फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Fact Check ›   The claims made about labelling of Samosa and Jalebi are false

Fact Check: केंद्र सरकार ने समोसा और जलेबी पर लेबल लगाने का नहीं दिया कोई निर्देश, पड़ताल में पढ़ें सच्चाई

Tue, 15 Jul 2025 08:16 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 15 Jul 2025 08:16 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि समोसा और जलेबी पर सरकार जल्द ही लेबल लगाने का नियम लाने वाली है। जिसमें यह बताना होगा कि इनमें कितना तेल और चीनी का इस्तेमाल किया गया है।  हमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत निकला है। 

विज्ञापन
The claims made about labelling of Samosa and Jalebi are false
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर समोसा जलेबी को लेकर एक पोस्ट शेयर की जा रही है। पोस्ट में लिखा है कि समोसा जलेबी सेहत के लिए हनिकारक है। इसके साथ ही दावा किया जा रहा है कि समोसा और जलेबी के पैकट में  चीनी और तेल की मात्रा के लिए स्वास्थ मंत्रालय जल्द ही इस पर लेबल लगाने वाली है। 

विज्ञापन

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि सरकार की ओर से लेबल पर कितनी चीनी और तेल की मात्रा है इससे संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई है। दरअसल, लोगों में स्वास्थ्यकारी खानपान की आदत को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संस्थानों में खाने से जुड़ी चीजों में शक्कर और तेल से जुड़ी जानकारी वाले बोर्ड लगाने का प्रस्ताव दिया गया था।  

विज्ञापन

क्या है दावा

सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि सरकार समोसा और जलेबी पर तेल चीनी की मात्रा का लेबल लगाने वाली है। 
ऑक्सोमिया जियोरी (@SouleFacts)  नाम की एक्स यूजर ने लिखा “समोसे और जलेबी पर स्वास्थ्य चेतावनी के लेबल? यह चुनिंदा आक्रोश क्यों? अगर भारतीय स्नैक्स पर सिगरेट जैसी चेतावनी होनी चाहिए, तो इटैलियन पिज्जा, चीनी चाउमीन या अजीनोमोटो, सिंथेटिक चीज़, एमएसजी और प्रिज़र्वेटिव से भरे अमेरिकी बर्गर पर क्या? स्वास्थ्य के नाम पर हमेशा भारतीय खाद्य संस्कृति को ही निशाना क्यों बनाया जाता है, जबकि वैश्विक जंक फूड पर कोई नज़र नहीं जाती? आइए, औपनिवेशिक काल के प्रभाव को अपनी नीतियों पर हावी न होने दें।" पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल

हमने दावे की पड़ताल करने के लिए पोस्ट में इस्तेमाल कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें स्वास्था मंत्रालय की एक एडवाइजरी मिली। यह एडवाइजरी 21 जून 2025 को जारी की गई थी। इसमें लोगों में स्वास्थ्यकारी खानपान की आदत को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संस्थानों में खाने से जुड़ी चीजों में शक्कर और तेल से जुड़ी जानकारी वाले बोर्ड लगाने का सुझाव दिया गया था। इसके जरिए आम लोगों को रोजाना के खाद्य पदार्थों में छिपी वसा और शक्कर से जुड़ी अहम जानकारी देने का लक्ष्य रखा गया था। एडवाइजरी में खाद्य पदार्थों से जुड़ी इन जानकारियों को कैफेटेरिया, मीटिंग रूम्स और अन्य सार्वजनिक जगहों पर लगाने की बात कही गई, ताकि इनके जोखिमों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके। सरकार ने इसके जरिए लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत और ज्यादा शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी बात कही थी, ताकि वे ज्यादा फल, सब्जी और कम वसा वाला खाना खाएं और शक्कर वाले पेय पदार्थ या उच्च-वसा वाले स्नैक्स को भी कम करें। पूरी एडवाइजरी यहां पढ़ें 

 

 

आगे की पड़ताल में हमें प्रेस सूचना ब्यूरो फैक्ट चेक की एक पोस्ट मिली। यह पोस्ट 15 जुलाई 2025 को साझा की गई है। पोस्ट में  समोसा जलेबी पर लेबल लगाने वाले दावे का खड़न किया गया है। पोस्ट में बताया गया है कि स्वास्था मंत्रालय की ओर ऐसी कोई एडयवायजरी जारी नहीं की गई है। 

आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला की न्यूज टीम से संपर्क किया। यहां हमें स्वास्थ्य  मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी को लेकर एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 14 जुलाई को प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया था, "भारत में तेजी से बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों, विभागों और स्वायत्त संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे खाने की चीजों में कितनी तेल और चीनी होती है, यह ऑयल और शुगर बोर्ड के जरिए साफ-साफ दिखाएं। स्वास्थ्य मंत्रालय चाहता है कि दफ्तरों, स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में खाने की वस्तुओं में छुपे हुए तेल और चीनी की मात्रा की जानकारी दी जाए। इसके लिए एक बोर्ड या डिजिटल पोस्टर लगाया जाए जो लोगों को यह जानकारी दे और उन्हें स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करें।"

पड़ताल का नतीजा

हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। सरकार की ओर से वायरल दावे से संबंधित कोई सूचना जारी नहीं की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed