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Digital Review: तलाश और ब्रीद के कॉकटेल का 'इन्वेस्टिगेशन'
Sun, 06 Jan 2019 04:22 PM IST
विजय जैन
मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 06 Jan 2019 04:22 PM IST
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डिजिटल रिव्यू – इन्वेस्टिगेशन (वेब सीरीज)
कलाकार – हितेन तेजवानी, लीना जुमानी, प्रकाश रामचंदानी, आर्यमान सेठ। निर्देशक – नितेश सिंह
ओटीटी – ईरॉस नाउ
रेटिंग - **
मुंबई पुलिस के एसीपी का एक तयशुदा कैरीकेचर बनता जा रहा है हिंदी मनोरंजन जगत में। तलाश में आमिर खान जैसी मूंछे होनी चाहिए। ब्रीद के पुलिसवाले की तरह उसे शराब की लत होनी चाहिए। बीवी से पंगा होना चाहिए और कमिश्नर का किसी खास केस के जल्द से जल्द खुलासे का दबाव होना चाहिए। कहानी शुरू। इस बार नाम है एसीपी विशाल और किस्सा है एक छात्र नेता की हत्या का।
वेब सीरीज के दौर में ईरॉस नाउ ने क्विकीज नाम से छोटे छोटे एपीसोड्स की सीरीज बनानी शुरू की हैं। हितेन तेजवानी को लेकर बनाई गई सीरीज इन्वेस्टिगेशन के नौ एपीसोड रिलीज किए गए हैं, हर एपीसोड की औसत अवधि करीब 15 मिनट की है। कोशिश ये है कि जो दर्शक 40-45 मिनट के एपीसोड देखने में दिक्कत महसूस करते हों, उन्हें कम अवधि के एपोसोड्स दिखाकर बांधा जाए। लेकिन, दिक्कत यहां ये है कि ये 15 मिनट के एपीसोड भी बोरिंग हैं।
कोई भी वेब सीरीज हो, वह अगर पहले दो एपीसोड में दर्शकों को नहीं बांध पाता ही तो आगे के एपीसोड तक किसी दर्शक का जाना मुश्किल है और, मुश्किल इस सीरीज के साथ ये है कि वर्तमान और अतीत में झूलती इस कहानी में कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है। कॉन्टीन्यूटी का हाल ये है कि एसीपी की पत्नी रात में पार्टी करने किसी और ड्रेस में जाती है, लौटती है तो ड्रेस चेंज हो चुकी होती है। हर दूसरे हिंदी संवाद के बाद एक संवाद मराठी में है। हितेन तेजवानी का गेटअप अगर तलाश के आमिर खान की याद दिलाता है तो उनके हाव भाव और शराब पीने की आदतें बीते साल की हिट सीरीज ब्रीद में अमित साध के किरदार की कॉपी लगता है। इस क्विकी में दम नहीं है।
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कलाकार – हितेन तेजवानी, लीना जुमानी, प्रकाश रामचंदानी, आर्यमान सेठ। निर्देशक – नितेश सिंह
ओटीटी – ईरॉस नाउ
रेटिंग - **
मुंबई पुलिस के एसीपी का एक तयशुदा कैरीकेचर बनता जा रहा है हिंदी मनोरंजन जगत में। तलाश में आमिर खान जैसी मूंछे होनी चाहिए। ब्रीद के पुलिसवाले की तरह उसे शराब की लत होनी चाहिए। बीवी से पंगा होना चाहिए और कमिश्नर का किसी खास केस के जल्द से जल्द खुलासे का दबाव होना चाहिए। कहानी शुरू। इस बार नाम है एसीपी विशाल और किस्सा है एक छात्र नेता की हत्या का।
वेब सीरीज के दौर में ईरॉस नाउ ने क्विकीज नाम से छोटे छोटे एपीसोड्स की सीरीज बनानी शुरू की हैं। हितेन तेजवानी को लेकर बनाई गई सीरीज इन्वेस्टिगेशन के नौ एपीसोड रिलीज किए गए हैं, हर एपीसोड की औसत अवधि करीब 15 मिनट की है। कोशिश ये है कि जो दर्शक 40-45 मिनट के एपीसोड देखने में दिक्कत महसूस करते हों, उन्हें कम अवधि के एपोसोड्स दिखाकर बांधा जाए। लेकिन, दिक्कत यहां ये है कि ये 15 मिनट के एपीसोड भी बोरिंग हैं।
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कोई भी वेब सीरीज हो, वह अगर पहले दो एपीसोड में दर्शकों को नहीं बांध पाता ही तो आगे के एपीसोड तक किसी दर्शक का जाना मुश्किल है और, मुश्किल इस सीरीज के साथ ये है कि वर्तमान और अतीत में झूलती इस कहानी में कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है। कॉन्टीन्यूटी का हाल ये है कि एसीपी की पत्नी रात में पार्टी करने किसी और ड्रेस में जाती है, लौटती है तो ड्रेस चेंज हो चुकी होती है। हर दूसरे हिंदी संवाद के बाद एक संवाद मराठी में है। हितेन तेजवानी का गेटअप अगर तलाश के आमिर खान की याद दिलाता है तो उनके हाव भाव और शराब पीने की आदतें बीते साल की हिट सीरीज ब्रीद में अमित साध के किरदार की कॉपी लगता है। इस क्विकी में दम नहीं है।
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