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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny

Tarla Movie Review: सिनेमा के नए स्वाद की खुशबू ‘तरला’, हुमा कुरैशी ने खींची अदाकारी की मसालेदार लकीर

Fri, 07 Jul 2023 12:13 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 07 Jul 2023 12:13 AM IST
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Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
तरला
कलाकार
हुमा कुरैशी , शारिब हाशमी , राजीव पांडे , भारती अचरेकर , अमरजीत सिंह , पूर्णेंदु भट्टाचार्य और भावना सोमैया
लेखक
पीयूष गुप्ता और गौतम वेद
निर्देशक
पीयूष गुप्ता
निर्माता
रॉनी स्क्रूवाला , नितेश तिवारी और अश्विनी अय्यर तिवारी
रिलीज
7 जुलाई 2023
ओटीटी
जी5
रेटिंग
3/5

बीते साल फिल्म ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ के धमाकेदार टाइटल रोल से अपनी अभिनय यात्रा के 10 साल पूरे कर चुकीं अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने फिर एक बार फिल्म ‘तरला’ में टाइटल रोल निभाने का बीड़ा उठाया है। आम बॉलीवुडिया अभिनेत्रियों से अलग हुमा कुरैशी का तन और मन दोनों ऐसी कहानियों से खिल उठता है जिनमें देसी बातें हों, देसी जज्बात हों और फिर चाहे कहानी किसी शहरी तिकड़मबाजी की हो या किसी छोटे से शहर के सपनों की उड़ान की। पाक कला विशेषज्ञ के रूप में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित होने वाली महिला शेफ तरला दलाल की इस यात्रा में हुमा कुरैशी के अभिनय के कई पड़ाव देखने को मिलते हैं। साथ ही देखने को ये भी मिलता है कि अगर हिंदी फिल्मों के निर्माता खोजें तो आसपास ही न जाने कितनी ऐसी कहानियां बिखरी पड़ी हैं जिन पर सहज, सरल और सादगी भरा वैसा सिनेमा आज भी बन सकता है जैसा कभी ऋषिकेश मुखर्जी बनाया करते थे।

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Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मास्टर शेफ के दौर से पहले की कहानी

फिल्म ‘तरला’ एक फूड फिल्म है। ऐसी फिल्में हिंदी में तो क्या विश्व सिनेमा में भी गिनती की ही बनती हैं। सैफ अली खान की फिल्म ‘शेफ’ इस श्रेणी की हिंदी में बनी आखिरी दिलचस्प फिल्म मानी जा सकती है हालांकि ये भी इसी नाम की एक अमेरिकी फिल्म की रीमेक थी। ‘तरला’ इस मायने में बिल्कुल देसी है। फिल्म ‘तरला’ उस दौर की कहानी है जब मास्टर शेफ जैसी सीरीज का किसी ने नाम भी नहीं सुना था और कोई महिला टेलीविजन पर आकर लोगों को खाना बनाना सिखाएगी, इस बारे में तो सोचना ही सपने देखना जैसी बात थी। लेकिन, तरला के शेफ तरला दलाल बनने की कहानी इन लाइनों को पढ़ने से भी ज्यादा दिलचस्प है।

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Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शादियां पक्की करने का हिट फॉर्मूला

किस्सा एक मिडिल क्लास फैमिली का है जिसकी बेटी को एक कपड़ा मिल में क्वालिटी कंट्रोल का काम देखने वाला लड़का मिलने आने वाला है। मां सोचती है कि बेटी ने खाना अच्छा बनाकर खिला दिया तो न सिर्फ लड़का खुश होगा बल्कि उससे ज्यादा लड़के की मां खुश होगी। खाने के जरिये रिश्ता पक्का होने के इस सूत्र को असली विस्तार मिलता है तरला की शादी के बाद। उसकी पाक कला धीरे धीरे मशहूर होने लगती है। गली मोहल्ले की लड़कियां शादी पक्की होने का ये फॉर्मूला सीखने उसके पास आने लगती हैं। और, बात धीरे धीरे वहां तक पहुंच जाती है जहां तरला को अपना ही बनाया बटाटा मुसल्लम एक महंगे रेस्तरां में एक विलायती नाम से खाने को मिलता है।

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Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
माटी के चूल्हे पर चढ़ी हांडी सी फिल्म

