Fact Check: एआई से बनी तस्वीर को रुद्रप्रयाग बस हादसे की बताकर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल
Fact Check: सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीरें रुद्रप्रयाग बस हादसे के दौरान की हैं। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत साबित हुआ है। हमने दोनों तस्वीरों को एआई जनरेटेड पाया है।
विस्तार
बीते 26 जून को उत्तराखड़ के रुद्रप्रयाग जिले में एक बस अलकनंदा नदी में गिर गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। इसी बीच सोशल मीडिया पर बस हादसे से जुड़ी दो तस्वीरें वायरल हो रही हैं। दोनों तस्वीरों में एक बस नदी में गिरी नजर आ रही है। तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर रुद्रप्रयाग बस हादसे की है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को गलत पाया है। हमने पाया है कि दोनों वायरल तस्वीर एआई जनरेटेड हैं, जिसे रुद्रप्रयाग हादसे का बताकर शेयर किया जा रहा है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें रुद्रप्रयाग बस हादसे के दौरान की हैं।
पहली तस्वीर की दावा
बर्बरीक (@Sunny_000S) नाम के एक्स यूजर ने लिखा "रुद्रप्रयाग में हादसा: तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस घोल्टिर के पास उफनती अलकनंदा नदी में गिर गई 26.06.2025 18 सीटों वाली एक बस अलकनंदा नदी में गिर गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए, जबकि कई लोग लापता हैं। बचाव अभियान जारी है।" पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
दूसरी तस्वीर का दावा
नीरज सिंह डोगरा (@dogra_ns) नाम के यूजर ने लिखा “ दुखद समाचार: रुद्रप्रयाग से बद्रीनाथ की यात्रा पर निकली एक बस का दिल दहला देने वाला एक्सीडेंट हुआ। कौन जानता था कि यह यात्रा उनकी आखिरी यात्रा होगी? यात्रियों से भरी बस गहरी खाई में गिर गई और अलकनंदा नदी की तेज धारा में बह गई। हम भगवान केदारनाथ से प्रार्थना करते हैं कि वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों को इस असहनीय दुख की घड़ी में शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति”। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

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पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमने पाया कि इस तस्वीर का इस्तेमाल किसी भी विश्वसानीय रिपोर्ट में नहीं किया गया है। आगे की पड़ताल करने के लिए हमने दोनों तस्वीरों को ध्यान से देखा। हमें फोटो में कुछ विसंगतियां दिखाई दीं, जो असल फोटो में देखने को आमतौर पर नहीं मिलती है। दोनों फोटो की क्वालिटी काफी हाई थी। इससे फोटो के एआई होने के बारे में संदेह हुआ। इसके बाद हमने फोटो को एआई इमेज डिटेक्शन टूल से सर्च किया। एआई डिटेक्टर टूल हाइव मॉडरेशन पर पहले फोटो के 99.5 फिसदी एआई से बने होने की संभावना जताई ।
वहीं दूसरी फोटो को भी एआई डिटेक्टर टूल हाइव मॉडरेशन पर दूसरे फोटो के 92.8 फिसदी एआई से बने होने की संभावना जताई ।
आगे की पड़ताल के लिए हमने डीकॉपी एआई इमेज डिटेक्शन टूल पर सर्च किया। इस दौरान डीकॉपी ने पहली तस्वीर को 99.70 फिसदी एआई से बने की संभावना जताई है।
वहीं दूसरी तस्वीर के पड़ताल में भी डीकॉपी एआई ने 92.69 फिसदी एआई से बने होने की संभावना जताई है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीर एआई से बनी है। इस तस्वीर का रुद्रप्रयाग बस हादसे से कोई संबंध नहीं है।