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Politics: 'घाटे में चल रही कंपनियों ने चुनावी बांड किया दान, 75 प्रतिशत भाजपा के नाम', कांग्रेस का गंभीर आरोप

Thu, 04 Apr 2024 03:18 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Thu, 04 Apr 2024 03:18 PM IST
सार

वर्ष 2016-17 से लेकर 2022-23 तक के बाद शून्य या फिर नकारात्मक लाभ वाली 33 कंपनियों ने भाजपा को 434.2 करोड़ रुपये का दान दिया। इन 33 कंपनियों का घाटा 1 लाख करोड़ से ज्यादा था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा पर लगाया आरोप।

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serious allegation of Congress Loss-making companies donated electoral bonds to bjp
Jairam Ramesh - फोटो : Social Media

विस्तार

चुनावी बॉन्ड को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि घाटे में चल रही कई कंपनियों ने 582 करोड़ रुपये के चुनावी बांड दान किए हैं, इनमें से 75 प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी को मिले हैं। हाल ही में कांग्रेस की ओर से बयान जारी किया गया था कि भाजपा के चंदा हासिल करने के कीमत देश चुका रहा है। यह भी दावा किया गया कि भाजपा को 430 करोड़ से अधिक का दान ऐसी कंपनियों से मिला, जिनका लाभ नकारात्मक या तो शून्य था।
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पोस्ट में जयराम रमेश ने किया खुलासा
जयराम रमेश एक्स पर अपनी पोस्ट में भाजपा को चंदा देने वाली फर्जी कंपनियों के लिए लिखा है कि चंदा दो, धंधा लो। ठेका लो, रिश्वत दो, हफ्ता वसूली, फर्जी कंपनियां। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2016-17 से लेकर 2022-23 तक के बाद शून्य या फिर नकारात्मक लाभ वाली 33 कंपनियों ने भाजपा को 434.2 करोड़ रुपये का दान दिया गया था। इन 33 कंपनियों का घाटा 1 लाख करोड़ से ज्यादा था। 33 कंपनियों में से 16 ने कुल शून्य या नकारात्मक प्रत्यक्ष कर का भुगतान किया। ये 33 कंपनियां मनी लांड्रिंग के लिए बनाई गई फर्जी कंपनियां हैं।
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आरबीआई ने चुनावी बांड योजना से मनी लांड्रिंग की जताई थी चिंता
उन्होंने दावा किया कि 601 करोड़ रुपये सिर्फ छह कंपनियों द्वारा दिया गया। इन कंपनियों का यह दान  पिछले साल सातों में कमाए लाभ से कहीं ज्यादा है। जयराम रमेश ने कहा कि जब मोदी सरकार ने पहली बार बांड योजना शुरू की तो आरबीआई ने मनी लांड्रिंग में इसका इस्तेमाल होने की चिंता जताई थी। भाजपा हर कीमत पर चंदा हासिल करना चाहती थी, इसलिए उसने बड़ी चतुराई से इस योजना को आगे बढ़ाया। जिसकी कीमत देश चुका रहा है
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