फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Anil Sharma exclusive interview

'मेरे पिता ने मुझे लॉन्च किया, मैं अपने बेटे को लेकर फिल्म बनाऊंगा'

Thu, 14 Jul 2016 01:06 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 14 Jul 2016 01:06 PM IST
विज्ञापन
Anil Sharma exclusive interview

निर्देशक अनिल शर्मा की गदर भारतीय सिनेमा की सबसे कामयाब फिल्मों में है और वह उनकी ठोस पहचान है। वह अपनी नई फिल्म की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिसमें बेटे उत्कर्ष को लॉन्च करेंगे। अनिल शर्मा से उनके जीवन और करिअर को लेकर बातचीत की रवि बुले ने।

विज्ञापन


आपके दादाजी मथुरा में प्रसिद्ध ज्योतिषी थे। आपका बचपन वहां बीता। फिल्मों का शौक कैसे हुआ?
मथुरा में हम होली वाली गली यानी होली गेट इलाके के रहने वाले हैं। मेरे दादाजी पं.डालचंद जोशी जी की चारों तरफ ज्योतिषी के रूप में बहुत ख्याति थी। जब मैं छोटा था तो वहां हमारे घर का माहौल बहुत कमाल का होता था। एक ओर तमाम पंडित, ज्ञानी-ध्यानी आते। खूब कथा-कहानी होती। बारह-तेरह साल का होते होते मुझे कई कहानियां, पौराणिक कथाएं कंठस्थ हो गई थीं। वहीं  पिताजी (के.सी. शर्मा) के बंबई में रहने के कारण फिल्मी लोग भी आते थे। उन्हें देखते-देखते फिल्मों का शौक लग गया। दादीजी खूब प्यार करते थे और उदार थे। वह मुझे गाने सुनने, फिल्में देखने की छूट देते थे। होली वाली गली के बगल में राजकमल टॉकीज था, वहीं भाग-भाग कर फिल्में देखते थे। वह टॉकीज अब रहा नहीं।
विज्ञापन


पिताजी का मुंबई कनेक्शन क्या था?
वह भी ज्योतिषी थे मगर उन्हें फिल्मों का शौक था। गीता दत्त जी उन्हें बॉम्बे लेकर आई थीं। पिताजी बहुत हैंडसम थे और गीता जी चाहती थीं कि वह हीरो बनें, ऐक्टिंग करें। परंतु पिताजी को प्रोड्यूसर बनना था। उन्होंने बाद में एक फिल्म बनाई, मीरा श्याम।

विज्ञापन
विज्ञापन

मैं भी शुरू में हीरो बनना चाहता था

Anil Sharma exclusive interview

क्या आप भी शुरू में हीरो बनना चाहते थे?
बिल्कुल। जब सिनेमा की बात आती है तो हर कोई ऐसा ही सोचता है। परंतु उस समय यह बात जुबान पर नहीं ला सकते थे। तब तो सबसे डॉक्टर बनने की बात कहते थे। जब मथुरा से जब मैं मुंबई आया तो जीवन को देखने का नजरिया काफी बदल गया। मेरा लिखा और तैयार एक नाटक देखने के बाद कवि नरेंद्र शर्मा जी ने पिताजी से कहा था कि इसे फिल्मों में भेजो।

फिल्मों में निर्देशन से पहले आपने कहां ट्रेनिंग ली?
पिताजी ने मुझे बीआर फिल्म्स में भेजा। उस समय भी इतनी भीड़ थी कि बीआर में मुझसे आगे सत्रह असिस्टेंट थे। फिल्म थी पति पत्नी और वो। परंतु हालत ऐसी थी कि पंद्रह असिस्टेंट तो काम ही न करनें दें। चालीस दिन की शूटिंग में एक तरह से मैं दर्शक ही रहा। जब द बर्निंग ट्रेन बनने लगी तो शुरुआत में मैं वही अठारवां असिस्टेंट था मगर मैं जानता था कि काम ही आगे लाएगा और वही हुआ। दूसरे-तीसरे शेड्यूल के बाद किसी की जरूरत होती थी तो वह मैं था।

आपने पहली फिल्म बनाई श्रद्धांजलि, फिर गदर आपके जीवन में आई और अब नई फिल्म बना रहे हैं। तीनों अलग-अलग दौर हैं। इनमें क्या फर्क महसूस करते हैं?
श्रद्धांजलि मैंने 14 जुलाई को शुरू की थी। उस वक्त मैं बहुत छोटा था, बीस-इक्कीस साल का। उस वक्त दोष बहुत था मुझमें। लगता था कि जितने पुराने फिल्ममेकर हैं उन्होंने सब बेकार बनाया, मैं नया करके दिखाऊंगा। गदर के समय जोश जबर्दस्त था लेकिन यह बात समझ आ गई थी कि सिनेमा बनाना आसान नहीं बहुत मुश्किल है। दोनों फिल्मों के समय एक बात समान थी कि कुछ कमाल करके दिखाना है। आज जब नई फिल्म शुरू करने जा रहा हूं तब भी यही लग रहा है। जीवन की एक नई शुरुआत करनी है। फिल्म लाइन का यही मजा है कि यहां हर शुरुआत एक नई सुबह के जैसी होती है।

फिल्म इंडस्ट्री आज दोराहे पर खड़ी है

Anil Sharma exclusive interview

श्रद्धांजलि अपने समय में अलग तरह की फिल्म थी। क्यों उससे शुरुआत की?
मेरे दिमाग में था कि मुझे ए ग्रेड ऐक्टर के साथ फिल्म बनानी है। इंडस्ट्री की मुश्किल यह है कि यहां जैसे ऐक्टरों के साथ आप शुरुआत करेंगे वैसे मान लिए जाएंगे। मेरी पहुंच तब अमिताभ-धर्मेंद्र तक नहीं थी। ए ग्रेड हीरोइनों में रेखा, राखी, हेमा मालिनी थीं। राखी जी तक मेरी पहुंच थी। मैंने उन्हें अपनी कहानी सुनाई और वह तैयार हो गईं।

आज फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति को कैसे आंकते हैं, जबकि कहा जा रहा है सिनेमा बदल रहा है?
आज इंडस्ट्री दोराहे पर खड़ी है। आज हमारा युवा फिल्मेकर बहुत एनर्जेटिक है मगर ज्यादातर की फिल्में अमेरिकी सिनेमा से प्रभावित हैं। हमारा म्यूजिक उनकी तरह हो रहा है। जबकि हमारे ऐक्टर बहुत अच्छे हैं। भारत की स्थिति अमेरिका जैसी नहीं है। ऐसे में हमारे युवा दर्शक की सोच और युवा फिल्ममेकर की सोच में बड़ा फर्क आ रहा है। इसलिए ज्यादातर फिल्में फ्लॉप हो रही हैं। पिछले डेढ़ साल में हमारे पास केवल तीन बड़ी फिल्में हैः बजरंगी भाईजान, बाहुबली और सुल्तान। तीनों पूरी तरह भारतीय मिट्टी की फिल्में हैं।

जीनियस बन गया नन्हा जीते

Anil Sharma exclusive interview

निर्देशक अनिल शर्मा अपने बेटे उत्कर्ष को लॉन्च करने जा रहे हैं। 14 जुलाई का दिन अनिल अपने लिए बेहद खास मानते हैं क्योंकि इसी तारीख को उनके पिता के.सी. शर्मा ने उन्हें उनकी पहली फिल्म (श्रद्धांजलि) निर्देशित करने को दी थी। मगर खास बात यह है कि अनिल अपने बेटे उत्कर्ष को फिल्म हीरो के तौर पर लॉन्च कर रहे हैं। फिल्म का नाम है, जीनियस।

