B'day spcl: धर्मेंद्र की बेवफाई से टूटी ये हीरोइन, बन गई ट्रेजडी क्वीन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
90 फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से धमाल मचाने वाली मीना कुमारी को टेजडी क्वीन के नाम से हर कोई जानता है, लेकिन मीना कुमारी के साथ सिर्फ सिल्वर सक्रीन पर ही ट्रेजडी नहीं घटीं, सिनेमा से बाहर उनकी असल जिंदगी भी त्रासदी से भरी थी।
बॉलीवुड समेत दुनिया भर में नाम और शौहरत कमाने वाली ये हसीन अदाकारा अपनी उम्र के 40 बसंत ही जी सकी। लेकिन उस दौर में जिन फिल्मों में मीना कुमारी ने हाथ आजमाया, उनमें ज्यादातर सुपरहिट रहीं।
मीना को रुपहले पर्दे पर तो सफलता मिल चुकी थी। लेकिन निजी जिंदगी दुखों से भरी रही। पति, प्रेमी और परिवार किसी ने नहीं दिया इस ट्रेजडी क्वीन का साथ।
महजबीन बानों की पहली ट्रेजेडी, जो पैदा होते ही घटी
मीना कुमारी के साथ ट्रेजेडी तो पैदा होने के साथ ही शुरू हो गई थी, घर में पहले से दो लड़कियों की वजह से जब नन्हीं मीना को उसके पिता अनाथालय में छोड़ आए थे। लेकिन मां के लगातार रोने की वजह से कुछ घंटों बाद मीना को वापस घर लाया गया।
कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी का असली नाम महजबीन बानो था। नन्हीं महजबीन जब महज सात साल की थी तो उसके पिता उसे फिल्मों में ले आए। महजबीन ने फिल्मों में काम करने से मना कर दिया।
उसने कहा कि वो स्कूल जाना चाहती है। लेकिन उसके पिता अली बख्श ने उसकी एक न सुनी। पिता अली बख्श भी रंगमंच से जुड़े थे और बाद में कुछ फिल्मों में भी काम किया।
जल्द ही परिवार के सारे खर्च का बोझ मीना कुमारी के कंधों पर ही आ पड़ा। परिवार पूरी तरह उसी पर निर्भर करने लगा और मीना को जल्द ही मजबूरी में फिल्मों में काम करने के लिए राजी होना पड़ा।
मीना से औलाद नहीं चाहते थे पति कमाल अमरोही
साल 1952 में अपनी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी को शादीशुदा फिल्म डायरेक्टर कमाल अमरोही से इश्क हो गया। कमाल अमरोही उम्र में मीना से 15 साल बड़े थे।
लेकिन दोनों का इश्क परवान चढ़ा और दोनों ने शादी करली। अमरोही से अफेयर के दौरान मीना कुमारी ने अपनी एक शायरी में लिखा, ''दिल सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली''।
ऐसा कहा जाता है कि कमाल अमरोही मीना कुमारी से कोई औलाद नहीं चाहते थे। अमरोही ने अपनी पहली बीवी के बेटे ताजदार का पालना पोषण किया। जो बाद में मीना कुमारी से खूब हिल-मिल गया था।
मीना कुमारी और कमाल अमरोही, अपने दौर में दोनों ने सफलता पाई लेकिन, कहते हैं कि सफलता अकेले नहीं आती। यही मीना और अमरोही के साथ हुआ। एक साथ सफलता के शीर्ष पर होने के कारण धीरे-धीरे मीना कुमारी और कमाल अमरोही में अनबन होने लगी।
मीना की पूरी कमाई कमाल अपने पास रख लेते थे। मीना को अपने खर्च के लिए अमरोही से पैसे मांगने पड़ते थे। दोनों का ईगो एक दूसरे के आड़े आ रहा था। साल 1960 में दोनों ने अलग अलग रहना पसंद किया और बाद में तल्खी इतनी बढ़ी कि साल 1964 में दोनों का तलाक हो गया।
शराब को लगाया गले
तलाक का सदमा मीना बर्दाश्त नहीं कर सकीं और पति के गम को भुलाने के लिए शराब को गले लगा लिया। तलाक के बाद मीना ने अपनी एक शायरी में लिखा था, ''तलाक तो दे रहे हो नजर-ए-कहर के साथ, जवानी भी मेरी लौटा दो मेहर के साथ''।
कुछ अर्से बाद मीना और अमरोही ने दोबारा शादी की। लेकिन तब तक मीना को शराब की लत लग चुकी थी। मीना हमेशा शराब के नशे में चूर रहती थीं।
अपनी एक शायरी में कमाल अमरोही से गमजदा मीना ने लिखा था, ''तुम क्या करोगे सुनकर मुझसे मेरी कहानी, बे लुत्फ जिंदगी के किस्से हैं फीके-फीके''।
धर्मेंद्र से दिल लगाया पर मिला धोखा
कुछ फिल्म जानकारों की मानें तो कमाल अमरोही से मीना के तलाक की वजह अभिनेता धर्मेंद्र थे। धर्मेंद्र ने जब फिल्मों में एंट्री की तो शुरुआत में उन्हें मीना कुमारी की फिल्मों में काम करने का मौका मिला।
धर्मेंद्र और मीना दोनों पहले से शादीशुदा थे लेकिन फिर भी दोनों में नजदीकियां पनपने लगीं। अब मीना को धर्मेंद्र के रूप में अपना गम को बांटने के लिए एक साथी मिल गया था।
करीब तीन साल दोनों का अफेयर चला। धर्मेंद्र को सफलता मिलने लगी थी और तब तक फिल्म इंडस्ट्री में और कई नई हीरोइनों के आ जाने से धर्मेंद्र उनकी तरफ आकर्षित होने लगे। और आखिरकार वही हुआ, जिसका अंदेशा था। मीना कुमारी को उनसे छोटी उम्र के उनके प्रेमी धर्मेद्र से बेवफाई मिली।
मुफलिसी में कहा दुनिया को अलविदा
लगातार पति, प्रेमी और परिवार मिले गमों के कारण मीना कुमारी टूटकर बिखर गईं। 31 मार्च 1972 को लीवर की बीमारी के कारण रुपहले पर्दे की इस हसीन और कामयाब अदाकारा ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
मीना कुमारी का जन्म बेहद गरीबी में हुआ था और मौत भी मुफिलिसी में मिली। लाखों कमाने वाली मीना के पास अपने आखिरी दिनों में एक फ्लैट और एक गाड़ी के सिवाय कुछ भी नहीं था। मीना का इलाज जिस अस्पताल में चला, उसके बिल का पैसा भी नहीं भरा गया था।
एक अगस्त 1932 को मुंबई में जन्मीं मीना को अपने अभिनय सफर में चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। ये फिलमें थीं बैजू बावरा, परिणीता, साहब बीबी और गुलाम और काजल। मीना गजब की शायर और कवियित्री थीं। उनकी लिखी कुछ उर्दू कविताएं नाज के नाम से बाद में छपीं।