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अपनी फुर्ती से चौंकाती है स्कॉयफाल
रोहित मिश्र
Updated Sat, 03 Nov 2012 10:51 AM IST
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जेम्स बॉन्ड सीरीज की 23वीं फिल्म 'स्कॉयफ़ॉल' अपनी बनावट, रंग-ढंग और शैली में जेम्स बॉड की पिछली फिल्मों की तरह ही है। पहले ही मिनट से फिल्म दर्शकों को अपने साथ ले लेती है। उन दर्शकों को भी जिनके लिए जेम्स बॉन्ड उतना जाना-पहचाना किरदार नहीं है।
लगभग पांच मिनट लंबे एक एक्श्ान सीन के साथ शुरू हुई यह फिल्म फाइट के दृश्यों के साथ अपने संवादों से दर्शकों को जोड़ती है। फिल्म स्कॉयफाल में इस बार जेम्स बॉन्ड का दुश्मन किसी दूसरे देश का जासूस या आतंकवादी नहीं बल्कि उसी के साथ एमआई-6 में काम करने वाला एक पूर्व जासूस है।
वह जासूस जो स्थितियों की वजह से एमआई-6 और उसकी हेड एम का दुश्मन बन चुका होता है। फिल्म की कहानी दो-तीन मुल्कों से घूमते हुए बॉन्ड के अपने पुश्तैनी घर स्कॉयफाल में खत्म होती है। बॉन्ड सीरिज की फिल्मों में तीसरी बार बॉन्ड की भूमिका निभा रहे डेनियल क्रेग अपने अभिनय और फाइट के दृश्यों से वहां का सूनापन तोड़ते हैं जहां फिल्म थोड़ी ढीली होती दिखी। जेवियर बर्डेन का किरदार खतरनाक होने के साथ कॉमिक भी है।
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कहानीः
फिल्म की कहानी नाटो के अंडरकवर एजेंट की दुनिया में घूमती है। एम-16 के सामने अपने पुराने एजेंटों की गोपनियता को बचाए रखने की चुनौती हो जाती है। ऐसे में एम-16 उन्हें अपनी तरफ से खत्म करने का काम शुरू कर देता है। एमआई-6 के इन्हीं पुराने एजेंट में से एक शिल्वा (जैवियर बर्डेम) को भी यातनाएं मिलती हैं।
अब यही शिल्वा एम-16 का दुश्मन बन जाता है। एम-16 और उसकी हेड एम को खत्म करना ही उसका मकसद बन जाता है। शिल्वा नाटो के जासूसी ऑफिस के सारे कंप्यूटर हैक कर लेता है। इस नए दुश्मन को ठिकाने लगाने का काम एम-16 की हेड एम(ज्यूडी डेंज) जेम्स बॉन्ड(डेनियल क्रेग) को मिलता है।
बॉन्ड शिल्वा को शंघाई में खोजकर एमआई-6 के ऑफिस में ले तो आता है पर वह भाग निकलने में सफल होता है। शिल्वा एम और बॉन्ड की हत्या करना चाहते हैं। बॉन्ड किस तरह से शिल्वा की हत्या का ताना-बाना बुनता है यही फिल्म की कहानी है। कहानी में कुछ पुरानी घटनाओं के भी फ्लैशबैक आते रहते हैं।
अभिनयः
जेम्स बॉन्ड सीरिज की फिल्मों में डेनियल क्रेग तीसरी बार बॉन्ड की भूमिका में दिखे हैँ। इसके पहले वह 'क्वॉन्टम ऑफ सोलेस' और 'बॉन्ड 23' में दर्शकों को नजर आए हैं। बॉन्ड की ऐक्टिंग और उनकी संवाद अदायगी ही फिल्म की यूएसपी है। बॉन्ड हर सीन में दर्शकों को प्रभावित करते हैं, खासकर फुर्तीले एक्शन दृश्यों में।
हालांकि फिल्म में लगभग एक दर्जन बार बॉन्ड को बूढ़ा बताया गया है। हो सकता है कि ऐसा जानबूझ कर किया गया हो। बॉन्ड सीरिज में यह डेनियल क्रेग की अंतिम फिल्म हो सकती है। डेनियल क्रेग एक इंटरव्यू में कह भी चुके हैं कि हो सकता है कि भविष्य में वह बदली हुई भूमिका में दिखें।
