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Khufiya Review: विशाल भारद्वाज का सिने वनवास पूरा, तब्बू, वामिका और अली ने करिश्माई अभिनय से किया राजतिलक

Thu, 05 Oct 2023 12:42 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 05 Oct 2023 12:42 PM IST
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Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
खुफिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
खुफिया
कलाकार
तब्बू , वामिका गब्बी , अली फजल , आशीष विद्यार्थी , अतुल कुलकर्णी , अजमेरी हक , ललित परिमू , शताफ फिगार और नवनींद्र बहल
लेखक
रोहन नरूला और विशाल भारद्वाज
निर्देशक
विशाल भारद्वाज
निर्माता
विशाल भारद्वाज और रेखा भारद्वाज
ओटीटी
नेटफ्लिक्स
रेटिंग
4/5

विशाल भारद्वाज से मैं अरसे तक बहुत नाराज रहा हूं। और, वह इसलिए कि ‘जंगल जंगल बात चली है पता चला है’ की धुन के साथ उनसे बना राब्ता बीते 14 साल में धीरे धीरे अपना असर खोता गया। विशाल ने जब फिल्म ‘माचिस’ का संगीत दिया तो यूं लगा कि हिंदी सिनेमा में साज, साजिंदों और आवाजों की इज्जत अभी कम नहीं हुई है। उस बात को भी गिनने बैठें तो ऐसा लगेगा कि हम बीते जमाने की बातें कर रहे हैं। बात है भी बीते जमाने की लेकिन ‘खुफिया’ नए जमाने, नए दौर और नए चलन की फिल्म है। ये उन विशाल भारद्वाज की फिल्म है जिनकी आखिरी फिल्म ‘पटाखा’ कोई पांच साल पहले रिलीज हुई। और, जिनकी किसी फिल्म की तारीफ में कुछ लिखे हुए मुझे 14 साल हो गए हैं। उन्हें जानने वाले इस बीच तरह तरह की बातें उनके बारे में करते। कोई उनके लिए संवेदनाएं जताता तो कोई यहां तक कहता कि ये काम इसलिए उन्होंने विशाल से कराया क्योंकि वह इन दिनों परेशान हैं। लेकिन, विशाल का वक्त ‘खुफिया’ से फिर बदलने वाला है।

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Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
विशाल भारद्वाज-एस्केप टू नोव्हेयर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

काबिल निर्देशक को मिली असरदार कहानी

शेक्सपीयर के उपन्यासों पर बनी उनकी फिल्मत्रयी ‘मकबूल’, ‘ओंकारा’ और ‘हैदर’ हिंदी सिनेमा की धरोहर फिल्मों में शुमार हैं। ‘ओंकारा’ की भाषा को लेकर जी न्यूज पर जब मैंने प्राइम टाइम स्पेशल बनाया तो उसको हिंदी सिनेमा में गिरती भाषा का रेफरेंस प्वाइंट माना गया। सिनेमा समाज का दर्पण होता है और दर्पण पर जब जमाने की धूल जमा होने लगे तो कई बार अक्स साफ नजर नहीं ही आता है। विशाल को जमाने को न समझ पाने की कहानी ‘सात खून माफ’ से साल 2011 में शुरू हुई। ‘कमीने’ तक उनका ढेंन टणा खूब दमदार तरीके से बजा। इसके बाद तो ‘मटरू की बिजली का मंडोला’, ‘रंगून’ और ‘पटाखा’ में उन्होंने अपने चाहने वालों का कितना कुछ दिल नहीं दुखाया। फिल्म देखने के बाद बहस घंटों इसी बात पर होती थी कि विशाल क्या कहानियां चुनने में चूक रहे हैं या खुद ही बतौर निर्देशक चुक रहे हैं। अब अगर अमर भूषण के लिखे उपन्यास ‘एस्केप टू नोव्हेयर’ पर बनी उनकी ताजा फिल्म ‘खुफिया’ देखें तो समझ आता है कि एक काबिल निर्देशक की पहली खुराक एक बेहतरीन कहानी ही होनी चाहिए। और, ये कहानी चुनने में विशाल इस बार भी पहली बार में तो चूक ही गए थे। भला हो उन निर्माता को जो इस उपन्यास के अधिकार खरीदने के बाद भी तय मियाद में फिल्म नहीं बना पाए।

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Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
खुफिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और...

