फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer

Stolen Movie Review: बच्चा चोरी की खूनी दास्तां से गायब दिखा खौफ, फरमे में फिट होते जा रहे अभिषेक बनर्जी

Wed, 04 Jun 2025 11:32 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 04 Jun 2025 11:32 PM IST
विज्ञापन
Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
फिल्म रिव्यू- स्टोलेन - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
स्टोलेन
कलाकार
अभिषेक बनर्जी , शुभम वर्धन , मिया मैजलर , हरीश खन्ना , शहीदुर्रहमान , सार्थक दीवान और भानु आदि
लेखक
करण तेजपाल , स्वप्निल सालकर , गौरव ढींगरा और शुभम वर्धन
निर्देशक
करण तेजपाल
निर्माता
गौरव ढींगरा
रिलीज
अमेजन प्राइम वीडियो 4 जून 2025
रेटिंग
2/5
अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने ‘पाताललोक’ के अपने किरदार हथौड़ा त्यागी में जो कर दिखाया है, उसके पार जाने में उन्हें अभी बहुत समय लगेगा। ‘वेदा’ जैसी फिल्मों में उनकी खलनायकी इसीलिए कमजोर पड़ गई क्योंकि दर्शकों को अब उनके त्यागी से आगे जाने की उम्मीद है। ‘अपूर्वा’ में वह इसकी कोशिश पहले भी कर चुके हैं और अब ऐसी ही एक कोशिश वह फिल्म ‘स्टोलेन’ में कर रहे हैं। कुछ कुछ ‘टेकेन’ के नीयाम लीसन जैसा रचने की कोशिश यहां हिंदी फिल्म ‘स्टोलेन’ में की गई है। हिंदी फिल्मों के नाम अंग्रेजी में रखने का सिलसिला कोई आज का नहीं है। बरसों पुराना है और इसका बस एक ही कारण है, नई पीढ़ी के दर्शकों को अपनी ओर खींचना, जिनका दिल, दिमाग और जिगर सब हॉलीवुड फिल्मों का दीवाना हो चुका है।  
विज्ञापन

Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
'स्टोलेन' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दो भाइयों की मिलाई का बवाल
अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘एनएच 10’ याद है आपको, कुछ कुछ वैसी ही पृष्ठभूमि में बनाई गई फिल्म है, ‘स्टोलेन’। दो भाई हैं और दोनों की मिलाई होती है एक छोटे से अनजान रेलवे स्टेशन पर होती है। बड़ा वाला छोटे को लेने आया है। छोटा बात बात पर उतावला हो जाता है। स्टेशन पर से एक छोटी सी बच्ची उसकी मां के पहलू से चोरी हो जाती है। चोर की स्टेशन से निकलते समय छोटे भाई से टक्कर होती है और बच्ची की टोपी उसे वहीं जमीन पर गिरी मिलती है। बच्ची की मां समझती है, बच्चा इसी ने चुराया है। बड़ा वाला, बहुत बड़ा वाला है, उसके तेवर अलग हैं। दोनों भाइयों को अपनी मां की दूसरी शादी में पहुंचना है लेकिन मामला यहां चश्मदीद की गवाही में पुलिस के आते ही उलझ जाता है। छोटा वाला किसी तरह बड़े को बच्ची की तलाश करने में जुटने के लिए मना लेता है। अब फिल्म आगे क्या होनी है, यही इस फिल्म की असली कसौटी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
'स्टोलेन' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्मी मेलों के लिए बनी फिल्म
कोई 90 मिनट की फिल्में इन दिनों सीधे ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों की सबसे सही अवधि मानी जाती है। 90 सेकंड की रील में खोई मोबाइल की दुनिया को 90 मिनट की फिल्म बिना बोर किए दिखा देना अपने आप में बड़ा चैलेंज है, और ये चुनौती तब दोगुनी हो जाती है, जब कहानी में कहने को कुछ खास न हो। पूरा रायता बस पटकथा को और वह भी अंधेरे में फैलाना हो। फिल्म ‘स्टोलेन’ की पूरी शूटिंग और साउंड डिजाइनिंग सिनेमाघरों के लिए की गई दिखती है। फिल्म के लिखे फिल्म फेस्टिवल्स के नाम गिनने का मौका तो नहीं था लेकिन प्लेट्स देखकर लगता है कि कोई फिल्म फेस्टिवल इससे छूटा नहीं है। फिल्मफ्रीवे पर अपलोड करने के बाद जहां जहां के नोटिफिकेशन आते गए, लगता है सबमें ये फिल्म हो आई है। विक्रमादित्य मोटवानी, किरण राव से लेकर अनुराग कश्यप तक कोई आधा दर्जन से ज्यादा तो इसके सेलेब्रिटी एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। 
विज्ञापन

Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
'स्टोलेन' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बुधवार को फिल्म रिलीज करने का गणित
अनुराग कश्यप अपनी फिल्म ‘केनेडी’ सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, उनके नाम का सिक्का कितना चमकदार बचा है, इसी से अंदाजा लग सकता है, लेकिन इन आधा दर्जन नामों से बिना चौंधियाए अगर ये फिल्म आप देख सकते हों, तो आपको समझ आ सकता है कि एक अच्छा विचार सोचना और उस पर एक अच्छी फिल्म बनाना दोनों बहुत अलग अलग बातें हैं। करण तेजपाल ने फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली है। निर्माता गौरव धींगरा और करण की ही लिखी ये कहानी है। दोनों ने मिलकर फिल्म बनाने की जिम्मेदारियां निभाई हैं। फिल्म ‘द ठग लाइफ’ और ‘हाउसफुल 5’ के शोर में गुम न हो जाए तो इसे बुधवार को ही रिलीज कर दिया गया है। फिल्म पर इसे बनाने वालों और इसे रिलीज करने वालों का भरोसा ये बुधवार की रिलीज ही बयां कर देती है। फिल्म टाइमपास टाइप की फिल्म है, हां, हॉलीवुड सिनेमा पसंद करने वाले हिंदी दर्शकों को ये फिल्म कमाल लग सकती है, लेकिन, उसके लिए 90 मिनट का निवेश जरूरी है। 

Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
'स्टोलेन' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिषेक के कंधों पर पूरा दारोमदार
फिल्म ‘स्टोलेन’ की असल खामी इसकी पटकथा का बिल्कुल अनुमानित घटनाक्रमों के अनुसार चलते जाना है। फिल्म सुखांत होगी या दुखांत, इस पर मामला देर तक टिका रहता है, लेकिन अभिषेक बनर्जी का अभिनय आधी फिल्म के बाद इसकी गवाही देने लगता है। अभिषेक की बतौर लीड हीरो ये पहली फिल्म है लेकिन युवा मनोज बाजपेयी की जगह ले पाना उनके लिए बहुत मुश्किल है। भीखू म्हात्रे जैसा मानसिक रूप से थका देने वाला किरदार कभी अभिषेक को मिला तो उनका कैरेट भी तभी तय हो जाएगा। शुभम ने बेचैन बालक टाइप का किरदार किया है और अपनी उद्विग्नता से प्रभावित भी किया है। फिल्म में तारीफ के काबिल काम किया है बच्ची की मां बनी मिया मैजलर ने। बीते 10-11 साल से अपना नाम बनाने की कोशिशों में लगी हैं। मामला अब जाकर जमता दिख भी रहा है। सहीदुर्रहमान का काम इस फिल्म में गौर करने लायक है। कास्टिंग डायरेक्टर्स की नजरें उन पर पहले से रही हैं, फीस उनकी इस फिल्म के बाद से बढ़नी तय है। 

Stolen 2025 Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Tejpal Abhishek Banerjee Shubham Vardhan Mia Maelzer
'स्टोलेन' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मोबाइल पर इसे देख पाना बड़ी चुनौती
फिल्म चूंकि बनी है फेस्टिवल वाली सोच के साथ है लिहाजा ईशान घोष की सिनेमैटोग्राफी वैसी ही सिनेमाई रियलिस्टिक टोन में रखने की कोशिश की गई है। यही फिल्म अगर चटख धूप के साथ इन्हीं लोकेशंस में शूट की गई होती तो इसका डर और ज्यादा गंभीर होता। रात में डराना तो सबसे आसान काम है, असल हॉरर वह है जो दिन में इंसान को डरा दे। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी कुछ खास सहारा, टेंशन बिल्डिंग में देता नहीं है। प्रोडक्शन डिजाइन भी औसत है। फिल्म की सबसे बड़ी कमी है इसका दर्शकों की संवेदनाओं से सीधे कनेक्ट न हो पाना। घपाघर सिगरेट फूंकने वाले भी अच्छा काम करने की सोच सकते हैं, ये फिल्म का एक अच्छा टोन हो सकता था, लेकिन स्याह और श्याम के बीच की बारीक लाइन पर अटकती, भटकती ये फिल्म बस किसी तरह वन टाइम वॉच ही बनकर रह जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed