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Fact Check: झूठा है असम सरकार का 3,000 बीघा जमीन अदाणी समूह को देने का दावा, पड़ताल में पढ़ें सच

Sat, 23 Aug 2025 09:18 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 23 Aug 2025 09:18 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि असम सरकार ने दीमा हसाओ में 3,000 बीघा जमीन अदाणी समूह को दे दी है। इसी वजह से गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने नाराजगी जताई। हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को गलत पाया है। 

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Has the Assam government given 3,000 bighas of land to the Adani Group, read the full investigation
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक कोर्ट रूम नजर आ रहा है। वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को दीमा हसाओ में अदाणी समूह को सीमेंट कारखाने के लिए 3,000 बीघा (8.1 करोड़ वर्ग फुट) आदिवासी भूमि आवंटित देने पर नाराजगी जाहिर की है। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने अपने पड़ताल में पाया कि असम सरकार ने दीमा हसाओ में महाबल सीमेंट्स नामक कंपनी को 3000 बीघा यानी पूरा जिला एक निजी कंपनी को दे दिया है। इसी कारण से गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने अपनी नाराजगी जाताई। न्यायालय का कहना है कि आप पूरा जिला किसी निजी कंपनी को कैसे दे सकते हैं। 

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क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को दीमा हसाओ में अदाणी समूह को सीमेंट कारखाने के लिए 3,000 बीघा (8.1 करोड़ वर्ग फुट) आदिवासी भूमि आवंटित देने पर नाराजगी जाहिर की है। 

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लावण्या बल्लाल जैन अधिकारी (@LavanyaBallal) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय कुमार मेधी ने असम की भाजपा सरकार द्वारा दीमा हसाओ में अदाणी समूह को सीमेंट कारखाने के लिए 3,000 बीघा (8.1 करोड़ वर्ग फुट) आदिवासी भूमि आवंटित करने पर अविश्वास व्यक्त करते हुए कथित तौर पर पूछा, "क्या यह मजाक है? क्या आप एक पूरा जिला दे रहे हैं?" भाजपा सरकार अदाणी की, अदाणी के लिए और अदाणी द्वारा बनाई गई है।“ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल के लिए हमने पोस्ट में इस्तेमाल कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें द हिंदू की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 19 अगस्त 2025 को प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते असम सरकार को दीमा हसाओ क्षेत्र में खनन के उद्देश्य से एक निजी सीमेंट कंपनी को लगभग 3,000 बीघा जमीन आवंटित करने पर आश्चर्य और नाराजगी व्यक्त की। 12 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार मेधी की खंडपीठ ने आवंटन पर सवाल उठाते हुए मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा सरकार ने महाबल सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड को इतनी बड़ी जमीन देने का फैसला सार्वजनिक हित के बिल्कुल विपरीत है।

आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 18 अगस्त 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में खनन के लिए एक निजी सीमेंट कंपनी को सौंपने पर सवाल उठाया है। अदालत ने महाबल सीमेंट्स नामक कंपनी को लगभग 3000 बीघा भूमि दिए जाने पर अपनी आपत्ति जताई है। जमीन आवंटन पर सरकार को फटकारते हुए अदालत ने कहा है कि 3000 बीघा यानी पूरा जिला एक निजी कंपनी को दे दिया गया। क्या यह मजाक है?

इसके बाद हमने सर्च किया कि कहीं मलाबल सीमेंट्स नामक कंपनी का संबंध अदाणी समूह तो नहीं है। इस दौरान हमें पता चला कि मलाबल सीमेंट्स कंपनी जेके लक्ष्मी सीमेंट लिमिटेड समूह का हिस्सा है। 

इसके बाद हमें अदाणी समूह की मीडिया स्टेटमेंट मिली। स्टेटमेंट में लिखा गया है कि कुछ समाचार रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि असम सरकार ने दीमा हसाओ में अदाणी समूह को सीमेंट कारखाने के लिए 3000 बीघा जमीन आवंटित की है। हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि ये रिपोर्ट और संदर्भ निराधार, झूठे और भ्रामक हैं। अदाणी का नाम महाबल सीमेंट से जोड़ना गलत है। महाबल सीमेंट किसी भी तरह से अदाणी समूह से संबंधित, स्वामित्व या संबद्ध नहीं है।


पड़ताल का नतीजा

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि दीमा हसाओ मलाबल सीमेंट कंपनी को दिया गया है। मलाबल सीमेंट का अदाणी समूह से कोई संबंध नहीं है। 

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