेरोजगार हैं। मेरा मानना है कि स्कूल स्तर पर ही स्किल डेवलपमेंट की कोशिश होनी चाहिए।
संजीव कुमार, निदेशक मोमेंटम कोचिंग इंस्टीट्यूट

देखिए, हम भीड़ में भागे जा रहे हैं। बच्चों को पता ही नहीं है कि किस क्षेत्र की क्या क्वालिटी है ? स्कूल स्तर पर ही जॉब की च्वाइस की जानकारी दी जानी चाहिए। अभिभावक और सोसायटी को काउंसिलिंग कर शिक्षित करना होगा। सही जानकारी देकर, प्रेरित कर नजरिया बदल सकते हैं।
मोहित अग्रवाल, चार्टर्ड एकाउंटेंट

खिलाड़ियों को प्रोत्साहन की जरूरत है। खेल में भी रोजगार के बहुत अवसर हैं। खिलाड़ी घर-बार छोड़कर बाहर रहता है और समाज में उसे कई तरह के ताने मिलते हैं। खेल के प्रति समाज में नजरिया बदलने की जरूरत है। सरकार भी क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को बढ़ावा दे।
मंजूला पाठक, पूर्व कप्तान भारतीय हैंडबॉल टीम

दरअसल, दिक्कत यह है कि हम स्वरोजगार को रोजगार मानते ही नहीं हैं। सरकारी नौकरी को ही तवज्जो देते हैं, लेकिन अब जमाना बदल रहा है। स्वरोजगार में बहुत सारा स्कोप है। इसके लिए शिक्षा पद्धति में बदलाव होने चाहिए। कॅरियर को लेकर स्कूल स्तर पर ही नियमित काउंसिलिंग की जानी चाहिए।
डॉ अर्पिता सिंह, डेंटल सर्जन

बढ़ती बेरोजगारी के लिए जनसंख्या बड़ी वजह है। इसके नियंत्रण को लेकर पॉलिसी बननी चाहिए। वहीं कॅरियर के विकल्प विद्यार्थियों को नहीं बताए जा रहे हैं। देश के युवाओं में बहुत आइडिया है। बस उनके टैलेंट को स्टार्टअप बिजनेस के सपोर्ट की जरूरत है। अगर सही सोच है, रुचि है तो रोजगार की कमी नहीं है।  
डॉ इमरान अख्तर, आर्थोपेडिक सर्जन

हमें हर व्यवसाय को सम्मान देना होगा। 94 प्रतिशत रोजगार प्राइवेट सेक्टर में है, लेकिन एक बात जरूरी है कि हमें खुद को योग्य बनाना होगा। अब डॉक्टरी पेशा में ले लें तो 30 प्रतिशत डॉक्टर और 25 प्रतिशत पैरा मेडिकल क्षेत्र में जॉब है लेकिन उसके योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं।
डॉ वाई सिंह, नेत्ररोग विशेषज्ञ

प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को पता ही नहीं है कि उनके लिए कॅरियर संबंधित कौन सी योजनाएं हैं। कौशल विकास को लेकर योजनाओं के बारे में अनभिज्ञ हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्वावलंबन ज्यादा है। अगर इन बच्चों को जागरूक किया जाए तो वे पलायन नहीं करेंगे और गांव में ही स्वरोजगार शुरू करेंगे।
श्वेता सिंह, शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय सिक्टौर

रंगकर्म के क्षेत्र में रोजगार की बहुत सारी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में वहीं आता है जिसमें रुचि होती है। इसको लेकर आज भी समाज में धारणा नौटंकी वाले की है। अक्सर ताने भी मिलते हैं, लेकिन रंगकर्म में थिएटर, टीवी, दूरदर्शन, मॉडलिंग, निदेशक बहुत सारे रोजगार के स्कोप है। बस हमें समाज के लोगों को नजरिया बदलना होगा।
निशिकांत पांडेय, रंगकर्मी

हमें अपने सोच को बदलना होगा। स्वरोजगार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। इस पर युवा वर्ग कम ध्यान देता है, लेकिन इसे कॅरियर के रूप में चुने तो सफलता जरूर मिलेगी। हमें नौकरी के पीछे भागने वाला नहीं बनना चाहिए, बल्कि दूसरों को रोजगार देने की कोशिश करना चाहिए। नवाचार करने वाले लोग इसमें बहुत सफल हैं।
अनुज जालान, निदेशक जालान कान कॉस्ट
 
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