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विचार: बाहुबल की जमीन पर जनहित की छत

Thu, 15 Oct 2026 09:51 PM IST
राहुल कुमार सुरेश बहादुर सिंह।
सुरेश बहादुर सिंह। Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 15 Oct 2026 09:51 PM IST
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Opinion: Building a Roof of Public Welfare on Ground of Muscle Power
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

लोकतंत्र में सत्ता की असली कसौटी यह नहीं कि उसके पास कितने अधिकार हैं, बल्कि यह है कि वह उन अधिकारों का इस्तेमाल समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के हित में कैसे करती है। जब किसी बाहुबली की हैसियत के आगे गरीब की जमीन, उसकी आजीविका और उसके परिवार का भविष्य असुरक्षित हो जाए, तब चुनौती सिर्फ अवैध कब्जे की नहीं रहती। तब कानून के राज की विश्वसनीयता दांव पर लग जाती है। ऐसे में न्याय का अर्थ केवल कब्जा हटाना नहीं, बल्कि उस जमीन को उसके वास्तविक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ना भी है। माफिया की जमीन पर गरीबों को आवास देने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल इसी धारणा को सार्वजनिक जीवन में स्थापित करने का प्रयास है।

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यह जमीन के उपयोग में बदलाव भर नहीं है। यह शासन की प्राथमिकताओं और राज्य की शक्ति के उद्देश्य को लेकर दिया गया स्पष्ट संकेत है। प्रयागराज के लूकरगंज में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी जमीन पर 76 फ्लैट बने। लखनऊ के डालीबाग में माफिया मुख्तार अंसारी से जुड़ी जमीन पर 72 ईडब्ल्यूएस फ्लैट तैयार हुए। अब प्रयागराज के कसारी-मसारी में अतीक की जमीन पर 602 आवासों की परियोजना प्रस्तावित है, जिसके पद्मलोक अपार्टमेंट का भूमि पूजन 15 अक्टूबर को हुआ है। इन सबके केंद्र में एक ही संदेश है: जिस जमीन पर कभी बाहुबल और अवैध कब्जे का साया था, वहां अब गरीब परिवारों को छत मिलेगी। गरीब के लिए जमीन मिट्टी का टुकड़ा नहीं, परिवार की सुरक्षा, बच्चों का भविष्य और जीवन भर की कमाई का आधार होती है। जब कोई दबंग अपने भय और रसूख के सहारे यह आधार छीन लेता है, तब चोट एक व्यक्ति के अधिकार पर ही नहीं, पूरी व्यवस्था की साख पर पड़ती है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने व्यवस्था की साख लौटाने के लिए ही माफिया की जड़ पर प्रहार करने की सोच को आगे बढ़ाया है। लूकरगंज में अतीक अहमद के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की चाबियां जून 2023 में लाभार्थियों को सौंपी गईं। इसी तरह नवंबर 2025 में डालीबाग (लखनऊ) के 72 फ्लैटों के आवंटन पत्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दिए गए। दो परियोजनाओं में 148 परिवारों को घर मिले। इन अवसरों पर मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि सार्वजनिक या गरीबों की जमीन पर कब्जा करने वालों को शासन में कोई संरक्षण नहीं मिलेगा, और ऐसी जमीन का उपयोग जनकल्याण के लिए होगा।
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इस पहल का पहला संदेश यह है कि कानून के सामने बाहुबल, धनबल या राजनीतिक प्रभाव सुरक्षा कवच नहीं बन सकता। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का कानून-व्यवस्था संबंधी नैरेटिव इसी बिंदु से आकार लेता है। राज्य स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गैंग के सदस्यों-सहयोगियों में 1,494 के विरुद्ध 909 अभियोग दर्ज किए गए और 651 की गिरफ्तारी हुई। 18 के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) और 802 के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। अपराध के सहारे अवैध रूप से अर्जित 4,309  करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है। ठोस अदालती पैरवी का नतीजा यह रहा कि 36 माफिया और 104 संगठित अपराधियों को आजीवन कारावास तथा 2 अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा दिलाई गई।

ये आंकड़े बताते हैं कि इस दृष्टिकोण में कार्रवाई का अर्थ गिरफ्तारी और मुकदमों तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति और उसके सहारे कायम प्रभाव को भी चुनौती देना है। इसीलिए इन परियोजनाओं को शहरी विकास की सामान्य योजनाओं की तरह नहीं देखा जा सकता। प्रधानमंत्री आवास योजना और ईडब्ल्यूएस प्रावधानों से जुड़कर ये सामाजिक न्याय के व्यापक विचार को सामने लाती हैं। गरीब के लिए घर केवल छत नहीं, सम्मान, स्थिरता और आत्मविश्वास का आधार है। 


(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक सुरेश बहादुर सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व शासकीय अधिवक्ता हैं।)

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