दिलीप कुमार-मधुबाला ने क्यों बदले नाम, ये है असली वजह
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शाहरुख खान के देश में बढ़ रही असहिष्णुता के बयान के बाद जबर्दस्त आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कैलाश विजयवर्गीय और मीनाक्षी लेखी के बाद भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश में असहिष्णुता अब नहीं है, बल्कि कांग्रेस के जमाने मे थी।
उन्होंने फिल्मी सितारों से जोड़ते हुए इसके लिए दिलीप कुमार का नाम लिया। उनका कहना है कि देश में असहिष्णुता के कारण युसूफ खान को अपना नाम दिलीप कुमार रखना पड़ा। साथ ही उन्होंने मधुबाला का भी जिक्र किया। हालांकि वो बचपन का नाम मधुबाला की जगह मीना कुमारी का ले गए।
शाहनवाज के इस बयान में और भी कई बातें सच्चाई के करीब नहीं हैं। दरअसल बॉलीवुड में नाम बदलने का चलन तभी से है, जब से बॉलीवुड है। यहां तक कि जब कांग्रेस नहीं अंग्रेजों के शासन हुआ करता था। हम आपको बता रहे हैं कि दरअसल बॉलीवुड सितारों के नाम बदलने की असल वजह रही क्या हैं?
दिलीप कुमार ने खुद ही चुना अपने लिए नाम
शाहनवाज हुसैन ने दिलीप कुमार के बारे में जो कहा वो पूरा ही गलत है। दिलीप कुमार ने 1944 में बाम्बे टाकीज की फिल्म ज्वार भाटा से करियर की शुरुआत की। तब कांग्रेस नहीं अंग्रेजों का शासन था। युसूफ से दिलीप कुमार बनने के लिए अहिष्णुता की बात पहली बार शाहनवाज हुसैन ने ही बताई है। इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है।
दरअसल दिलीप कुमार के पिता को ये पसंद नहीं था, कि उनका बेटा फिल्मों में काम करे। ऐसे में यूसुफ खुद भी इस नाम से फिल्मों में नहीं आना चाहते थे। वहीं दूसरी ओर देविका रानी जिन्होंने अपनी फिल्म के लिए यूसुफ को पसंद किया था, वो भी इस नाम के साथ खुश नहीं थीं। उन्हें लगता था कि ये नाम बहुत आकर्षित नहीं कर रहा है।
ऐसे में युसूफ तो अपना नाम बदलने के लिए तीन विकल्प मिले, जहांगीर, वासुदेव और दिलीप कुमार। खुद यूसुफ ने अपने लिए नाम चुना दिलीप कुमार।
महजबीन बानो से बेबी मीना फिर मीना कुमारी
मीना कुमारी का बचपन में नाम महजबीन बानो था। वो सिर्फ छह साल की उम्र में फिल्म 'लैदरफेस' में दिखीं। 1939 में आई इस फिल्म में उनको महजबीन की जगह नाम मिला बेबी मीना। लेकिन जब मीना हीरोइन बनीं तो हो गईं मीना कुमारी।
मधुबाला का नाम भी बचपन में मुमताज बेगम देहलवी था। उनका नाम बदलने का श्रेय भी देविका रानी को ही दिया जाता है।
देविका का मानना था, कि मुमताज बेगम की जगह अगर हीरोइन नाम मधुबाला होगा तो दर्शकों के बीच ज्यादा उत्सुकता होगी। दोनों के ही नाम को बदलने की वजह उनका मजहब नहीं रहा।
कॉमेडियन का नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी तो जमता नहीं
बॉलीवुड सितारों के नाम फिल्म में उनके रोल को देखते हुए भी दिए जाते रहे हैं। एक बस कंडक्टर से फिल्मों में कॉमेडी की पहचान बन जाने वाले जॉनी वाकर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी नाम के शख्स को बस में मस्ती के साथ टिकट बेचते देख बलराज साहनी बेहद प्रभावित हुए और उन्हें मिलवा दिया गुरुदत्त से।
गुरुदत्त को काजी पसंद तो आए लेकिन उन्हें ये महसूस हुआ कि क्या लोग ये पचा पाएंगे कि जो आदमी उन्हें हंसा रहा है, उसका नाम ऐसा भारी भरकम हो, बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी। बस गुरुदत्त ने बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी को दूसरा नाम दे दिया और काजी बन गए जॉनी वाकर।
धर्म से नहीं जुड़ा है नाम बदलने का मामला
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने दिलीप कुमार और मधुबाला के नाम बदलने की वजह भले ही उनका मुसलमान होने को कहा हो, लेकिन ये फिल्मी दुनिया का सच नहीं है। हर धर्म के लोगों ने फिल्मों में किस्मत आजमाने के लिए नाम बदले हैं।
बॉलीवुड के शहशांह अमिताभ बच्च्न का असला नाम इंकलाब श्रीवास्तव है। अब फिल्म का हीरो इंकलाब होगा तो दर्शक भी सोचेंगे कि ये कैसा हीरो है। सलमान खान का नाम अब्दुल रशीद है, 25 साल के स्मार्ट सलमान इस नाम से करियर शुरु करते तो भला कैसे उन्हें चाहने वाले देखते।
अक्षय कुमार (राजीव भाटिया), अजय देवगन (विशाल देवगन), रजनीकांत(शिवाजी राव गायकवाड़), तब्बू(तबस्सुम हाशमी), रेखा (भानुरेखा गणेशन), गुरू दत्त (वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण) जैसे नामों की लंबी फेहरिस्त है। जो अपने असली नामों से नहीं बल्कि बाद फिल्मी दुनिया के दिए नामों से पहचाने गए।
ये साफ है कि बॉलीवुड में नाम बदलने की परंपरा किसी धर्म की वजह से नहीं है, ना ही इसकी वजह कोई सरकार या फिर देश की असहिष्णुता नहीं है। बल्कि बॉलीवुड कलाकारों के नाम निर्माता या फिर खुद सितारे इस बात को ध्यान में रखकर बदलते रहे हैं कि कौन सा नाम उन्हें फिल्मी दुनिया में उन्हें पहचान दिला सकता है, या कहिए कि कौन सा नाम ज्यादा बिकने वाला है।