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Fact Check: मूर्ति को तोड़ने के एआई से बने वीडियो को सांप्रदायिक दावे के साथ किया जा रहा शेयर

Thu, 12 Feb 2026 07:28 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Thu, 12 Feb 2026 07:28 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर भगवान की मूर्ति तोड़ने के एआई वीडियो के शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह घटना असली है। 

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Fact Check AI-generated video of deity idol vandalised shared with communal claim
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में एक आदमी मंदिर में एक हथौड़े के साथ घुसता हुआ नजर आ रहा है। इसके बाद वह अपने हथौड़े से भगवान की मूर्ति के पास रखे लोटे पर एक वार करता है। जैसे ही वह मूर्ति को हथौड़े से तोड़ने जाता है एक बंदर वहां आता है। वह बंदर उसे अचानक से पकड़ लेता है। इस वीडियो को शेयर करके सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो असली नहीं है बल्कि एआई के माध्यम से बनाया गया है। वीडिया को एआई डिटेक्टर टूल से सर्च करने पर हमें इस वीडियो के एआई से बने होने की जानकारी मिली। 

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क्या है दावा 

भगवान की मूर्ति को तोड़ने के वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि कुछ कट्टरपंथी लोग भगवान की मूर्ति को तोड़ना चाहते हैं। 

रामेंद्र झा नाम के एक फेसबुक अकाउंट ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, “बजरंगबली जी का मूर्ति तोड़ने आया था एक कट्टरपंथी जाहिल पर बजरंगबली के दूत ने सिखाया ऐसा सबक की सब देखते रह गए” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

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इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख कते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो को ध्यान से देखा। वीडियो में हमें कई असंगतियां दिखीं। तोड़फोड़ में इस्तेमाल हथौड़े का आकार बदलता नजर आया और गिरने के बावजूद लोटे का पानी नहीं गिरा। इन संकेतों के आधार पर वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल से जांचा गया।

सबसे पहले हमने वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल हाइव मॉडरेशन से सर्च करने की कोशिश की। यहां हमें इस वीडियो के 99.9 प्रतिशत एआई से बने होने की जानकारी मिली। 

आगे हमने साइटइंजन से इस वीडियो के एआई से बने होने का पता लगाने की कोशिश की। यहां हमें इस वीडियो के 97 प्रतिशत एआई से बने होने की जानकारी मिली। 

 

पड़ताल का नतीजा 

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो को एआई के माध्यम बनाया गया है। इसके असली होने का दावा झूठा है। 

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