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Fact Check: न्यूजीलैंड में हिंदू धर्म के खिलाफ प्रदर्शन का वीडियो वायरल, पड़ताल में पढ़ें सच

Wed, 25 Jun 2025 07:55 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 25 Jun 2025 07:55 PM IST
सार

Fact Check : सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि न्यूजीलैंड में हिंदू धर्म के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। हमारी पड़ताल मेंं यह दावा गलत साबित हुआ है। 

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In new zealand protest is going against hinduism
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में नजर आ रहा है कि एक शख्स काले रंग का कोट पहने माइक में कुछ बोल रहा है। उसके पीछे दो लोग हिंदू लिखा हुआ एक भगवा झंडा लिए खड़े हैं। कुछ देर बाद झंडा पकड़े दोनों लोग इस झंडे को फाड़ देते हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि न्यूजीलैंड में तेजी से हिंदू धर्म के लोग बढ़ रहे हैं। इसी कारण वहां के लोग हिंदू धर्म के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को भ्रामक पाया। हमने पाया कि यह प्रदर्शन हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं हो रहा है। बल्कि यह प्रदर्शन कई धर्मों के साथ यूएन के खिलाफ भी हो रहा था।  प्रदर्शन के दौरान हिंदू के साथ इस्लाम, सिख, बौद्ध समेत कई अन्य धर्म लिखे हुए झंडे भी इस प्रदर्शन के दौरान फाड़े  गए। इस प्रदर्शन का नेतृत्व न्यूजीलैंड के कट्टरपंथी डेस्टिनी चर्च के नेता ब्रायन तामकी कर रहे हैं।

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क्या है दावा 
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि न्यूजीलैंड में हिंदू धर्म के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है।
मिश्कात फातिमा (@realMishkat) नाम के एक्स यूजर ने लिखा न्यूजीलैंड में हिंदू आबादी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ देशी माओरी जनजातीय समुदाय के सदस्य विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और हिंदुत्व के झंडे फाड़ रहे हैं। इस तथाकथित संस्कारी समुदाय की शरारतों से हर कोई तंग है। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

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इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें यूट्यूब पर न्यूजीलैंड कॉन्सिपरेसी लून्स नाम के चैनल पर घटना का पूरा वीडियो मिला। यह वीडियो 21 जून 2025 को प्रकाशित किया गया है। इस वीडियो में देखने को मिला कि प्रदर्शन में अन्य धर्मों का नाम लिखे हुए झंडे भी फाड़े गए।

इसके बाद हमने वीडियो में इस्तेमाल कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें न्यूजीलैड हेराल्ड की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 21 जून 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में हमें वायरल वीडियो से मिला- जुलता वीडियो देखने को मिला। रिपोर्ट में बताया गया है कि डेस्टिनी चर्च के नेता ब्रायन तामकी ने क्वीन स्ट्रीट पर एक मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि न्यूजीलैंड में "गैर-ईसाई धर्मों का प्रसार अब नियंत्रण से बाहर हो गया है"। यह मार्च दोपहर 12 बजे ऑकलैंड के क्वीन स्ट्रीट स्थित एओटिया स्क्वायर से शुरू हुआ। 

आगे की पड़ताल में हमेंं इंडिया टुडे की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 24 जून 2025 को प्रकाशित की गई है।  रिपोर्ट में बताया गया है कि डेस्टिनी चर्च के नेता ब्रायन तामाकी ने अपने समर्थकों के साथ मध्य ऑकलैंड में एक मार्च निकाला, जिसमें दावा किया गया कि न्यूजीलैंड में "गैर-ईसाई धर्मों का प्रसार अब नियंत्रण से बाहर हो गया है"। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कथित तौर पर हिंदू, बौद्ध और इस्लामी समुदायों सहित धार्मिक झंडों को फाड़ दिया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैड का हाका प्रदर्शन किया।

इसके बाद हमें द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 24 जून 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डेस्टिनी चर्च के नेता ब्रायन तामकी ने न्यूजीलैंड में एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। शनिवार को, तामकी और उनके समर्थकों ने सेंट्रल ऑकलैंड में क्वीन स्ट्रीट पर मार्च किया। उन्होंने हाथ में एक बैनर लिया था, जिस पर लिखा था "न्यूजीलैंड का आधिकारिक धर्म ईसाई धर्म"। इसके साथ ही उन्होंने "विश्वास, झंडा और परिवार" का नारा भी दिया। यह प्रदर्शन आप्रवासन और देश में गैर-ईसाई धर्मों की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ था। तामकी ने दावा किया कि "गैर-ईसाई धर्मों का प्रसार अब नियंत्रण से बाहर हो गया है" और कहा कि अब इसके लिए स्टैंड लेने का समय आ गया है।

यहां से साफ होता है कि यह प्रदर्शन हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं है। बल्कि यह प्रदर्शन गैर ईसाई धर्मों के खिलाफ था। यह प्रदर्शन आप्रवासन और देश में गैर-ईसाई धर्मों की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ किया गया है।

पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि यह प्रदर्शन सिर्फ हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं है। इस प्रदर्शन को हिंदू धर्म के खिलाफ बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है।  

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