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फिल्म समीक्षा/कबाली:ये है वन मैन शो

Sat, 23 Jul 2016 12:14 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Sat, 23 Jul 2016 12:14 PM IST
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Movie review kabali

निर्माताः के.एस. थानु

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निर्देशकः पी.रंजीत
सितारेः रजनीकांत, राधिका आप्टे, विंस्टन चाओ, धनशिका
रेटिंग ***1/2

अगर आप रजनीकांत के सिर्फ नाम से परिचित हैं तो कबाली में उनका सुपरस्टारडम देख सकते हैं। उनका अंदाज निराला है और विलेन के छक्के छुड़ाते वक्त भी उनके चेहरे पर तनाव नहीं होता। बड़े से बड़ा काम वह चुटकी बजाते कर देते हैं। वन मैन शो किसे कहते हैं, रजनीकांत की यह फिल्म देखते हुए सहज महसूस किया जा सकता है। निःसंदेह वह ग्लोबल स्टार हैं। कबाली एंटरटेनर मसाला फिल्म है। मूल तमिल में बनी यह फिल्म तेलुगु और हिंदी में डब करके भी रिलीज की गई है। तमिल संस्करण में अंग्रेजी सबटाइटल्स दर्ज हैं।

फिल्म इंडोनेशिया में रहने वाले तमिलों के चीनियों के साथ संघर्ष की कहानी है। जिसमें दशकों से वहां मजदूरों की तरह रहे तमिल समय के साथ खुद को बदल रहे हैं। उनकी आर्थिक ताकत और बाहुबल बढ़ रहा है। कुआलालंपुर में चीनी और तमिल अंडरवर्ल्ड के बीच अपने-अपने साम्राज्य को बचाने-बढ़ाने की जंग चल रही है।

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25 साल की कैद से लौटे कबाली की कहानी

Movie review kabali

कहानी शुरू होती है कि 25 साल जेल में कैद रहने के बाद बूढ़ा हो चुका कबाली (रजनीकांत) लौट रहा है। उसकी वापसी गैंग 47 के लिए खतरे की घंटी है। इस गैंग का सरगना है टोनी (विंस्टन चाओ)। कबाली को टोनी और कुछ अन्य ऐसे लोगों से हिसाब चुकाने हैं जिन्होंने उसके साथ विश्वासघात किया। टोनी और इन लोगों के साथ जंग में कबाली अपनी पत्नी (राधिका आप्टे) को खो चुका है। अतः अब गंवाने के लिए उसके पास कुछ नहीं है। कहानी में कई आकर्षक ट्विस्ट एंड टर्न हैं और आखिर में वह कुछ सुखद राज खोलती हुई कबाली की जीत के साथ खत्म होती है।

रजनीकांत किंवदंती बन चुके हैं और सिनेमाघर में फैन्स का जुनून एक खास अहसास पैदा करता है। रजनीकांत के देखने-बोलने-चलने और मुस्कराने का अंदाज ही अभिनय है। वह दर्शक को चौंकाते हुए उसका मनोरंजन करते हैं। निर्देशक ने शुरू से अंत तक बांधे रखा है। यहां काफी कुछ अतिरंजित होकर भी अनावश्यक नहीं मालूम पड़ता। रजनीकांत के साथ राधिका आप्टे खूबसूरत लगी हैं। उन्होंने अपनी भूमिका सहजता से निभाई है। भारतीय सिनेमा में भाषाई सीमाएं इधर टूट रही हैं और इस लिहाज से कहा जा सकता है कि कबाली किसी क्षेत्र या प्रदेश विशेष की फिल्म नहीं है। अपनी कहानी से लेकर फिल्मांकन तक में यह वैश्विक है।

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