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Sitaare Zameen Par Review: धीमे-धीमे चमकेंगे आमिर के ‘सितारे’, हंसाएगी..रुलाएगी और एक सवाल पूछेगी यह फिल्म
सार
Sitaare Zameen Par Movie Review In Hindi: आमिर खान तीन साल के ब्रेक के बाद बड़े परदे पर लौटे हैं। फिल्म का नाम है ‘सितारे जमीन पर’। कैसी है यह फिल्म? देखना चाहिए या नहीं? यहां जानें…
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सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
Movie Review
सितारे जमीन पर
कलाकार
आमिर खान
,
जेनेलिया देशमुख
,
आरुष दत्ता
,
सिमरन मंगेशकर
,
वेदांत शर्मा
,
गोपी के वर्मा
और
डॉली अहलूवालिया आदि
लेखक
दिव्य निधि शर्मा
निर्देशक
आर एस प्रसन्ना
निर्माता
आमिर खान
और
अपर्णा पुरोहित
रिलीज
20 जून 2025
रेटिंग
3.5/5
विस्तार
चार साल के ब्रेक के बाद जब शाहरुख खान ने ‘पठान’ से कमबैक किया था तो उनकी एंट्री बेहद मासी थी। अब तीन साल के ब्रेक के बाद आमिर खान ने फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ से कमबैक किया है। बेहद सादे अंदाज में फिल्म के पहले सीन में ही वो कार से उतरते नजर आते हैं। इस एंट्री में काेई मास मसाला नहीं है, शायद यही आमिर का अपना नॉर्मल है।
फिल्म शुरू होती है और पांच मिनट तक आपको लगता है कि क्या आमिर यहां भी अपने किरदार को ‘लाल सिंह चड्ढा’ की तरह ही एक सुर में ले जाएंगे? कई सीन में वो एक ही जैसे एक्सप्रेशन देते नजर आते हैं पर शुक्र है कि धीरे-धीरे वो अपने किरदार का सुर पकड़ ही लेते हैं।
एक अलग सुर जो मूल फिल्म में कोच का किरदार निभाने वाले कलाकार से काफी अलग है। फिल्म भी उस मूल फिल्म से काफी अलग ही है, जिसे लेकर इसे काफी ट्रोल किया जा रहा है। यहां कई बड़े मजेदार देसी तड़के लगाए गए है और पूरी फिल्म की सबसे खास बात यह है कि ये आपको कहीं भी बोर नहीं करती।
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स्लो और इमोशनल होने के बावजूद भी यह हर बार सही वक्त पर अपनी रफ्तार फिर से पकड़ लेती है। फिल्म डाउन सिंड्रोम और न्यूरो डाइवर्जेंस पर आपको एक अलग ही अंदाज में मैसेज देती है।
यह पूरी तरह से आमिर की फिल्म भी नहीं है। हर छोटे किरदार को पूरा स्पेस दिया गया है। फिर चाहे वो आमिर की मां हों या फिर आमिर की पत्नी सुनीता के किरदार में जेनेलिया डिसूजा। वो फिल्म में खूबसूरती लेकर आती हैं। उनके बोलने के अंदाज में थोड़ा धीमापन है.. इसकी वजह फिल्म के अंत तक समझ नहीं आती क्योंकि जेनेलिया की हिंदी काफी अच्छी है.. बहरहाल, जब बाकी चीजें अच्छी हाें तो कुछ कमियां अपने आप नजर अंदाज हो जाती हैं।
फिल्म में जान डालने का काम यकीनन 10 खास कलाकारों का था और मानना पड़ेगा डायरेक्टर आर.एस. प्रसन्ना को कि उन्होंने इन बच्चों से कमाल का काम निकलवाया है। इन सबकी अपनी अपनी कहानी जो धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और अंत तक आपको इन सभी से प्यार हो जाता है।
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फिल्म शुरू होती है और पांच मिनट तक आपको लगता है कि क्या आमिर यहां भी अपने किरदार को ‘लाल सिंह चड्ढा’ की तरह ही एक सुर में ले जाएंगे? कई सीन में वो एक ही जैसे एक्सप्रेशन देते नजर आते हैं पर शुक्र है कि धीरे-धीरे वो अपने किरदार का सुर पकड़ ही लेते हैं।
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एक अलग सुर जो मूल फिल्म में कोच का किरदार निभाने वाले कलाकार से काफी अलग है। फिल्म भी उस मूल फिल्म से काफी अलग ही है, जिसे लेकर इसे काफी ट्रोल किया जा रहा है। यहां कई बड़े मजेदार देसी तड़के लगाए गए है और पूरी फिल्म की सबसे खास बात यह है कि ये आपको कहीं भी बोर नहीं करती।
