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Fact Check: उत्तराखंड के पारंपरिक मेले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश, ये है दावे की असलियत
Mon, 21 Oct 2024 07:09 PM IST
संध्या
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
Published by: संध्या
Updated Mon, 21 Oct 2024 07:09 PM IST
सार
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लोग एक दूसरे पर कुछ फेंक रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यहां हिंदू पत्थरबाजी कर रहे हैं। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला।
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फैक्ट चेक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक मैदान में लोग एक दूसरे पर किसी चीज से हमला कर रहे हैं, ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने वीडियो को हिंदुओं पर निशाना साधते हुए शेयर किया है।
क्या है दावा
वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि इस वीडियो में हिंदू पत्थरबाजी कर रहे हैं। साथ ही इसे सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। कई एक्स यूजर्स कपड़े से लोगों को भगवाधारी कह रहे हैं।
नेशन मुस्लिम (@AmjadAsR) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!!”
मारवाड़ी छोरा (@AbdulLatifkhok3) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!”
पड़ताल
वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने देखा कि वीडियो पर बग्वाल 2024 लिखा हुआ है। हमने इस शब्द को इंटरनेट पर सर्च किया तो हमें पता चला कि बग्वाल, उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधुरा में मनाया जाने वाला एक ऐतिहासिक मेला है।
आगे हमने वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें एक यूट्यूब चैनल पर ये वीडियो मिला जिसे 20 अगस्त 2024 को पोस्ट किया गया था। इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा हुआ था “देवीधुरा बग्वाल मेला (पाषाण युद्ध)19 अगस्त 2024”
हमें इस वायरल वीडियो से जुड़ा एक लंबा वीडियो हमें रैबार उत्तराखंड देवभूमि नाम के एक यूट्यूब चैनल पर मिला जिसे किसी और एंगल से शूट किया गया था। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा हुआ था “बग्वाल कौतिक में रणबांकुरे बाराही मंदिर देवीधुरा”
आगे हमने उत्तराखंड पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट देखी। यहां हमें देवीधुरा बग्वाल मेले के बारे में जानकारी मिली। बताया गया था कि हर साल रक्षाबंधन के दौरान ये मेला आयोजित किया जाता है। 'बग्वाल' शब्द का अर्थ है 'पत्थरों से लड़ाई' जो मेले के आयोजन के बारे में संकेत देता है। इसमें चार कबीले एक दूसरे पर पत्थर मारते हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार देवी को खुश करने के लिए मानव की बलि दी जाती थी। लेकिन अब उसकी जगह पर पत्थर फेंकते हैं ताकि देवी बाराही को रक्त अर्पित किया जा सके।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो उत्तराखंड देवीधुरा बग्वाल मेले का है। जहां पत्थर एक दूसरे पर फेंकने की परंपरा है।
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क्या है दावा
वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि इस वीडियो में हिंदू पत्थरबाजी कर रहे हैं। साथ ही इसे सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। कई एक्स यूजर्स कपड़े से लोगों को भगवाधारी कह रहे हैं।
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नेशन मुस्लिम (@AmjadAsR) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!!”
पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!! pic.twitter.com/tskh3nh6M6
विज्ञापन विज्ञापन— NATION MUSLIM 🌍 (@AmjadAsR) October 19, 2024
मारवाड़ी छोरा (@AbdulLatifkhok3) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!”
पत्थर बाज तो इनकी नस्ले ही होती हैं जनाब बेचारा #मुसलमान तो यूँ ही बदनाम हैं!! pic.twitter.com/A5ppGuFqrx
— *मारवाड़ी छोरा* (@AbdulLatifkhok3) October 19, 2024
पड़ताल
वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने देखा कि वीडियो पर बग्वाल 2024 लिखा हुआ है। हमने इस शब्द को इंटरनेट पर सर्च किया तो हमें पता चला कि बग्वाल, उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधुरा में मनाया जाने वाला एक ऐतिहासिक मेला है।
आगे हमने वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें एक यूट्यूब चैनल पर ये वीडियो मिला जिसे 20 अगस्त 2024 को पोस्ट किया गया था। इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा हुआ था “देवीधुरा बग्वाल मेला (पाषाण युद्ध)19 अगस्त 2024”
हमें इस वायरल वीडियो से जुड़ा एक लंबा वीडियो हमें रैबार उत्तराखंड देवभूमि नाम के एक यूट्यूब चैनल पर मिला जिसे किसी और एंगल से शूट किया गया था। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा हुआ था “बग्वाल कौतिक में रणबांकुरे बाराही मंदिर देवीधुरा”
आगे हमने उत्तराखंड पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट देखी। यहां हमें देवीधुरा बग्वाल मेले के बारे में जानकारी मिली। बताया गया था कि हर साल रक्षाबंधन के दौरान ये मेला आयोजित किया जाता है। 'बग्वाल' शब्द का अर्थ है 'पत्थरों से लड़ाई' जो मेले के आयोजन के बारे में संकेत देता है। इसमें चार कबीले एक दूसरे पर पत्थर मारते हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार देवी को खुश करने के लिए मानव की बलि दी जाती थी। लेकिन अब उसकी जगह पर पत्थर फेंकते हैं ताकि देवी बाराही को रक्त अर्पित किया जा सके।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो उत्तराखंड देवीधुरा बग्वाल मेले का है। जहां पत्थर एक दूसरे पर फेंकने की परंपरा है।