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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Nadaaniyan review in Hindi by Pankaj Shukla Ibrahim Ali Khan Khushi Kapoor Shauna Gautam Karan Johar Dia Mirza

Nadaaniyan Review: इस बार छोटे नवाब की ‘खुशी’ को लगी नेटफ्लिक्स की नजर, डेब्यू फिल्म के ये रहे पांच गुनेहगार

Fri, 07 Mar 2025 04:16 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 07 Mar 2025 04:16 PM IST
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Nadaaniyan review in Hindi by Pankaj Shukla Ibrahim Ali Khan Khushi Kapoor Shauna Gautam Karan Johar Dia Mirza
फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
नादानियां
कलाकार
इब्राहिम अली खान , खुशी कपूर , महिमा चौधरी , सुनील शेट्टी , दीया मिर्जा , जुगल हंसराज और अर्चना पूरण सिंह आदि
लेखक
इशिता मोइत्रा , रीवा राजदान कपूर और जेहान हांडा
निर्देशक
शॉना गौतम
निर्माता
करण जौहर , अपूर्वा मेहता और सोमेन मिश्रा
ओटीटी:
नेटफ्लिक्स
रिलीज:
7 मार्च 2025
रेटिंग
1/5

धर्मा प्रोडक्शन्स हो या धर्मेटिक एंटरटेनमेंट, क्या ही फर्क पड़ता है जब तक कि निर्माताओं के रूप में करण जौहर, अपूर्वा मेहता और सोमेन मिश्रा का नाम मौजूद हो। तीनों हिंदी सिनेमा की उस कंपनी के कर्ताधर्ता हैं, जिसे यश जौहर जैसे कर्मरथी ने बनाकर खड़ा किया और जिसका आधा हिस्सा अभी बीते साल ही हजार करोड़ में बिक गया। चर्चा रही कि कंपनी मुनाफा नहीं कमा पा रही है, इसलिए नई मेगाबजट फिल्में बनाने के लिए कंपनी को पैसा चाहिए और ये पैसा कंपनी को अदार पूनावाला ने दिया है। लेकिन, अगर ये पैसा ‘नादानियां’ जैसी फिल्में बनाने के लिए निवेश किया जा रहा है, तो पूनावाला की तरफ से जल्दी ही कोई न कोई ‘निर्माता’ धर्मा की कमान संभालने के लिए तैनात हो सकता है, इसमें दो राय नहीं है। फिल्म ‘नादानियां’ एक और खान सितारे के बेटे की एक और ऐसी कमजोर फिल्म है, जिसकी हीरोइन खुशी कपूर हैं।

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Nadaaniyan review in Hindi by Pankaj Shukla Ibrahim Ali Khan Khushi Kapoor Shauna Gautam Karan Johar Dia Mirza
फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

लेखन टीम की सबसे बड़ी नादानियां
फिल्म ‘नादानियां’ के पहले गुनेहगार इसे लिखने वाले हैं। अमिताभ बच्चन ने अभी कुछ दिन पहले ही एक ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें अभिषेक बच्चन को खामखां नेपोटिज्म विवाद में बलि चढ़ा दिया गया कलाकार बताया गया। अभिषेक को हिंदी सिनेमा में खुद को साबित करने के मौके भी अपने पिता से कम नहीं मिले और इनमें से कुछ फिल्मों में उनका काम वाकई बेहतरीन रहा। लेकिन, इब्राहिम, जुनैद और आर्यन को इतने मौके नहीं मिलने वाले। 30 सेकंड की रील वाले दौर में पले-बढ़े इन सितारों को दो-तीन घंटे तक देखना कितनी बड़ी चुनौती दर्शकों के लिए होने वाली है, इसका एक नमूना ‘लवयापा’ में दिख चुका है, दूसरा नमूना फिल्म ‘नादानियां’ हैं। इशिता मोइत्रा, रीवा राजदान कपूर और जेहान हांडा ने जो कुछ लिखा है, वह इंटरनेशनल बोर्ड के सेंट्रली एयरकंडीशंड स्कूलों में भले होता होगा, लेकिन जो दर्शक ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर पांच सौ रुपये महीना भी खर्च करके देखने वाले हैं, उनके स्कूलों में तो कतई नहीं होता होगा। कौन अपनी सिक्स पैक एब दिखाकर स्कूल को ‘इंप्रेस’ करता है? हो सकता है इब्राहिम को ऐसा कुछ ज्ञान अपने सोहो हाउस ‘एक्सपीरियंस’ से मिला हो। है क्या कुछ ऐसा, इब्राहिम?

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फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

पटकथा की दोयम दर्जे की नादानियां
कहानी बहुत छिछली है। करीब करीब वैसी ही, जितना छिछला किरदार फिल्म के ट्रेलर में इब्राहिम अली खान का दिखा था। क्लास में आई टीचर को देखकर आंखें मारने वाला कोई युवा इस देश के फिल्म दर्शकों का ‘हीरो’ बन सकता है, ये सोचना ही बहुत छिछली सोच का नमूना है। शाहरुख खान ने अगर ऐसा कुछ ‘मैं हूं ना’ में किया भी था तो वहां वह स्कूली छात्र के किरदार में नहीं थे, बल्कि वह छात्र का रूप धरकर आए थे। कहानी उधार की मोहब्बत की है जिसमें एक पैसेवाली लड़की दौलत के बूते किराये का प्रेमी लाती है। प्रेमी किराया लेते लेते मोहब्बत मांगने लगता है, बाकी कहानी क्या हो सकती है, हिंदी फिल्म देखने वाला बच्चा भी बता सकता है। ऊपर से तुर्रा ये है कि इसे लिखने वालों की ‘गैंगलीडर’ इशिता मोइत्रा ने करण जौहर की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ भी लिखी है। रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की उस फिल्म में भी हरकतें कुछ ऐसी ही थीं, लेकिन यहां वही नादानियां इब्राहिम और खुशी के संभाले नहीं संभलीं।