लौट के कहानी विशाल के पास आई तो इरफान नहीं रहे। इरफान के बाद तब्बू ही उनका सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम रही हैं हिंदी सिनेमा में। तब्बू की दाद देनी होगी कि इन दिनों जिस तरह की फिल्में वह कर रही हैं, उसके चलते भी फिल्मों को दर्शक अच्छे मिल रहे हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘खुफिया’ में तब्बू एक बिल्कुल नए अवतार में। इस किरदार का सामाजिक चेहरा दबंग अफसर का है और निजी चेहरा एक ऐसी औरत का जिसके सीने में ख्वाहिशों के अधबुझे कोयले आंच भी दे रहे हैं और उनसे भाप भी उठ रही है। कृष्णा मेहरा उर्फ केएम की हमराज एक मिशन पर बांग्लादेश में मारी जाती है तो जिनको पता है उन्हें कारगिल युद्ध के ठीक बाद का वो समय याद आता है जब भारत और पाकिस्तान दोनों को इश मुल्क के चुनावों में सबसे ज्यादा दिलचस्पी थी। लेकिन, दिलचस्पी इसमें ‘अंकल सैम’ की भी कम नहीं थी।

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Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
खुफिया म्यूजिकल नाइट-विशाल भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

2004 में लापता हुए एजेंट का सच्चा किस्सा

जासूसी उपन्यासों के शौकीनों के लिए फिल्म ‘खुफिया’ इस साल अब तक रिलीज हुई फिल्मों में बेहतरीन सौगात है। फिल्म चूंकि जासूसी कहानी है तो इसके बारे में कुछ भी बताना फिल्म देखने का मजा किरकिरा करने वाली बात होगी। लेकिन, जितना कुछ फिल्म के ट्रेलर में है, और जितना कुछ सार्वजनिक रूप से अखबारों, किताबों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उससे कोई भी दर्शक इस बात का अंदाजा लगा सकता है कि 2004 में एकाएक लापता हुए रॉ एजेंट का अंजाम क्या हुआ था? एक विदेशी एजेंसी का भारत की सबसे प्रतिष्ठित जासूसी एजेंसी में सेंध लगा देना, और इस काम के लिए उसका जो तरीका है, वह हैरान कर देने वाला है। रोहन नरूला के साथ मिलकर विशाल ने इसकी पटकथा बिल्कुल सटीक लिखी है।

Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
खुफिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पुरानी शराब सा असर करतीं तब्बू

फिल्म ‘खुफिया’ की असल मजबूती इसके कलाकारों से आती है। तब्बू एक बार फिर अपनी रवानी में हैं। किरदार उनके मन का हो तो यूं लगता है कि जैसे वह उसे घोलकर पी जाती हैं और उसके बाद उनकी धमनियों में जो करिश्मा दौड़ता है, उसकी चमक तब्बू की आंखों में, उनके बोलने, चलने के अंदाज में, यहां तक कि उनकी चुप्पी और उनकी आंख से टपके एक दो आंसुओं में बयां हो जाती है। तब्बू इन दिनों फिल्म दर फिल्म महकती जा रही हैं। उनको देखना अपने आप में एक नशा सा है। वह पुरानी शराब सा असर करती हैं।

Khufiya Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Netflix India Vishal Bhardwaj Tabu Wamiqa Gabbi Ali Fazal
खुफिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी सिनेमा का नया नगीना, वामिका

और, उनके सामने बराबर की दमक के साथ डटी है एक बिल्कुल नई अभिनेत्री वामिका गब्बी। वामिका ने विशाल के साथ काम करने के लिए पंजाबी सिनेमा में अपना जमा जमाया करियर छोड़ दिया। और, फिल्म ‘खुफिया’ उनके करियर का ‘चार्ली चोपड़ा’ और उसके पहले ‘जुबली’ से भी बड़ा इनाम है। एक फौजी की बेटी और एक रॉ अफसर की बीवी। तिरंगे की आन बनाए रखने के लिए वह जब हद से गुजरने पर आती है तो क्या कर गुजर सकती है, वामिका गब्बी के अलावा फिल्म देखने के बाद किसी दूसरी अभिनेत्री को सोच पाना भी मुश्किल लगता है।

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खुफिया-अजमेरी हक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अजमेरी और नवनींद्र की नायाब अदाकारी

