जब कल्कि का समलैंगिकता और मुंबई की सच्चाई से हुआ सामना
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अभिनेत्री कल्कि कोचलीन को मुंबई में सात साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक वो यहां के लोगों को समझ नहीं पाई हैं। कल्कि और अनुराग कश्यप अब एक-दूसरे से अलग हो गए हैं।
इसके बाद जब कल्कि को अपने लिए अलग घर ढूंढ़ना पड़ा और तभी जो हुआ उसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। कल्कि कहती हैं कि वो जब सात साल पहले मुंबई आई थी तब इस शहर में घर किराये पर लेना इतना मुश्किल नहीं था जितना अब हो रहा है।
कल्कि के अनुसार ''अकेला आदमी हो या अकेली औरत, किसी को भी आसानी से किराये पर कोई नहीं रखता। कल्कि को इससे भी ज्यादा हैरानी एक और बात को जान कर हुई।
हिंदु और मुस्लिम की बिल्डिंग हैं अलग-अलग
कल्कि को अचंभा हुआ ये जानकर कि इस शहर में हिंदु और मुस्लिमों की बिल्डिगें अलग-अलग हैं।"वे कहती हैं, "मुंबई में कहीं हिंदू तो कहीं मुस्लिम बिल्डिंग हैं और तो और शुद्ध शाकाहारी लोगों की अलग बिल्डिंग हैं।
''कल्कि अचरज से कहती हैं ''सब इंसान हैं, तो फिर क्यों हमारी सोच पिछड़ती जा रही हैं ?।"लड़कों से सवाल क्यों नहीं पूछे जाते? दीपिका पादुकोण के नए वीडियो 'माई चॉइस' पर कल्कि कहती हैं "मुझे दीपिका पादुकोण का वीडियो 'मेरी मर्ज़ी' बहुत पसंद आया।
"वे कहती हैं, "मैं बहुत खुश हूँ कि इस तरह का वीडियो बनाया लेकिन लोगों ने इसे औरत बनाम आदमी का मुद्दा बना दिया हैं जो ऐसा नहीं होना चाहिए था। लड़के जो भी करें हम सवाल नहीं पूछ सकते।"
उन्होंने कहा, "बॉलीवुड हो या हॉलीवुड महिलाओं को पुरुष कलाकारों सा पैसा नहीं मिलता, जबकि फ़िल्मों में उनका काम भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं।"
दया नहीं इज्ज़त चाहिए'
अपनी नई फ़िल्म 'मार्गरिटा विथ ए स्ट्रॉ' के बारे में कल्कि का कहना है कि "अपने आप को परखने के लिए मैंने यह फ़िल्म की।"
शोनाली बोस द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में कल्कि एक ऐसी भारतीय महिला का क़िरदार निभा रही हैं जो दिमागी लकवे से पीड़ित है।
फ़िल्म में असमर्थ लोगों की सेक्स लाइफ़ की भी बात की गई है। इस भूमिका के लिए कल्कि ने व्हीलचेयर पर छह महीने तक रोज़ दो घंटे गुजारे हैं, ताकि वो किरदार को ठीक तरह से अदा कर सकें। कल्कि कहती हैं, "विकलांग लोगों को आरक्षण या छूट नहीं, सम्मान चाहिए और भारत में विकलांग लोगों को इज्ज़त ही नहीं दी जाती है।
थिएटर, मॉल हो या स्कूल यहाँ सुविधाएं ही नहीं हैं, जैसे की बाहर देशों में होती हैं।"कल्कि का मानना है, "आज भारत में आठ प्रतिशत लोग विकलांग हैं, लेकिन ऐसे लोग बहुत कम ही सड़कों पर दिखते हैं। क्योंकि सड़को पर रैंप तक नहीं हैं उनके चलने के लिए। बाकी सुविधा तो बहुत दूर की बात है।"
कल्कि की फिल्म के सपोर्ट में आई उनकी सह अभिनेत्री
सेंसर बोर्ड की सख़्ती से निर्देशक, निर्माता और कलाकार भी परेशान हैं। दक्षिण की फ़िल्मों में काम कर रही अभिनेत्री रेवती ने भी अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। रेवती अपनी फ़िल्म ‘मार्गरिटा विद ए स्ट्रॉ’ के लिए इन दिनों मुंबई में हैं।
रेवती का कहना है कि सेंसर बोर्ड अभी एक बच्चे की तरह बर्ताव कर रहा हैं।उनका कहना है कि यह ऐसा ही है जैसे हम जब किसी बच्चे को बिजली का तार छूने से रोकते हैं। उसके बावजूद बच्चा वही काम करता है, जिसके लिए हम उसे मना करते हैं।
रेवती कहती हैं, "कुछ ऐसा ही हाल सेंसर बोर्ड का भी है, ये मत करो, वो मत करो। इतनी रोक-टोक। सेंसर बोर्ड को ये समझना होगा कि अगर कोई दृश्य या डायलॉग समाज को नुकसान पहुँचा रहे हैं तो उसे सेंसर करना चाहिए। ना की किसी और चीज़ को।"
उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया हैं। इसलिए सेंसर बोर्ड को 'कपटी नहीं, सच्चा होना चाहिए।'
समलैंगिकता का विरोध क्यों?
मार्गरिटा विद स्ट्रॉ में समलैंगिक रिश्तों को दिखाया गया है। क्या इस पर भी कुछ लोग फ़िल्म का विरोध कर सकते हैं, रेवती कहती हैं, “रामायण, महाभारत से लेकर तमाम धार्मिक ग्रंथों में लैंगिकता और समलैंगिकता का उल्लेख है।
ये किताबें हम सभी के घरों में हैं, ऐसे में समझ में नहीं आता हमारी सोच ऐसी क्यों है।” मार्गरिटा विद् स्ट्रॉ में रेवती के साथ अभिनेत्री कल्कि कोचलीन भी हैं। यह फ़िल्म 17 अप्रैल को रिलीज़ हो रही है।