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स्लो और इमोशनल होने के बावजूद भी यह हर बार सही वक्त पर अपनी रफ्तार फिर से पकड़ लेती है। फिल्म डाउन सिंड्रोम और न्यूरो डाइवर्जेंस पर आपको एक अलग ही अंदाज में मैसेज देती है।
यह पूरी तरह से आमिर की फिल्म भी नहीं है। हर छोटे किरदार को पूरा स्पेस दिया गया है। फिर चाहे वो आमिर की मां हों या फिर आमिर की पत्नी सुनीता के किरदार में जेनेलिया डिसूजा। वो फिल्म में खूबसूरती लेकर आती हैं। उनके बोलने के अंदाज में थोड़ा धीमापन है.. इसकी वजह फिल्म के अंत तक समझ नहीं आती क्योंकि जेनेलिया की हिंदी काफी अच्छी है.. बहरहाल, जब बाकी चीजें अच्छी हाें तो कुछ कमियां अपने आप नजर अंदाज हो जाती हैं।
फिल्म में जान डालने का काम यकीनन 10 खास कलाकारों का था और मानना पड़ेगा डायरेक्टर आर.एस. प्रसन्ना को कि उन्होंने इन बच्चों से कमाल का काम निकलवाया है। इन सबकी अपनी अपनी कहानी जो धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और अंत तक आपको इन सभी से प्यार हो जाता है।
सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
एक्टिंग
बात हैं एक्टिंग की तो आमिर ने अपना काम बखूबी निभाया। उनका किरदार में कई लेयर्स हैं जो आपको उनके ही अंदाज में देखने में मजा आएगा। जेनेलिया स्क्रीन पर क्यूटनेस लेकर आती हैं बाकी उनकी एक्टिंग तो हमेशा से ही बेहतर थी। सतबीर से लेकर गुड्डू और शर्मा जी से लेकर गोलू तक सभी दस खास कलाकारों से आपको प्यार हाे ही जाएगा क्योंकि फिल्म में इन सभी ने एक्टिंग नहीं की है.. इन्होंने अपनी असल मासूमियत दिखाई है। फिल्म में तीन चरित्र कलाकार भी हैं- डॉली अहलूवालिया, गुरपाल सिंह और बृजेंद्र काला.. इनके बिना ये फिल्म अधूरी थी। जिस तरह इन्होंने अपने किरदार निभाए हैं आपको इन्हें देखकर मजा आ जाएगा।
ये खबर भी पढ़ें: Sitaare Zameen Par X Review: आमिर की 'सितारे जमीन पर' ने छू लिया दर्शकों का दिल, सोशल मीडिया पर बटोरी तारीफें
बात हैं एक्टिंग की तो आमिर ने अपना काम बखूबी निभाया। उनका किरदार में कई लेयर्स हैं जो आपको उनके ही अंदाज में देखने में मजा आएगा। जेनेलिया स्क्रीन पर क्यूटनेस लेकर आती हैं बाकी उनकी एक्टिंग तो हमेशा से ही बेहतर थी। सतबीर से लेकर गुड्डू और शर्मा जी से लेकर गोलू तक सभी दस खास कलाकारों से आपको प्यार हाे ही जाएगा क्योंकि फिल्म में इन सभी ने एक्टिंग नहीं की है.. इन्होंने अपनी असल मासूमियत दिखाई है। फिल्म में तीन चरित्र कलाकार भी हैं- डॉली अहलूवालिया, गुरपाल सिंह और बृजेंद्र काला.. इनके बिना ये फिल्म अधूरी थी। जिस तरह इन्होंने अपने किरदार निभाए हैं आपको इन्हें देखकर मजा आ जाएगा।
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सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
डायरेक्शन
डायरेक्टर आर एस प्रसन्ना की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म को कहीं भी बोरिंग नहीं बनने दिया। जेन जी जेनरेशन जैसे ही इमोशनल सीन आने पर बोर होने लगती है वैसे ही प्रसन्ना इसमें एक कॉमिक सीन लेकर आ जाते हैं। एक सीन हैं जहां इन स्पेशल बच्चों के केयर टेकर आमिर को नाॅर्मल और पागल होने के बीच का फर्क समझाते हैं। यह सीन हंसी-मजाक में आपकी आंखें खोल देगा। प्रसन्ना ने कॉमेडी के जरिए पूरी फिल्म में कई बड़े संदेश दिए हैं। अंत में फिल्म आपसे एक सवाल पूछती है - आपका अपना नॉर्मल क्या है ?