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फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

बिना तैयारी के निर्देशन की नादानियां
इब्राहिम अली खान का डेब्यू फिल्म में ही बेड़ा गर्क करने की दूसरी गुनेहगार इसकी निर्देशक शॉना गौतम हैं। पता नहीं उनका फर्स्ट नेम यही है या सोना को शॉना कर दिया गया है, खैर जो भी हो, उनकी भी ये डेब्यू फिल्म है और वह भी इब्राहिम की ही तरह अपनी डेब्यू फिल्म के लिए फिल्म ‘नादानियां’ में कतई तैयार नहीं दिखती हैं। जिस स्तर की ये कहानी है, उस पर तो किसी स्कूल के एनुअल फंक्शन की स्टूडेंट स्किट भी नहीं बन सकती। फिल्म तो बहुत दूर की बात है। कथा, पटकथा और निर्देशन में फिल्म का डिब्बा पूरी तरह गोल है। और, इसकी वजह ये भी हो सकती है कि इसके निर्माताओं का अपनी मार्केटिंग और सेल्स टीम पर इतना तगड़ा भरोसा है कि प्रोडक्ट कैसा भी हो, वे नेटफ्लिक्स को तो बेच ही सकते हैं। सुशांत सिंह राजपूत की ‘ड्राइव’ याद है ना? जो कहीं न बिक रहा हो, उसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज करा लेने का हिंदी फिल्म निर्माताओं का ये कॉन्फीडेंस भी हिंदी सिनेमा को तिल-तिल मार रहा है। सुभाष घई कह रहे हैं कि सिनेमा की टिकटें दो सौ रुपये की कर दी जाएं। नेटफ्लिक्स का मोबाइल सब्सक्रिप्शन ही 199 रुपये का है, लेकिन फिल्म ‘नादानियां’ देखने के लिए वह भी ज्यादा है।

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फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

दिखी ही नहीं मोहब्बत की असली नादानियां
फिल्म ‘नादानियां’ एक प्रेम कहानी है। प्रेम क्या होता है, न इब्राहिम अली खान ने कभी महसूस किया दिखता है और न एक जैसी हंसी अपनी तीसरी फिल्म में दोहरा रही खुशी कपूर ने। खुशी कपूर यहां सीनियर कलाकार हैं। ‘आर्चीज’ से डेब्यू करने के बाद वह जुनैद अली खान की सुपरफ्लॉप फिल्म ‘लवयापा’ में दिख चुकी हैं। अब बारी इब्राहिम अली खान की है। इब्राहिम अली खान का चेहरा सपाट है। करीब करीब वैसा ही है, जैसा उनके पिता सैफ अली खान का शुरू की फिल्मों में हुआ करता था। लेकिन, सैफ डांसर कमाल के रहे और रोमांटिक गानों में फबते थे। इब्राहिम में वह भी नहीं है। उनके चेहरे पर शुरू से आखिर तक एक ही भाव दिखता रहा। लगा ही नहीं कि वह अपनी डेब्यू फिल्म में काम कर रहे हैं। फिल्म देखकर ऐसा लगता है कि वह शाना गौतम की डेब्यू फिल्म में काम करके उन पर एहसान कर रहे हैं। सचिन जिगर का संगीत इस फिल्म को एक छिछली फिल्म बनाने का पांचवां गुनेहगार है। एक प्रेम कहानी में कैसा कैसा संगीत होता रहा है, हिंदी सिनेमा में! याद है? सोलह बरस की बाली उमर को सलाम, उफ्फ...!!

Nadaaniyan review in Hindi by Pankaj Shukla Ibrahim Ali Khan Khushi Kapoor Shauna Gautam Karan Johar Dia Mirza
फिल्म 'नादानियां' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला

सीनियर कलाकारों की मेहनत की नादानियां
गनीमत ये है कि इस फिल्म में इब्राहिम और खुशी की ‘पैडिंग’ अच्छे से की गई है। फिल्ममेकिंग में पैडिंग का वही मतलब होता है जो क्रिकेट में होता है। वहां अच्छी पैडिंग एक बैटर के पैर बचाती है। फिल्म में सीनियर कलाकारों का घेरा बनाया जाता है, कमजोर कलाकारों को बचाने के लिए। सुनील शेट्टी को छोड़कर बाकी सीनियर कलाकारों ने फिल्म ‘नादानियां’ में अपना काम ठीक से कर दिया है। ‘रहना है तेरे दिल में’ की सीक्वल का इंतजार कर रहे लोगों को भी एक मैसेज ये फिल्म देती है कि दीया मिर्जा अब ऐसी किसी कहानी में दिखेंगी तो कैसी दिखेंगी। जुगल हंसराज के साथ उनकी जोड़ी प्रभावी है, इसमें कोई शक नहीं। महिमा भी अपना काम ईमानदारी से कर गईं। मिसेज ब्रिगैंजा के रूप में अर्चना पूरण सिंह को लाना धर्मा प्रोडक्शन्स की बीते दिनों की फिल्मों की याद दिलाने के लिए काफी रहा और उन फिल्मों की याद ही फिल्म ‘नादानियां’ का छिछलापन सामने लाने का सबसे सही काम करती है।

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