शिल्वा की भूमिका निभाने वाले जेवियर बर्डेम के लिए डेनियल क्रेग से बेहतर संवाद लिखे गए हैं। वह सेंस ऑफ ह्रयूमर से वह दर्शकों का मनोरंजन भी करते हैं। उनकी कुटिल चालें और पैतरें लाजवाब हैं। फिल्म के कई दृश्यों में वह बॉन्ड पर भारी दिखे हैं।
एम की भूमिका निभाने वाली ज्यूडी बेंच अपने निर्णय पर अड़ी रहने वाली प्रशासक के रूप अच्छी लगी हैं। नैओमी हैरिस के पास करने के लिए जो भी था उसे उन्होंने अच्छे से पेश किया है।
निर्देशनः
फिल्म की पटकथा और निर्देशन ही फिल्म की जान है। फिल्म के निर्देशक सैम मिडेंस ने हर किरदार से बखूबी काम लिया है। यह निर्देशकीय कुशलता ही है कि सीरिज की फिल्म होने के बाद भी स्कॉयफॉल अपने आप में एक संपूर्ण फिल्म दिखती है।
जो दर्शक पहली बार बॉन्ड की कोई फिल्म देख रहे होते हैं उन्हें किसी लिंक साइट में जाने की जरूरत नहीं होती है। फिल्म में जहां जरूरत हुई है पिछली बातें बहुत ही संक्षेप में की गई हैं। एक्शन के दृश्यों के अलावा हर किरदार को स्थापित करने वाले दृश्य भी अच्छे बन पड़े है।
शहरों को खूबसूरती से फिल्माया गया है। खासकर शंघाई को। फिल्म में जहां जरूरी लगा है वहां कुछ चुटीले संवाद में रखे गए हैं। फिल्म में घटनाएं और घटनाओं का क्रम अच्छी तरह से पिरोया गया है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि फिल्म में लगातार ऐक्शन के सीन न हों।
क्यों देखे
यदि आपको एक अच्छी जासूसी फिल्मों में दिलचस्पी है। इसके अलावा यदि आप बॉन्ड के अभिनय या उसके एक्शन के कायल हैं। अच्छी सिनेमेटोग्राफी के लिए भी फिल्म देखी जा सकती है।
क्यों न देखे
यदि आपको बॉन्ड सीरिज या बॉलीवुड के किन्हीं फिल्मों से वास्ता नहीं है। आपके लिए बॉलीवुड की दूसरी फिल्में उपलब्ध हैं।
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लगभग पांच मिनट लंबे एक एक्श्ान सीन के साथ शुरू हुई यह फिल्म फाइट के दृश्यों के साथ अपने संवादों से दर्शकों को जोड़ती है। फिल्म स्कॉयफाल में इस बार जेम्स बॉन्ड का दुश्मन किसी दूसरे देश का जासूस या आतंकवादी नहीं बल्कि उसी के साथ एमआई-6 में काम करने वाला एक पूर्व जासूस है।
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वह जासूस जो स्थितियों की वजह से एमआई-6 और उसकी हेड एम का दुश्मन बन चुका होता है। फिल्म की कहानी दो-तीन मुल्कों से घूमते हुए बॉन्ड के अपने पुश्तैनी घर स्कॉयफाल में खत्म होती है। बॉन्ड सीरिज की फिल्मों में तीसरी बार बॉन्ड की भूमिका निभा रहे डेनियल क्रेग अपने अभिनय और फाइट के दृश्यों से वहां का सूनापन तोड़ते हैं जहां फिल्म थोड़ी ढीली होती दिखी। जेवियर बर्डेन का किरदार खतरनाक होने के साथ कॉमिक भी है।
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कहानीः
फिल्म की कहानी नाटो के अंडरकवर एजेंट की दुनिया में घूमती है। एम-16 के सामने अपने पुराने एजेंटों की गोपनियता को बचाए रखने की चुनौती हो जाती है। ऐसे में एम-16 उन्हें अपनी तरफ से खत्म करने का काम शुरू कर देता है। एमआई-6 के इन्हीं पुराने एजेंट में से एक शिल्वा (जैवियर बर्डेम) को भी यातनाएं मिलती हैं।
