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#MeToo कैंपेन से हिला बॉलीवुड, एक-दूसरे को बचाने के लिए साध रहे हैं चुप्पी

Sun, 14 Oct 2018 02:08 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 14 Oct 2018 02:08 PM IST
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Bollywood shake up after MeToo campaign Silence to save one another
बॉलीवुड में आजकल पार्टियों की चमक कम और #MeToo की चर्चा ज्यादा है। बीते दस दिन में कुछ दिग्गजों ने #MeToo के समर्थ में जैसी सक्रियता दिखाई उस पर अभिनेत्री अदिति राव हैदरी ने खरा-खरा ट्वीट किया, ‘जो लोग बड़े उत्पीड़न के दोषी हैं वो #MeToo मूवमेंट में ज्ञान बांट रहे हैं।’
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लेकिन अब जब बड़े कद वालों का नाम उत्पीड़न में आने लगा तो #MeToo के समर्थन में खड़े दिग्गज चुप्पी साधने लगे हैं। उधर, कास्टिंग काउच की शिकायतों पर ठंडे रहने वाले निर्माता-निर्देशकों के लिए संगठन यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए कमेटियां बनाने लगे हैं। फिल्म कंपनियां भी यौन उत्पीड़न रोकने के लिए गाइडलाइन्स बना रही हैं।
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Bollywood shake up after MeToo campaign Silence to save one another
इंडस्ट्री में फिलहाल हमाम में सब नंगे जैसी स्थिति है। #MeToo को समर्थन देने से ज्यादा अब लोग अपने संबंध बचाने में लगे हैं। निर्देशक सुभाष कपूर के साथ फिल्म 'मुगल' न करने की घोषणा करने वाले आमिर खान और एकता कपूर तब चुप हो गईं जब फिल्म के प्रोड्यूसर टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार पर आरोप लगा। प्रोड्यूसर करीम मोरानी पर रेप केस करने वाली दिल्ली की पीड़ित महिला सामने आई तो किसी बॉलीवुड सेलेब्रिटी ने कुछ नहीं कहा।

बॉलीवुड के नंबर वन कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगने पर बड़े नाम चुप हैं। विकास बहल के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले अनुराग कश्यप और उनके साथियों ने जैसे ही अपने गुट के लेखक वरुण ग्रोवर का नाम आया तो चुप्पी साध ली।

Bollywood shake up after MeToo campaign Silence to save one another
इंडस्ट्री के वर्तमान माहौल में कोई खुल कर बोलने को राजी नहीं है। सितारों के मैनेजर और पीआर इंडस्ट्री के लोग हवा का रुख भांप रहे हैं। सितारों के करीब रहने वाले एक शख्स ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि चुनिंदा चार-पांच बड़े नाम छोड़ दें तो ऐसा कोई दिग्गज नहीं, जो #MeToo में नहीं फंस सकता। इस सूत्र के मुताबिक बॉलीवुड में ज्यादातर बड़े लोग चुप रहना चाहते हैं।

सबको इंतजार है कि #MeToo कब खत्म होगा। इंडस्ट्री के एक पुराने व्यक्ति ने कहा है कि यहां सदा आपसी रजामंदी से काम चलता रहा। लेकिन जब 1990 के दशक में टीवी के प्राइवेट चैनल आए और साल 2000 के बाद बॉलीवुड में कॉरपोरेट कंपनियां आईं तो महिलाओं का शोषण बढ़ गया।
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