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Fact Check: क्या सच में 290 करोड़ की वंदे भारत में 436 करोड़ खर्च कर रही सरकार, वायरल दावे का सच ये है

Mon, 16 Sep 2024 08:18 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Mon, 16 Sep 2024 08:18 PM IST
सार

Fact Check: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण को लेकर एक दावा किया जा रहा है जिसमें ₹58,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव करके ट्रेन की कीमत दोगुनी हो जाने की बात की जा रही है। 



 

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Government is spending Rs. 436 crore on Vande Bharat worth Rs. 290 crore
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वंदे भारत को के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा है। इसमें ट्रेन की कीमतों को लेकर सवाल उठ रहे है। साथ ही कई बड़े नेता इसके लिए मोदी सरकार को घेर भी रहे हैं। 
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क्या है दावा 
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण को लेकर एक दावा काफी वायरल हो रहा है। मोदी सरकार ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए ₹58,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किया है और इस फैसले से ट्रेन की कीमत पहले से दोगुनी हो गई है। ये भी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार किसी कॉन्टैक्ट को फायदा पहुंचाने के लिए ये सब कर रही है। 
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साकेत गोखले सांसद (@SaketGokhale) ने एक्स पर एक पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा “महत्वपूर्ण: मोदी सरकार ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए ₹58,000 करोड़ के अनुबंध को संशोधित किया है। पहले जिस ट्रेन की लागत ₹290 करोड़ थी, अब उसकी लागत ₹436 करोड़ होगी। यह केवल एसी कोच वाली ट्रेन है, जिसे गरीब लोग वहन नहीं कर सकते। वंदे भारत संशोधन में 50% लागत वृद्धि से किसे लाभ हो रहा है?"
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अमीना (@AminaaKausar) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “राफेल घोटाला याद है? अब वंदे भारत के साथ एक नया घोटाला सामने आया है। यह इस तरह काम करता है:
वे पहले अपनी पसंदीदा कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट देते हैं, फिर वे आवश्यक विमानों या ट्रेनों की संख्या कम कर देते हैं। डीलर मूल लागत (नई लागत के बजाय) पर कम संख्या में विमान या ट्रेनें उपलब्ध कराता है। नतीजतन, सरकार को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है। (यह उनकी जेब में जाती है)। इस घोटाले की कीमत कम से कम ₹19,430 करोड़ हो सकती है। यह एक सरासर धोखाधड़ी है।”

पड़ताल 
इस खबर के की पड़ताल के लिए सबसे पहले हमने रेल मंत्रालय के एक्स अकाउंट को देखा। यहां हमें रेलवे का बयान मिला जिसमें इस दावे का खंडन करने हुए कुछ बातें कही गई थीं। रेल मंत्रालय के बयान में कहा गया “कोच की संख्या से गुणा की गई प्रति कोच लागत ट्रेन की लागत के बराबर होती है। हमने लंबी ट्रेनें बनाने के लिए कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी है, जिससे कॉन्ट्रैक्ट में कुल कोचों की संख्या पहले वाली ही बनी हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रेन यात्रा की मांग बहुत अधिक है। पहले: 200 ट्रेनें x 16 कोच = 3200, बदलाव: 133 ट्रेनें x 24 कोच = 3192. कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य कम हो गया है क्योंकि ट्रेन की लंबाई बढ़ाने पर बचत होती है। हम रेलवे यात्रा की उच्च मांग को देखते हुए रिकॉर्ड संख्या में नॉन एसी कोच (12000) बना रहे हैं।”
रेलवे ने अपने बयान में साफ कर दिया कि बदलाव के बाद लागत कीमतों में कमी आई है न की वे बढ़ी हैं। 
 
इस पर हमें पीआईबी का बयान भी मिला, पीआईबी की तरफ से कहा गया था कि “50% की कीमत वृद्धि नहीं हुई है! उच्च मांग को पूरा करने के लिए प्रति ट्रेन कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी गई।”

पड़ताल का नतीजा 
हमारी पड़ताल में साफ है कि वंदे भारत ट्रेन से जुड़ा जो दावा वायरल हो रहा है वो भ्रामक है। 

 
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