अब यही शिल्वा एम-16 का दुश्मन बन जाता है। एम-16 और उसकी हेड एम को खत्म करना ही उसका मकसद बन जाता है। शिल्वा नाटो के जासूसी ऑफिस के सारे कंप्यूटर हैक कर लेता है। इस नए दुश्मन को ठिकाने लगाने का काम एम-16 की हेड एम(ज्यूडी डेंज) जेम्स बॉन्ड(डेनियल क्रेग) को मिलता है।
बॉन्ड शिल्वा को शंघाई में खोजकर एमआई-6 के ऑफिस में ले तो आता है पर वह भाग निकलने में सफल होता है। शिल्वा एम और बॉन्ड की हत्या करना चाहते हैं। बॉन्ड किस तरह से शिल्वा की हत्या का ताना-बाना बुनता है यही फिल्म की कहानी है। कहानी में कुछ पुरानी घटनाओं के भी फ्लैशबैक आते रहते हैं।
अभिनयः
जेम्स बॉन्ड सीरिज की फिल्मों में डेनियल क्रेग तीसरी बार बॉन्ड की भूमिका में दिखे हैँ। इसके पहले वह 'क्वॉन्टम ऑफ सोलेस' और 'बॉन्ड 23' में दर्शकों को नजर आए हैं। बॉन्ड की ऐक्टिंग और उनकी संवाद अदायगी ही फिल्म की यूएसपी है। बॉन्ड हर सीन में दर्शकों को प्रभावित करते हैं, खासकर फुर्तीले एक्शन दृश्यों में।
हालांकि फिल्म में लगभग एक दर्जन बार बॉन्ड को बूढ़ा बताया गया है। हो सकता है कि ऐसा जानबूझ कर किया गया हो। बॉन्ड सीरिज में यह डेनियल क्रेग की अंतिम फिल्म हो सकती है। डेनियल क्रेग एक इंटरव्यू में कह भी चुके हैं कि हो सकता है कि भविष्य में वह बदली हुई भूमिका में दिखें।
शिल्वा की भूमिका निभाने वाले जेवियर बर्डेम के लिए डेनियल क्रेग से बेहतर संवाद लिखे गए हैं। वह सेंस ऑफ ह्रयूमर से वह दर्शकों का मनोरंजन भी करते हैं। उनकी कुटिल चालें और पैतरें लाजवाब हैं। फिल्म के कई दृश्यों में वह बॉन्ड पर भारी दिखे हैं।
एम की भूमिका निभाने वाली ज्यूडी बेंच अपने निर्णय पर अड़ी रहने वाली प्रशासक के रूप अच्छी लगी हैं। नैओमी हैरिस के पास करने के लिए जो भी था उसे उन्होंने अच्छे से पेश किया है।
निर्देशनः
फिल्म की पटकथा और निर्देशन ही फिल्म की जान है। फिल्म के निर्देशक सैम मिडेंस ने हर किरदार से बखूबी काम लिया है। यह निर्देशकीय कुशलता ही है कि सीरिज की फिल्म होने के बाद भी स्कॉयफॉल अपने आप में एक संपूर्ण फिल्म दिखती है।
जो दर्शक पहली बार बॉन्ड की कोई फिल्म देख रहे होते हैं उन्हें किसी लिंक साइट में जाने की जरूरत नहीं होती है। फिल्म में जहां जरूरत हुई है पिछली बातें बहुत ही संक्षेप में की गई हैं। एक्शन के दृश्यों के अलावा हर किरदार को स्थापित करने वाले दृश्य भी अच्छे बन पड़े है।
शहरों को खूबसूरती से फिल्माया गया है। खासकर शंघाई को। फिल्म में जहां जरूरी लगा है वहां कुछ चुटीले संवाद में रखे गए हैं। फिल्म में घटनाएं और घटनाओं का क्रम अच्छी तरह से पिरोया गया है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि फिल्म में लगातार ऐक्शन के सीन न हों।
क्यों देखे
यदि आपको एक अच्छी जासूसी फिल्मों में दिलचस्पी है। इसके अलावा यदि आप बॉन्ड के अभिनय या उसके एक्शन के कायल हैं। अच्छी सिनेमेटोग्राफी के लिए भी फिल्म देखी जा सकती है।
क्यों न देखे
यदि आपको बॉन्ड सीरिज या बॉलीवुड के किन्हीं फिल्मों से वास्ता नहीं है। आपके लिए बॉलीवुड की दूसरी फिल्में उपलब्ध हैं।