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जैकपॉटः जिस्म से आगे निकलीं सनी लियोनी?

Sat, 14 Dec 2013 01:56 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई Updated Sat, 14 Dec 2013 01:56 PM IST
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film review of jackpot

सनी लियोनी की दूसरी फिल्म जैकपॉट रिलीज हो गई है। जानिए अंग प्रदर्शन के मामले में सनी लियोनी पिछली फिल्म से आगे निकल पाई हैं?

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जैकपॉट देखने के लिए जरूरी नहीं कि आपको जुआ खेलना आए। परंतु एक फिल्म में जरूर इतनी ताकत होनी चाहिए कि वह अनाड़ी आदमी को भी समझा दे कि पर्दे पर क्या चल रहा है। निर्देशक कैजाद गुस्ताद इस मामले में पूरी तरह नाकाम हैं। पहली सुपरफ्लॉप फिल्म ‘बूम’ से पहचाने जाने वाले कैजाद की यह दूसरी फिल्म है। जो पहली फिल्म के रास्ते पर ही चलती मालूम पड़ती है।

फिल्म में कहानी तो उलझाने वाली है ही, निर्देशक ने भी उसे जिस ढंग से पेश किया है उससे वह और उबाऊ मालूम पड़ने लगती है। कुछ दर्शक तो इसे झेल नहीं पाते और बीच में ही उठ कर चल देते हैं।
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यहां गोवा का एक गांव है। जिसमें एक कैसिनो (जुआघर) है। कैसिनो का एक बॉस (नसीरूद्दीन शाह) है। गांव वाले मिल कर बॉस को ठगने के चक्कर में हैं। रकम है... पांच करोड़! सब क्यों बॉस के पीछे पड़े हैं? उसने क्या बिगाड़ा है? क्या गांव के लोगों और बॉस में पुराने दुश्मनी है? वगैरह-वगैरह। कई ऐसे सवाल हैं जिनका कहानी में कोई जवाब नहीं है।
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रोमांस का कुछ अता-पता नहीं

इससे भी बढ़ कर यह कि फिल्म में हीरो (सचिन जोशी) और हीरोइन (सनी लियोनी) की लव स्टोरी में कोई दम नहीं है। निर्देशक यह बता ही नहीं पता कि क्या वाकई उनमें लव है? या बस खेल चल रहा है। हीरो-हीरोइन अपने दोस्तों के साथ मिलकर 250 एकड़ के एक मैदान पर झूठा बोर्ड लाग के बॉस को सपना दिखाते हैं। वह सिर्फ दस करोड़ में ये खरीद सकता है।

बॉस झांसे में आ जाता है। फिर कैसे वह जाल में फंसता है, यही फिल्म में बहुत बिखरे अंदाज में दिखाया गया है। दर्शक कहानी का मजा नहीं ले पाता क्योंकि खुद उसे बिखरे सिरों को जोड़ने में सिर खपाते रहना पड़ता है।

नसीर की श्रेणी के अभिनेता कई फिल्में पैसों की खातिर करते हैं। यह उसी श्रेणी की फिल्म है। जिसके प्रमोशन में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया और न भविष्य में इस पर बात करना चाहेंगे। जूट की रसिस्यों-से बालों वाला एक गंदा गेट-अप उनके सिर यहां मढ़ा गया है। वहीं सचिन जोशी का भविष्य इस फिल्म को देख कर भी उज्ज्वल नहीं लगता।

वहीं सनी लियोनी ने फिल्म में रत्ती भर भी ऐसा कुछ नहीं किया, जो उनकी ख्याति के अनुरूप हो। फिल्म उनके बॉलीवुड कैरियर को नुकसान ही पहुंचाएगी। अगर आप सनी के लिए फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो ठहर जाइए।


सनी अब इस बात का शोक मनाएंगी कि ‘जिस्म-2’ के बाद ‘रागिनी एमएमएस-2’ उनकी दूसरी फिल्म क्यों नहीं हुई। खैर, यह ऐसा जैकपॉट है जिसमें सब हार गए हैं। निर्माता, निर्देशक, ऐक्टर। कम से कम दर्शक यह कर सकते हैं कि अपनी मेहनत से कमाए पैसे टिकट खिड़की पर न हारें।

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