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The Signature Movie Review: अनुपम खेर का नेशनल अवार्ड विनिंग अभिनय, के सी बोकाडिया का धमाकेदार ओटीटी डेब्यू

Sat, 12 Oct 2024 08:41 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 12 Oct 2024 08:41 AM IST
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The Signature Movie on zee5 Review by Pankaj Shukla k C Bokadia Anupam Kher Gajendra Ahire Annu Kapoor
'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
द सिगनेचर
कलाकार
अनुपम खेर , अन्नू कपूर , महिमा चौधरी , मनोज जोशी , स्नेहा पॉल , केविन गांधी , रणवीर शौरी , संगीता बोकाडिया जैन और नीता कुलकर्णी आदि
लेखक
गजेंद्र अहिरे
निर्देशक
गजेंद्र अहिरे
निर्माता
के सी बोकाडिया
ओटीटी
जी5
रिलीज
3 अक्तूबर 2024
रेटिंग
4/5

क्या करेंगे आप जब आपके अपने कष्ट में हों? इतने कष्ट में कि हर सांस जीवन की छूटती डोर को थामने की कोशिश सी हो। इतनी कठिन कोशिश कि जिंदगी छिलने लगें। तब क्या करेंगे आप? क्या अपने इस निकट संबंधी को यूं ही कष्ट भोगने देंगे या फिर स्मरण करेंगे महामृत्युंजय मंत्र की इस भावना को कि आत्मा को शरीर से वैसे ही अलग हो जाना चाहिए जैसे पकी हुई ककड़ी अपनी बेल से अलग होती है। हिंदी सिनेमा में सबसे तेज 50 फिल्में बनाने वाले निर्माता के सी बोकाडिया की दूसरी पारी ओटीटी पर शुरू हो रही है और अपनी दूसरी पारी की पहली गेंद को ही उन्होंने मैदान के बाहर पहुंचा दिया है। ये फिल्म बनी है चिकित्सा क्षेत्र में अक्सर तीमारदारों के सामने आने वाले उस धर्मसंकट पर, जिसमें उन्हें अपने ही करीबी के डीएनआर (Do Not Resuscitate) फार्म पर हस्ताक्षर करने पड़ सकते हैं। 

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The Signature Movie on zee5 Review by Pankaj Shukla k C Bokadia Anupam Kher Gajendra Ahire Annu Kapoor
'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जिंदगी का सबसे कठिन सिगनेचर
ध्यान रहे, महामृत्युंजय मंत्र अमर होने का नहीं अकाल मृत्यु से बचने का वरदान है। फिल्म ‘सिगनेचर’ जीवन की इन्हीं महकती, मचलती बेलों के एकदम से मुर्झा जाने की कहानी है। जीवन भर बच्चों की परवरिश में गुजार देने वाले दंपती अक्सर रिटायरमेंट के बाद यूरोप घूमने की योजना बनाते ही हैं। रोशनी उनको हर तरफ दिखती है। लेकिन, बटन बंद होते ही ये रोशनी चली जानी है। जीवन ऐसा ही है। पता ही नहीं चलता कि किस रात हम बटन बंद करके सोएंगे और शायद सुबह उठे ही नहीं। मृत्यु ऐसी ही होनी चाहिए। न खुद को कष्ट, न घरवालों को कष्ट। ईश्वर किसी को उस हालत में न लाए जब अस्पताल में उसे ‘डीएनआर’ पर सिगनेचर करना हो। मतलब, अपने किसी करीबी के बारे में ये लिखकर देना हो कि जब उसके दिल की धड़कन बंद हो तो उसे कृत्रिम तरीके से दोबारा चलाने की कोशिश न की जाए। और, अधिकतर अस्पताल इन दिनों कैसे होते हैं, ये तो पता ही है। साफ जवाब मिलता नहीं है, मरीज की सांस मशीन से चलती रहती है। घरवाले पैसा जुटाते जुटाते सड़क पर आ जाते हैं। 

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The Signature Movie on zee5 Review by Pankaj Shukla k C Bokadia Anupam Kher Gajendra Ahire Annu Kapoor
'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अनुपम खेर की अदाकारी का एक और सिक्सर
अनुपम खेर कमाल के कलाकार शुरू से रहे हैं। उनकी लीड भूमिकाओं वाली फिल्मों की चर्चा चलने पर पचास के आसपास पहुंच चुकी पीढ़ी के लोग झट से ‘सारांश’ और ‘डैडी’ (1989) गिना देते हैं। खुश होना चाहिए मौजूदा युवा पीढ़ी को कि उनके समय में अनुपम खेर ने ‘द सिगनेचर’ बनाई। बेटी का ब्याह कर चुका पिता जब ये कहता है कि बेटों से हमेशा चमत्कार की कोशिश नहीं करनी चाहिए तो वह पूरी एक पीढ़ी का दर्द समेटकर परदे पर रख देता है। ये फिल्म पहले फ्रेम से आखिरी फ्रेम तक अनुपम खेर की है। नेशनल अवार्ड विनिंग फिल्म है ‘द सिगनेचर’। खुद से, परिवार से, समाज से हताश एक इंसान को जब उसके पहले प्यार में रोशनी नजर आती है और ये रोशनी नजर आते ही उसकी आंखों पर पड़ा परदा जो हटता है तो फिर क्या ही हाथ आ पाता है..! रुलाई फूट ही पड़ती है, इस आखिरी दृश्य में। टूटी जिल्द से किताबें बनाने की ये कोशिश बहुत मार्मिक है!

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'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

शुरू हुआ गजेंद्र अहिरे का गजकेसरी योग
मराठी रंगमंच और सिनेमा का बड़ा नाम रहे लेखक, निर्देशक गजेंद्र अहिरे ने फिल्म ‘द सिगनेचर’ में आखिरकार वह आसमान नाप ही लिया, जिसके वह हकदार भी रहे और तलबगार तो खैर जमाने से रहे हैं। गजेंद्र की हिंदी में ये चौथी फिल्म है। मानवीय संवेदनाओं के वह चितेरे हैं। कैमरे की कूची से रुपहले परदे के कैनवास पर उन्होंने फिल्म ‘द सिगनेचर’ में जिंदगी लिखी है। देश में आने वाले कुछ बरसों में 60 बरस से ऊपर के लोगों की तादाद इतनी तेजी से बढ़ने वाली है कि फिल्में बनाने वालों को उसका अभी अंदाजा तक नहीं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए अन्य भारतीय भाषाओं में जिस तरह की फिल्में देख हिंदी सिनेमा के दर्शक ललचाते रहे हैं, वैसी फिल्म है ये ‘द सिगनेचर’। दो नेशनल फिल्म अवार्ड गजेंद्र अहिरे की झोली में पहले से हैं, तीसरे का आने का संकेत ये फिल्म देती है।

The Signature Movie on zee5 Review by Pankaj Shukla k C Bokadia Anupam Kher Gajendra Ahire Annu Kapoor
'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

महिमा ने मिटा दिया रील और रीयल का फर्क
और, फिल्म ‘द सिगनेचर’ को मजबूती से थामे रहने में इसके सहायक कलाकारों ने भी कमाल काम किया है। कारोबारी चिकित्सक के रूप में मनोज जोशी का व्यक्तित्व कहानी का बीज बनता है। रणवीर शौरी ने इस बीज को अपने अभिनय से खाद पानी दिया और कमाल का काम अपने छोटे से स्पेशल अपीयरेंस में किया है। केविन गांधी का ताव देखते ही बनता है। और, बिना विग पहने कैमरे के सामने चली आने वाली अभिनेत्री महिमा चौधरी ने तो दिल जीत लेने वाला काम किया है। उनके अस्पताल पहुंचने से ही कहानी का असली ट्विस्ट आता है। अरविंद पाठक को अस्पताल में आईसीयू में भर्ती अपनी पत्नी के लिए डीएनआर लिखने की हिम्मत अपनी इस पूर्व साथी से ही मिलती है। अनुपम खेर की बेटी बनीं संगीता बोकाडिया जैन का अभिनय भी प्रभावशाली है और भविष्य में उनसे कुछ और कमाल करने की उम्मीदें जगाता है। अन्नू कपूर भी फिल्म में दम भरते नजर आते हैं। हालांकि, उनका किरदार हमेशा की तरह यहां भी ओवरएक्टिंग का शिकार हो गया है। 
 

The Signature Movie on zee5 Review by Pankaj Shukla k C Bokadia Anupam Kher Gajendra Ahire Annu Kapoor
'द सिगनेचर' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रोहित शर्मा के संगीत से सजी फिल्म
फिल्म ‘द सिगनेचर’ तकनीकी रूप से भी मजबूत फिल्म है। सिर्फ सौ मिनट की ये फिल्म ओटीटी पर एक बार में देख लिए जाने के लिए बिल्कुल परफेक्ट फिल्म है। फिल्म संवेदनशील है। अस्पतालों की असलियत की बात करती है। डॉक्टरों को कटघरे में खड़ा करती दिखती है। रिश्तों की तुरपाई उधेड़ती चलती है। कहानी, पटकथा और संवाद फिल्म में निर्देशक गजेंद्र अहिरे के खुद के लिखे हुए हैं। इस फिल्म का जो दूसरा सबसे मजबूत तकनीकी पहलू है वह है इसका संगीत। रोहित शर्मा ने इस फिल्म में अपने संगीत से सांसें फूंकी हैं। परदे पर रिसते दर्द को रोहित के संगीत ने संभाला है। वह फिल्म में दर्शकों के साथ सुर मिलाता चलता है। कृष्ण सोरेन का कैमरा वक्त की कसौटी है और अनंत मारुति कामथ का संकलन उसका सुहागा। फिल्म शुरू में थोड़ा सुस्त है लेकिन एक बार जब ये चाल पकड़ती है तो एडियों में बंधा सफर मंजिल तक क्या ही सिनेमाई सुंदरता के साथ आता है। 

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