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सेंसर बोर्ड का प्रमुख होगा 'मोदी का आदमी'?

Wed, 05 Nov 2014 01:11 PM IST
Updated Wed, 05 Nov 2014 01:11 PM IST
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Suresh Oberoi Censor Board Chairperson?

सेंसर बोर्ड के मुखिया का पद पिछले कुछ समय से खाली चल रहा है। सेंसर बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार के कथित तौर पर रिश्वत लिए जाने के बाद यह पद खाली चल रहा है। अगस्त के बाद से यह पद खाली है और अब इसे भरने की कवायद शुरू हो गई है।

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सूत्रों के अनुसार जो नाम अभी तक सामने आए हैं उनमें सबसे ज्यादा संभावनाएं अभिनेता सुरेश ओबेरॉय की हैं। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में सुरेश खुद को इस पद की रेस में सबसे आगे होने की बात को नकारते हैं। उनके अनुसार किसी विश्वस्त सूत्र से उन्हें यह जानकारी नहीं मिली है। यह खबर सिर्फ मीडिया में हैं। लेकिन क्या यह सच है?
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इस रेस के अलावा दूसरा सबसे बड़ा नाम नितिश भारद्वाज का है। नितिन भारद्वाज महाभारत में कृष्ण की भूमिकाएं करने के बाद चर्चाओं में आए थे। इसके बाद नितिश सक्रिय रूप से बीजेपी के कार्यकर्ता रहे हैं।
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एक और नाम गजेंद्र सिंह चौहान का सामने आया है। गजेंद्र सिंह चौहान भी महाभारत धारावाहिक में युधिष्ठर की भूमिका निभा चुके हैं। गजेंद्र का भी भारतीय जनता पार्टी के प्रति लगाव जगजाहिर रहा है।

मोदी की पसंद का होगा आदमी

Suresh Oberoi Censor Board Chairperson?

इस पद के लिए सुरेश ओबेरॉय का नाम इसलिए भी सबसे मजबूत माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से सुरेश ओबेरॉय के साथ विवेक ओबेरॉय की सक्रियता बीजेपी के प्रति लगातार दिख रही है। लोकसभा चुनाव में विवेक ओबेरॉय ने पार्टी के पक्ष में प्रचार किया। इसके बाद वह जब तक मोदी की सार्वजनिक तारीफ करते हुए दिखे।

हाल ही महाराष्ट के नवनियुक्त मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस के शपथ ग्रहण समारोह में विवेक ओबेरॉय ने खुद को बीजेपी कार्यकर्ता और देंवेद्र का करीबी दिखाने की कोशिश की। अब जब सुरेश ओबेरॉय का नाम सेंसर बोर्ड के प्रमुख के तौर पर सामने आया है तब विवेक की इन सारी गतिविधियों को एक प्लानिंग समझा जा रहा है।

माना जा रहा है कि सुरेश ओबेरॉय खुद को भाजपा और मोदी के प्रति निष्ठावान दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि सुरेश को भी मालूम है कि मोदी की सहमति से ही यह पद चुना जाना है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पद

Suresh Oberoi Censor Board Chairperson?

भारतीय जनता पार्टी पर यह आरोप हमेशा लगाया जाता रहा है कि वह जनमाध्यमों में व‌‌ह अपनी कथित हिंदुवादी सोच को आगे रखने का प्रयास करती है। पार्टी के राजनीतिक एजेंडा को देश की संस्कृति बनाने में इन माध्यमों की बड़ी भूमिका होती है।

चूंकि फिल्में आमजन की सोच को बहुत प्रभावित करती हैं ऐसे में यह जरूरी है कि सेंसर बोर्ड के चीफ के तौर पर ऐसा व्यक्ति हो जो भाजपा की इस सोच को आगे बढ़ा सके। वैसे भी मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद फिल्मों में कट लगाने की खबरों में खासा इजाफा हुआ है।

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