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Fact Check: झूठा है शव उठाने के लिए चार कंधे नहीं मिलने का दावा, पड़ताल में जानें सच्चाई

Thu, 22 Jan 2026 08:30 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Thu, 22 Jan 2026 08:30 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दो लोग एक शव को कंधे पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि शव को उठाने के लिए चार कंधे भी नहीं मिले। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है। 

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Fact Check Four people were not available to carry dead body carried on just two shoulders
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक अर्थी को दो लोग अपने कांधे पर उठा रहे हैं। वहां एक तीसरा आदमी भी खड़ा हुआ नजर आ रहा है। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि एक पिता और भाई अपनी बेटी की अर्थी अकेले उठा रहे हैं। पूरा गांव खड़ा होकर देखता रहा, लेकिन कोई मदद करने के लिए नहीं आया। इस वीडियो को बिहार का बताया जा रहा है। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि इस दावे में किसी तरह की कोई सच्चाई नहीं है। यह वीडियो बिहार का नहीं बल्कि झारखंड का है। इसके साथ ही अमर उजाला के रिपोर्ट ने उस जगह पर पहुंचकर इस वीडियो की जांच की। ये भी पता चला कि वीडियो स्क्रिप्टेड था। 

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क्या है दावा  

इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि एक बेटी की अर्थी केवल भाई और बाप ने उठाई। पूरा गांव में से कोई भी कंधा देने के लिए आगे नहीं आया। इसलिए केवल दो कंधो पर अर्थी के उठाया गया।

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छपरा जिला नाम के एक फेसबुक अकाउंट ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा गया “सिर्फ बाप भाई ने उठाई बेटी की अर्थी और गांव से कोई कंधा देने नहीं आया। यह है आज के समाज की हकीकत। वीडियो किसी ने कहा शादी है तो किसी ने कुछ और बहाना बनाया। अब समाज में इंसानियत नहीं बचा है।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 



 

इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए अमर उजाला ने पहले सारण जिला और फिर भाषा को समझते हुए बिहार के छह जिलों- भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, पूर्णिया में खोजा। भाषा विशेषज्ञ को भी वीडियो भेजा।। भाषा विशेषज्ञों से लीड मिली कि इसमें मुंगेर-बांका की ग्रामीण भाषा तो है, लेकिन झारखंड का भी प्रभाव है। फिर झारखंड में भी बिहार से सटे देवघर, दुमका, गिरिडीह तक पड़ताल की गई। जांच करने से पता चला कि वीडियो गिरिडीह जिले के देवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत दुलोरी गांव का है, जिसे बिहार के सारण का बताकर वायरल किया गया था। हकीकत यह है कि इस महिला के शव के दाह-संस्कार में भी तीन दर्जन से ज्यादा लोग थे। उनमें से कुछ लोगों ने बताया कि किसी युवक ने बाइक रोक कर यह वीडियो बनवाया और कहा कि ऐसा करेंगे तो सरकारी सहायता मिलेगी। वीडियो वायरल हो गया तो वह युवक भी गायब हो गया। उसके बाद से वह नहीं दिखा है। यह रविदास टोले की घटना है, जहां दो दर्जन से ज्यादा घर इसी जाति-वर्ग से हैं। 

मृतक महिला दुलोरी गांव निवासी स्वर्गीय बिनोद दास की पत्नी पिंकी देवी थीं। इसी 10 जनवरी को लंबी बीमारी के बाद पिंकी देवी का निधन हो गया था। पिंकी देवी अपने माता-पिता के साथ गिरिडीह जिले के दराईसरन गांव में रह रही थीं। निधन के बाद उनके भाई परिजनों के साथ अंतिम दर्शन के लिए शव को उनकी ससुराल दुलोरी गांव लेकर आए थे। ससुराल से निकलते समय यह वीडियो बनाया गया। इसमें मृतक और परिजन सभी थे, लेकिन बाकी बातें काल्पनिक थीं कि शव उठाने तक के लिए कोई नहीं था।

नीचे की तस्वीर उसी जगह की है जहां ये पूरा वीडियो फिल्माया गया था। 



पड़ताल का नतीजा

हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो असली नहीं है बल्कि गलत तरीके से बनाकर पेश किया गया है। 

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