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कर सकते हैं 'मेरे डैड की मारूती' का टेस्ट ड्राइव
रोहित मिश्र
Updated Sun, 17 Mar 2013 11:54 AM IST
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अपने नाम से एक कार कंपनी का इश्तिहार लगती यह फिल्म खुद में बहुत सारी ताजगी और नए किस्म की कॉमेडी समेटे हुए है। ऐसे कॉमेडी जो डेविड धवन, रोहित शेट्टी या प्रियदर्शन से बिल्कुल अलग शैली की है। हंसाने के लिए यहां नाटकीय पात्र और कथानक नहीं गढ़े गए हैं। सिचुवेशन यहां दर्शकों को भरपेट हंसाती है। साथ ही उन्हें फिल्म के साथ उसके पात्रों से भी जोड़कर रखती है।
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यह फिल्म एक कार के चोरी होने और उसके मिलने की कहानी है। इस घटना को दिलचस्प अंदाज में फिल्माना ही इसे एक अलग फिल्म बना देता है। फिल्म की खासियत उसकी स्क्रिप्ट और पात्र के अनुरूप कलाकारों की रियल ऐक्टिंग है। फिल्म देखते समय दर्शकों को इस बात से बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता कि इस फिल्म का हीरो-हीरोईन कौन है। वह बस पर्दे पर हो रही घटनाओं में खुद को खोज रहे होते हैं। हालांकि यह फिल्म मारूती के एक मॉडल का लंबा-चौड़ा विज्ञापन है लेकिन दर्शकों की दिलचस्पी कार में होती है न कि मारूती में।
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एक कार हुई चोरी, तीन मिलीं
समीर(साकिब सलीम) चंडीगढ़ का एक लापरवाह और मस्तमौला किस्म का लड़का है। उसके पिता (राम कपूर) उसे एक सांस में सौ गालियां सुना देते हैं। तो होता यह है कि पिता ने एक नयी सेवन सीटर एसयूवी मारुती कार खरीदी है। इसे वह अपने दामाद को भेंट करना चाहता है। परिवार में शादी-ब्याह का माहौल है। समीर अपनी कॉलेज की एक लड़की जैजलीन (रेहा चक्रबर्ती) को इंप्रेस करने के लिए उस नयी कार को चुपके से गैरॉज से निकाल लेता है।
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वह दोनों एक क्लब में जाते हैं। जब समीर क्लब से बाहर निकलता है तो पाता है कि उसकी कार गायब हो चुकी है। यहीं से अब कार पाने की कहानी शुरू होती है। जो पुलिस थाने से लेकर टूर एंड ट्रेवेल कंपनी और पुरानी कारों के गैराज तक पहुंचती है। इस काम में समीर का साथ उसका दोस्त गट्टू (प्रबल पंजाबी) देता है। फिल्म के क्लाइमेक्स में समीर को एक नहीं तीन वैसी ही कारें मिल जाती हैं। यह तीन कारें कैसी मिलती हैं इस बात के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
लाजवाब रहा सभी का अभिनय
फिल्म में हर कलाकार ने पात्र के अनुरूप उम्दा ऐक्टिंग की हैं। तेज तर्रार पिता रूप में राम कपूर प्रभावित करते हैं। अपने बेटे के साथ उनकी बात करने की स्टाईल हंसाने के साथ आतंक भी पैदा करती है। फिल्म का मुख्य किरदार निभा रहे साकिब सलीम अपनी ऐक्टिंग से गुदगुदाते हैं। अभिनेत्री हुमा कुरैशी के भाई साकिब सलीम की यह दूसरी फिल्म है। इसके पहले वह 'मुझसे फ्रेंडशिप करोगे' में नजर आए थे।
साकिब ने इस फिल्म में अपनी अच्छी डायलॉग डिलवरी, चेहरे के एक्सप्रेशन और कॉमेडी की परफेक्ट टाइमिंग से प्रभावित किया है। यह फिल्म यदि अपने चुटीले संवादों से हंसाती है तो उसका ज्यादातर श्रेय कलाकार प्रबल पंजाबी को भी जाता है। पांच फिट से भी कम लंबाई के इस लड़के में विजय राज जैसी ठहर कर मौके पर संवाद बोलने की अदा है। आने वाले समय में प्रबल पंजाबी शहरी लाइफ स्टाईल पर बनीं फिल्मों के बड़े कॉमेडियन के रूप में उभर सकते हैं।
जैजीलीन का किरदार निभा रहीं रेहा चक्रबर्ती की खासियत यह है कि वह फिल्म में कहीं से अभिनेत्री नहीं लगतीं। फिल्म में वह चंडीगढ़ की एक टिप टॉप और बन-ठन कर रहने वाली लड़की का किरदार निभाती हैं, जो उन फबता है। एक छोटे से रोल में रवि किशन बस ठीक-ठाक हैं।
पहली फिल्म, लेकिन निर्देशन प्रभावी
एक निर्देशक के रूप में यह आशिमा छिब्बर की पहली फिल्म है। अपनी पहली फिल्म से उन्होंने नए किस्म की संभावनाएं दिखायीं हैं। आशिमा की यह फिल्म थोड़ी लाऊड जरूर है पर उसकी लाऊडनेस किरदारों के मिजाज को जस्टीफाई करती है। मौके के अनुरूप चुटीले संवाद रखने में आशिमा सफल रही हैं। छोटे-छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को जब बड़ा मौका मिलता है तो वह उत्साह में आकर ओवरऐक्टिंग करने लगते हैं, निर्देशक ने इस आशंका को अपने कुशल निर्देशन से बचाया है।
हां, इस फिल्म में एक सुधार हो सकता था। बहुत तेज रफ्तार से चल रही इस फिल्म में कॉमेडी का एक पैरलल स्लो ट्रैक और होना चाहिए था। उस ट्रैक को विजय राय या दीपक डोबरियाल लीड करते। कहीं-कहीं पर ठेठ पंजाबी अखरती है। यह पंजाबी समझने वाले दर्शकों को तो होमनेस फील कराती है पर दूसरे दर्शकों के लिए उसे समझना मुश्किल हो जाता है।
गाने भी हंसाते हैं
फिल्म के गाने मजेदार हैं। पूरी फिल्म में रह-रहकर बज रहा गाना "पंजाबियां दी बैटरी चार्ज रहदीं हैं" एक खूबसूरत गाना है। इसे हनी सिंह और मीका सिंह से झूमकर गाया है। "हिप हिट हुर्रा" गाने के लिरिक्स और फिल्मांकन निहायत ही मजाकिया हैं। फिल्म का टाइटल सॉन्ग "मेरे डैड की मारूती" और "मैं सेंटी था" भी सुनने में अच्छा लगते हैं। फिल्म के मिजाज की तरह गाने भी नए किस्म से लिखे और फिल्माए गए हैं।
क्यों देखें
कार की एक चोरी और उसके मिलने की दिलचस्प कहानी देखने के लिए। साथ ही खूबसूरत ऐक्टिंग के लिए भी।
क्यों न देखें
यदि आपको इस बात में दिलचस्पी ज्यादा रहती हो कि फिल्म में नायक और निर्देशक कितना पुराना और मंझा हुआ है।