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Film Review: सिनेमा का गुड टच है 'कहानी-2'

Fri, 02 Dec 2016 02:56 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Fri, 02 Dec 2016 02:56 PM IST
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film review of kahani 2

-निर्माताः जयंती लाल गाडा

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-निर्देशकः सुजॉय घोष

-सितारेः विद्या बालन, अर्जुन रामपाल, निशा खन्ना, जुगल हंसराज, मानिनी चड्ढा

रेटिंग ****

नोटबंदी के इन दिनों में अगर आप खुद को सिनेमाघर में जाने से रोके हैं तो ‘कहानी-2: दुर्गा रानी सिंह’ के लिए छूट ले सकते हैं। यह नाममात्र की कहानी नहीं है। यह अपने सस्पेंस, संवेदना और ऐक्टरों के परफॉरमेंस से बांधे रखती है। 2012 में आई सुजॉय-विद्या की निर्देशक-एक्टर जोड़ी की ‘कहानी’ से यह स्वतंत्र है।

मारे यहां देवी दुर्गा को मां कहा गया है। विद्या बालन उसी दुर्गा-नाम- अवतार में हैं, जो यौन उत्पीड़न की शिकार एक बच्ची को जिंदगी देने के लिए जीवन का हर जोखिम उठाती है। फिल्म के पहले हिस्से की कसावट और रफ्तार आपको कुर्सी से हिलने नहीं देती। 

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बच्चों को सिखाएगी गड टच और बैड टच में फर्क

film review of kahani 2
अनदेखे-अनजाने खतरों वाले वातारण में खेलते अपने नन्हें बच्चों को अगर आप ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ का फर्क न समझा पाए हों, तो यह फिल्म मदद करेगी। चाइल्ड एब्यूज को लेकर पहले बनी किसी फिल्म में यह नहीं दिखाया गया है। सिनेमा कैसे जागरूक करते हुए सवालों के जवाब दे सकता है, कहानी-2 इसकी नजीर है।

फिल्म में विद्या और नन्हीं मिनी के बीच बातचीत थोड़ी है परंतु रिश्ता गहरा है। कहानी-2 केंद्रीय विषय पर आने के लिए रहस्य के पर्दे में शुरू होती है। चंदन नगर (पश्चिम बंगाल) में रहने वाली विद्या सिन्हा (विद्या बालन) की बेटी मिनी का अपहरण हो गया है। अपहरणकर्ता के दिए पते पर पहुंचने के लिए बदहवास भागती विद्या का एक कार से एक्सीडेंट हो जाता है। वह कोमा में चली गई है। अब केस सब-इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह (अर्जुन रामपाल) के पास है। क्या मिनी बचेगी? विद्या उसे बचा पाएगी? इंदरजीत सिंह रहस्य के पर्दे हटा पाएगा?

सीट से हिलने नहीं देगा सस्पेंस

film review of kahani 2
फिल्म का कलर-टोन कहानी के अनुसार कुछ गहरा है, जिससे उसमें झांकने की जिज्ञासा बनी रहती है। दूसरे हिस्से में निर्देशक ने जरूर कुछ सिनेमाई छूट ली है परंतु तब तक वह अपनी बात को खूबसूरती से कह चुके होते हैं। फिल्म देखने की वजह कलाकारों का बढ़िया परफॉरमेंस भी है। विद्या ने फिर साबित किया है कि वह बेजोड़ हैं।

उनकी डायरी से उनके दोहरे किरदार की परतें खुलती हैं और वह बिना संवादों के भी निखरते हुए, एकांतप्रिय जटिल महिला के साथ मां के रूप में सामने आती हैं। अर्जुन रामपाल नई ऊर्जा के साथ अभिनय कर हैं। रॉक ऑन-2 के बाद वह यहां फिर प्रभावित करते हैं। सधे-सहज अंदाज में।

इंदरजीत सिंह के मन की दुविधा उसके चलने-फिरने से लेकर चेहरे तक पर दिखती है। अर्जुन की पत्नी की भूमिका में मानिनी चड्ढा डेब्यू फिल्म में मौजूदगी दर्ज कराती हैं। निर्देशक ने हर किरदार का अच्छा इस्तेमाल किया। उनसे अब सवाल होगा कि क्या आगे कहानी-3 भी बनेगी?



क्यों देखेः अच्छी कहानी और एक्टरों के बढ़िया परफॉरमेंस के लिए

 
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