फिल्म का निर्देशन अनिल शर्मा खुद करेंगे। रोचक तथ्य यह है कि उत्कर्ष को दर्शक अनिल की क्लासिक फिल्म गदरः एक प्रेम कथा में बाल कलाकार जीते के रूप में देख और सराह चुके हैं।  अनिल शर्मा ने अपने जूहु स्थित घर में अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि मैं जल्द ही अपने बेटे उत्कर्ष के साथ फिल्म शुरू करने जा रहा हूं।

उन्होंने कहा, ‘वह 14 जुलाई की तारीख थी जब मेरे पिता ने मुझे लॉन्च किया था। वह चाहते हैं कि इसी दिन मैं उनके पोते को लॉन्च करने की घोषणा करूं।’  फिल्म की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसकी शूटिंग साल के अंत तक शुरू हो जाएगी।

अनिल बताते हैं, ‘उत्कर्ष वही बच्चा है जिसे सबने गदर में देखा था। वह अब बड़ा हो गया है। चार साल तक अमेरिका में फिल्म की पढ़ाई करके आया है।’ उत्कर्ष ने बारहवीं तक भारत में पढ़ाई की थी और उसके बाद अमेरिका की चैपमैन युनिवर्सिटी में सिनेमा का अध्यय करते हुए टॉप किया। इस दौरान उन्होंने कुछ फिल्में भी बनाईं, जो कई फेस्टिवल्स में दिखाई और सराही गईं।

गदर के साथ ही उत्कर्ष का हीरो बनना तय हो गया था

Anil Sharma exclusive interview

जब अनिल शर्मा से पूछा गया कि आप कैसी कहानी से उत्कर्ष को लॉन्च करने जा रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘सिर्फ इतना ही कहूंगा कि दिल की लड़ाई हमेशा दिमाग से है।’ तय है कि फिल्म रोमांस-एक्शन-थ्रिल के साथ सिनेमाई वीएफएक्स से भरपूर होगी। अनिल अपने बेटे के बारे में बताते हैं कि उत्कर्ष ने अभिनय के साथ फिल्म मेकिंग, राइटिंग और निर्देशन का भी बखूबी अध्ययन किया है।

अक्सर समय से आगे की फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले अनिल कहते हैं, ‘सिनेमा ग्लोबल हो रहा है और यही वजह है कि हमने उत्कर्ष को तीन, छह या नौ महीने का फिल्म कोर्स करने के बजाय पूरी पढ़ाई को भेजा।’ वह बताते हैं कि उत्कर्ष एक कंप्लीट ऐक्टर और फिल्ममेकर के रूप खुद को स्थापित करना चाहते हैं।

क्या गदर के साथ ही तय हो गया था कि उत्कर्ष ऐक्टर बनेंगे? अनिल कहते हैं, ‘काफी हद तक हां। उत्कर्ष ने सहज ढंग से भूमिका निभाई थी और इसलिए मैंने उन्हें अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो में भी छोटा-सा रोल दिया था। उसके बाद तय था कि वह इसी फील्ड में उतरेंगे।’ अब सवाल यह कि जीनियस में उत्कर्ष की हीरोइन कौन होगी? अनिल मुस्करा कर कहते हैं, ‘हम नए चेहरे की तलाश कर रहे हैं।’

Anil Sharma exclusive interview

अनिल शर्मा की जीनियस के एक साथ खास बात यह है कि इसकी शूटिंग मथुरा, बांके बिहारी, जन्मभूमि के साथ दिल्ली आईआईटी और मुंबई समेत विदेश में होगी। यह पहला मौका है जब अपने साढ़े तीन दशक के करिअर में अनिल अपने गृहनगर में फिल्म शूट करेंगे।

अनिल कहते हैं, ‘मथुरा से मुझे बहुत प्यार और लगाव है परंतु यह संयोग ही है कि मेरे पास ऐसी कोई कहानी नहीं रही जिस वहां शूट कर सकूं। परंतु बेटे की पहली फिल्म के साथ यह मौका आया है और मैं बहुत खुश हूं।’

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed