Fact Check: क्या सच में 290 करोड़ की वंदे भारत में 436 करोड़ खर्च कर रही सरकार, वायरल दावे का सच ये है
Fact Check: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण को लेकर एक दावा किया जा रहा है जिसमें ₹58,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव करके ट्रेन की कीमत दोगुनी हो जाने की बात की जा रही है।
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विस्तार
क्या है दावा
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण को लेकर एक दावा काफी वायरल हो रहा है। मोदी सरकार ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए ₹58,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किया है और इस फैसले से ट्रेन की कीमत पहले से दोगुनी हो गई है। ये भी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार किसी कॉन्टैक्ट को फायदा पहुंचाने के लिए ये सब कर रही है।
साकेत गोखले सांसद (@SaketGokhale) ने एक्स पर एक पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा “महत्वपूर्ण: मोदी सरकार ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए ₹58,000 करोड़ के अनुबंध को संशोधित किया है। पहले जिस ट्रेन की लागत ₹290 करोड़ थी, अब उसकी लागत ₹436 करोड़ होगी। यह केवल एसी कोच वाली ट्रेन है, जिसे गरीब लोग वहन नहीं कर सकते। वंदे भारत संशोधन में 50% लागत वृद्धि से किसे लाभ हो रहा है?"
Important:
— Saket Gokhale MP (@SaketGokhale) September 16, 2024
Modi Govt has revised the ₹58,000 crores contract for making Vande Bharat sleeper trains
A train that cost ₹290 crores earlier will now cost ₹436 crores
This is a train with ONLY AC coaches that poor cannot afford.
Who is benefiting from this 50% cost increase… pic.twitter.com/sR8qLgK7DK
अमीना (@AminaaKausar) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “राफेल घोटाला याद है? अब वंदे भारत के साथ एक नया घोटाला सामने आया है। यह इस तरह काम करता है:
वे पहले अपनी पसंदीदा कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट देते हैं, फिर वे आवश्यक विमानों या ट्रेनों की संख्या कम कर देते हैं। डीलर मूल लागत (नई लागत के बजाय) पर कम संख्या में विमान या ट्रेनें उपलब्ध कराता है। नतीजतन, सरकार को अतिरिक्त लागत वहन करनी पड़ती है। (यह उनकी जेब में जाती है)। इस घोटाले की कीमत कम से कम ₹19,430 करोड़ हो सकती है। यह एक सरासर धोखाधड़ी है।”
Remember the Rafale scam? Now there’s a new one with Vande Bharat.
— أمينة Amina (@AminaaKausar) September 16, 2024
Here’s how it works:
They first award contracts to their preferred companies, then they reduce the No. of aircraft or trains needed.
The dealer will provide the reduced number of aircraft or trains at the… https://t.co/s9A3NLX6js pic.twitter.com/3OPC6bIAK7
पड़ताल
इस खबर के की पड़ताल के लिए सबसे पहले हमने रेल मंत्रालय के एक्स अकाउंट को देखा। यहां हमें रेलवे का बयान मिला जिसमें इस दावे का खंडन करने हुए कुछ बातें कही गई थीं। रेल मंत्रालय के बयान में कहा गया “कोच की संख्या से गुणा की गई प्रति कोच लागत ट्रेन की लागत के बराबर होती है। हमने लंबी ट्रेनें बनाने के लिए कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी है, जिससे कॉन्ट्रैक्ट में कुल कोचों की संख्या पहले वाली ही बनी हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रेन यात्रा की मांग बहुत अधिक है। पहले: 200 ट्रेनें x 16 कोच = 3200, बदलाव: 133 ट्रेनें x 24 कोच = 3192. कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य कम हो गया है क्योंकि ट्रेन की लंबाई बढ़ाने पर बचत होती है। हम रेलवे यात्रा की उच्च मांग को देखते हुए रिकॉर्ड संख्या में नॉन एसी कोच (12000) बना रहे हैं।”
Please stop spreading misinformation and fake news.
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) September 16, 2024
Cost per coach multiplied by number of coaches equals the cost of train.
In sleeper project, cost per coach is lower than all benchmarks because of the transparency in process.
We have increased the number of coaches from… https://t.co/tLUmUsGx5x
रेलवे ने अपने बयान में साफ कर दिया कि बदलाव के बाद लागत कीमतों में कमी आई है न की वे बढ़ी हैं।
A tweet misleadingly claims that the 50% cost increase in the Vande Bharat Sleeper trains contract even though the number of trains has reduced from 200 to 133#PIBFactCheck
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 16, 2024
⚠️ There’s no 50% price hike!
▫️The no of coaches per train increased from 16 to 24 to meet high demand pic.twitter.com/ElBYzsKCba
इस पर हमें पीआईबी का बयान भी मिला, पीआईबी की तरफ से कहा गया था कि “50% की कीमत वृद्धि नहीं हुई है! उच्च मांग को पूरा करने के लिए प्रति ट्रेन कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी गई।”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में साफ है कि वंदे भारत ट्रेन से जुड़ा जो दावा वायरल हो रहा है वो भ्रामक है।