कास्टिंग डायरेक्टर गौतम किशनचंदानी की यहां इसलिए तारीफ करनी होगी कि उन्होंने फिल्म के हर किरदार के लिए बिल्कुल सटीक कलाकार छांटे हैं। आशीष विद्यार्थी का आना जहां कहानी को पहला किक देता है, वहीं शताफ फिगार का किरदार पूरी फिल्म में एक ऐसा बुलबुला बराबर बनाए रहता है कि जिसे कौन फोड़ेगा, इसी पर दर्शकों का ध्यान अटका रहता है। ललित परिमू भले पहली नजर में पहचान में न आते हों, लेकिन मेहमान कलाकार बन कर आए अतुल कुलकर्णी काम में अतिव्यस्त पत्नी औऱ एक बड़े होते बेटे के पिता के किरदार में अपना असर छोड़ ही जाते हैं। फिल्म में तारीफ करने लायक दो कलाकार और हैं। एक ऑक्टोपस के किरदार में बांग्लादेशी अभिनेत्री अजमेरी हक और दूसरी नवनींद्र बहल। दोनों के किरदार इस फिल्म का टेंट पोल बनाते हैं। और, उनकी असलियत जब सामने आती है तो दर्शक एकबारगी तो चौंक ही जाते हैं।

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खुफिया- अली फजल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ये अली का असली आगाज है

फिल्म ‘खुफिया’ के लीड कलाकारों में तब्बू और वामिका गब्बी के अलावा अली फजल का नाम भी शामिल है। अली फजल की जिस तरह की अदाकारी है, उसे उन्होंने शायद खुद ही कभी गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि वह मौजूदा दौर के तमाम चर्चित कलाकारों से बेहतर कलाकार वह शुरू से रहे हैं। विशाल भारद्वाज ने उन्हें इस किरदार के लिए जिस फिल्म को देखने के बाद चुना, उसका रिलीज होना अभी बाकी है लेकिन फिल्म ‘खुफिया’ में उनका अभिनय देखने के बाद तमाम वो निर्माता भी उनके बारे में जरूर सोचेंगे जिनकी विशलिस्ट में एक खास तरह की कहानियां आने पर सिर्फ आयुष्मान खुराना, विक्की कौशल या वरुण धवन जैसे नाम ही चढ़ पाते हैं। अली फजल की अदाकारी की रेंज युवा संजीव कुमार जैसी है, बस उन्हें जरूरत है विशाल भारद्वाज जैसे कुछ और निर्देशकों की जो उन्हें गन्ने सा निचोड़ कर उसकी राब बना सकें।

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विशाल भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

विशाल भारद्वाज का वनवास पूरा

फिल्म ‘खुफिया’ बनाने में विशाल भारद्वाज ने वे सारी मेहनतें की हैं जो अमूमन अपनी हर फिल्म में करते आए हैं। वह निर्माता भी हैं, लेखक भी हैं, गीतकार भी हैं, संगीतकार भी हैं और इस बार तो गायक भी हैं। राहुल राम से उन्होंने कबीर और रहीम के दोहे गवाए हैं। अरिजीत और सुनिधि को उन्होंने गुलजार के लिखे मौसम के राग दिए हैं। रेखा भारद्वाज तो  अर्धांगिनी ही हैं और हर अरण्य में उनके साथ ही रहती हैं। अरसे बाद विशाल भारद्वाज ने भी हर डिपार्टमेंट में अपना सौ फीसदी देने की कोशिश की है और कोई 14 साल बाद बतौर निर्देशक उनकी तारीफ करते हुए ये कहने में मुझे कोई गुरेज नहीं कि उनका एक रचनाकार के तौर पर पुनर्जनम हो चुका है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई साल की ये बेहतरीन हिंदी फिल्म है और अब आगे कोई दूसरी बड़ी हिंदी फिल्म इस ओटीटी पर बाकी बचे तीन महीनों में आ भी नहीं रही तो इसी को इस ओटीटी की साल की सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का तमगा आसानी से दिया जा सकता है। कुछ तमगे इस फिल्म को इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जब भी बटेंगे, तब भी मिलना पक्का तय है।

सुनिए मशहूर फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज से फिल्म 'खुफिया' के 'खुफिया' किस्से

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