Fact Check: आकाश से केन्या ने गांव पर गिरे अंतरिक्ष मलबे को भारत से जोड़कर किया जा रहा भ्रामक दावा
Fact Check: सोशल मीडिया पर केन्या में अंतरिक्ष से गिरे मलबे को भारत का बताकर मुआवजा देने की मांग की जा रही है।
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विस्तार
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि केन्या की धरती पर आकाश से गिरी धातु की वस्तु को इसरो से जोड़कर शेयर किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के डॉकिंग प्रयोग, स्पैडेक्स से 500 किलोग्राम की गोलाकार धातु की वस्तु केन्या में गिरने पर भारत को मुआवजा देना चाहिए।
सिटी डाइजेस्ट (@city_digest) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “केन्या सरकार भारत से मुआवजा मांग रही है, उसका तर्क है कि धातु के गिरने से मकुएनी के लोगों की जान जोखिम में पड़ गई क्योंकि यह धातु गिरने के समय बहुत गर्म थी और इसका वजन 500 किलोग्राम तक था। (पोस्ट का आर्काइव लिंक)
Kenyan Government is Seeking Compensation From India, Arguing That the Metal Subjected the Life of the People of Makueni at Risk as it Was Red Hot When it Fell & Weighs Up to 500 Kgs, Watch 👇 pic.twitter.com/0Z16ydS0z3
— CITY DIGEST. (@city_digest) January 3, 2025
कॉर्नेलियस के. रोनोह (@itskipronoh) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “केन्या ने भारत को मकुएनी काउंटी में गिरे रॉकेट के मलबे के लिए मुआवजे की मांग के बारे में सूचित किया है, जिससे लोगों की जान को खतरा है। कासोंगो भी इसके लिए उत्सुक है।” (पोस्ट का आर्काइव लिंक)
Kenya has notified India of a compensation demand over the rocket debris that fell and endangered lives in Makueni County. Kasongo is salivating for this one too. pic.twitter.com/yuJzjK60zy
— Cornelius K. Ronoh (@itskipronoh) January 3, 2025
इस तरह के कई और दावे आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने हमने दावे के कुछ कीवर्ड को इंटरनेट पर खोजने की कोशिश की। यहां हमें बीबीसी की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “केन्या की अंतरिक्ष एजेंसी के विशेषज्ञ 500 किलोग्राम वजन के धातु के छल्ले की जांच कर रहे हैं जो सोमवार को धरती पर गिरा था।
यह राजधानी नैरोबी से 50 किमी (31 मील) दक्षिण-पूर्व में मुकुकु गांव पर गिरा किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
केन्या अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि उसके शुरुआती आकलन से पता चला है कि यह विशाल वस्तु "लॉन्च वाहन (रॉकेट) से अलग होने वाला छल्ला" था।
आगे कहा कि इन्हें "आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करते ही जलने या समुद्र जैसे खाली क्षेत्रों में गिरने के लिए डिज़ाइन किया जाता है"।
इस खबर में हमें ये कहीं भी पता नहीं चला कि इस घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया है। केन्या स्पेस एजेंसी की तरफ से अभी इस मामले में जांच चल रही है।
आगे हमें एक्स पर केन्या स्पेस एजेंसी का भी इस मामले पर बयान मिली। स्पेस एजेंसी की तरफ से कहा गया कि “वस्तु के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है, तथा मलबे और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) या किसी विशिष्ट अंतरिक्ष मिशन के बीच कोई आधिकारिक संबंध का पता नहीं चला है। एजेंसी और अन्य संबंधित अधिकारी गहन जांच कर रहे हैं।”
Here’s our OFFICIAL STATEMENT addressing the widely circulating claims about notification for compensation related to the Makueni space debris incident.
— Kenya Space Agency (@SpaceAgencyKE) January 3, 2025
We urge the public to disregard these claims and avoid sharing unverified information. pic.twitter.com/IYaR5fI3CB
While Nation Africa has posted this claim, it is important to clarify that investigations into the object’s origin are still ongoing, and no official statement has been issued linking the debris to the Indian Space Research Organisation or any specific space mission. The Kenya… pic.twitter.com/1icJgs4RIC
— Kenya Space Agency (@SpaceAgencyKE) January 3, 2025
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि दावा भ्रामक है। केन्या ने भारत को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।