फिल्म ‘तरला’ को देखने से पहले ये तय कर लेना जरूरी है कि ये एक आम मुंबइया फिल्म नहीं है। नितेश तिवारी के साथ बतौर लेखक लंबे समय से जुड़े रहे पीयूष गुप्ता को ये कहानी उनकी पत्नी ने सुझाई। तरला दलाल के बेटे संजय दलाल इसके बाद उनसे जुड़े। कहानी लिखने के बाद पीयूष का ख्याल यही था कि इसे कोई और निर्देशक ही बना लेगा, लेकिन जब उनका ये ख्याली पुलाव पकता नहीं दिखा तो उन्होंने खुद ही चूल्हे पर हांडी चढ़ाने का मन बना लिया। फिल्म देखते समय कुछ बातें खास गौर करने लायक हैं। पहली तो ये कि तरला दलाल गुजराती तो है लेकिन वह गुजराती भी कुछ इस तरह बोलती है जैसे पुणे की मराठी बोलने की अदा है। दूसरी बात है इस किरदार के लिए हुमा कुरैशी का चयन। सिर्फ इन दो बातों के चलते निर्देशक पीयूष गुप्ता ने अपनी पहली फिल्म का मैदान मार लिया है।

Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हुमा कुरैशी के अभिनय की नई खुशबू

हुमा कुरैशी के लिए फिल्म ‘तरला’ उनकी अभिनय यात्रा का वह मील का पत्थर है जिस पर बैठकर वह अपने पिता सलीम कुरैशी के तमाम व्यंजनो की खुशबू अरसे से तक महसूस कर सकती हैं। सलीम जैसी रेस्तरां श्रृंखला चलाने वाले कारोबारी की बेटी को एक कुक का किरदार करना भी नियति का ही इशारा है। हुमा ने बीते चार पांच साल में खुद को  बतौर अभिनेत्री पूरी तरह बदलकर रख दिया है। ‘महारानी’ में उनका अभिनय किसी आयत की तिर्यक रेखा जैसा है तो ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ में वह अभिनय का वृत्त पूरा करती हैं। और, यहां फिल्म ‘तरला’ में उनके अभिनय का कोई आकार ही नहीं है। वह बिल्कुल अपने किरदार की तरह ही तरह हो जाती हैं। स्कूल गर्ल से लेकर एक नवविवाहिता, फिर तीन बच्चों की परवरिश करने वाली मां, छुप छुप कर मांसाहार करने वाले अपने पति के लिए सिर्फ खुशबू के जरिये मांसाहारी व्यंजनों से महकते शाकाहारी व्यंजन बनाना सीख लेने वाले इस किरदार में हुमा पानी की तरह बहती जाती हैं। जब जैसी परिस्थिति आती है उनका तल अभिनय वैसा ही आकार लेता जाता है। ये फिल्म हुमा के अभिनय की वह मसालेदार रेखा है जिसके आगे जाना अब खुद हुमा के लिए एक नई चुनौती होगी।

Tarla Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Huma S Qureshi Sharib Hashmi Piyush Gupta Nitesh Tiwari Ashiwiny
तरला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पीयूष ने पहली ही फिल्म में चखी कामयाबी

एक सहज और सरल कथन वाला सिनेमा बनाने के लिए जिन भी तत्वों की जरूरत होती है, वे पीयूष को अपनी पहली फिल्म में भरपूर मिले हैं। खासतौर से फिल्म की कॉस्ट्यूम डिजाइन करने वाली तस्नीम और फिल्म के सिनेमैटोग्राफर सालू के थॉमस ने फिल्म ‘तरला’ को कैमरे के सामने चलती एक ऐसी बायोपिक बनाने में खूब मदद की है जिसे देखने के लिए किसी खास जतन की जरूरत महसूस नहीं होती। ये एक मीठा सा एहसास है जिसका स्वाद इसका तीखा गाजर वाला हलवा दृश्य देखकर समझ आता है। फिल्म के संगीत पर पीयूष थोड़ी मेहनत और करते तो ये फिल्म को मदद ही करता। फिल्म के सहायक कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। हां, तरला के पति के रूप में शारिब का चयन कहीं कहीं खलता है। माफी मांगने वाले सीन में लंबा मोनोलॉग बोलकर शारिब ने अपनी कमियों को ढकने की हालांकि पूरी कोशिश की है, लेकिन उनकी अभिनय क्षमताओं की सीमाएं भी इसी दृश्य में खुलकर सामने आ जाती हैं।

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