डायरेक्टर आर एस प्रसन्ना की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म को कहीं भी बोरिंग नहीं बनने दिया। जेन जी जेनरेशन जैसे ही इमोशनल सीन आने पर बोर होने लगती है वैसे ही प्रसन्ना इसमें एक कॉमिक सीन लेकर आ जाते हैं। एक सीन हैं जहां इन स्पेशल बच्चों के केयर टेकर आमिर को नाॅर्मल और पागल होने के बीच का फर्क समझाते हैं। यह सीन हंसी-मजाक में आपकी आंखें खोल देगा। प्रसन्ना ने कॉमेडी के जरिए पूरी फिल्म में कई बड़े संदेश दिए हैं। अंत में फिल्म आपसे एक सवाल पूछती है - आपका अपना नॉर्मल क्या है ?
सितारे जमीन पर
- फोटो : अमर उजाला
देखें या नहीं
फिल्म में आमिर का एक डायलॉग है जहां वो कहते हैं, ‘मैं इन बच्चों को नहीं, ये बच्चे मुझे काफी कुछ सिखा रहे हैं।’ यकीन मानिए फिल्म देखकर आप भी काफी कुछ नया सीखकर आएंगे।
कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म लंबे समय बाद बॉलीवुड के लिए राहत की सांस लेकर आ सकती है। यकीनन यह ‘पुष्पा’ की तरह दो दिनों में 100 करोड़ नहीं कमाएगी पर वर्ड ऑफ माउथ से अपनी रफ्तार पकड़ सकती है।
ये भी हो सकता है कि एक दर्शक वर्ग को यह फिल्म एंटरटेन न करे क्योंकि सबका अपना-अपना नॉर्मल है। हां इतना जरूर है कि ‘हाउसफुल 5’ जैसी फूहड़ कॉमेडी वाली फिल्म में परिवार के साथ जाकर पछताने वाले दर्शक, यहां साफ-सुथरी कॉमेडी पर जी-भरके हंस जरूर लेंगे।
लंबे समय से परदे से गायब आमिर खान को मिस कर रहे हैं और एक इमोशनल मैसेज वाली फिल्म देखना चाहते हैं तो इसे देख सकते हैं। अगर एक्शन, रोमांस या तेज रफ्तार से चलते वाली फिल्मों के शौकीन हैं तो यह आपके लिए नहीं है।
फिल्म में आमिर का एक डायलॉग है जहां वो कहते हैं, ‘मैं इन बच्चों को नहीं, ये बच्चे मुझे काफी कुछ सिखा रहे हैं।’ यकीन मानिए फिल्म देखकर आप भी काफी कुछ नया सीखकर आएंगे।
कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म लंबे समय बाद बॉलीवुड के लिए राहत की सांस लेकर आ सकती है। यकीनन यह ‘पुष्पा’ की तरह दो दिनों में 100 करोड़ नहीं कमाएगी पर वर्ड ऑफ माउथ से अपनी रफ्तार पकड़ सकती है।
ये भी हो सकता है कि एक दर्शक वर्ग को यह फिल्म एंटरटेन न करे क्योंकि सबका अपना-अपना नॉर्मल है। हां इतना जरूर है कि ‘हाउसफुल 5’ जैसी फूहड़ कॉमेडी वाली फिल्म में परिवार के साथ जाकर पछताने वाले दर्शक, यहां साफ-सुथरी कॉमेडी पर जी-भरके हंस जरूर लेंगे।
लंबे समय से परदे से गायब आमिर खान को मिस कर रहे हैं और एक इमोशनल मैसेज वाली फिल्म देखना चाहते हैं तो इसे देख सकते हैं। अगर एक्शन, रोमांस या तेज रफ्तार से चलते वाली फिल्मों के शौकीन हैं तो यह आपके लिए नहीं है।