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AAP vs BJP: क्या भाजपा की इस रणनीति से 'आप' को होगा फायदा, लोकसभा चुनाव पर क्या हो सकता है असर?

Sun, 07 Apr 2024 05:31 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 07 Apr 2024 05:31 PM IST
सार

आम आदमी पार्टी की रणनीति अब तक काफी सफल रही है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में उसने न केवल समूचे विपक्ष को एकजुट करने में सफलता पाई, बल्कि रामलीला मैदान में 31 मार्च को एक बड़ी रैली कर लोकसभा चुनाव के पहले अपनी ताकत दिखाने में भी सफल रही। 

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What impact of BJP's policy of opposing Arvind Kejriwal on Lok Sabha elections?
लोकसभा का रण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों एक दूसरे पर हमलावर हैं। भाजपा शराब घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को भ्रष्ट बताते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी के नेता ईडी-सीबीआई की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार के इरादों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। रविवार को भाजपा ने 'शराब से शीश महल तक' की यात्रा कर जहां केजरीवाल को घेरा, तो आम आदमी पार्टी नेताओं ने उपवास रखकर केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। केजरीवाल अनजाने में ही भाजपा के खिलाफ विपक्ष की पूरी मुहिम के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे में क्या भाजपा की यह रणनीति 'बैकफायर' कर सकती है और क्या अरविंद केजरीवाल कहीं ज्यादा मजबूत होकर उभर सकते हैं?    

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आम आदमी पार्टी की रणनीति अब तक काफी सफल रही है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में उसने न केवल समूचे विपक्ष को एकजुट करने में सफलता पाई, बल्कि रामलीला मैदान में 31 मार्च को एक बड़ी रैली कर लोकसभा चुनाव के पहले अपनी ताकत दिखाने में भी सफल रही। इस रैली के बहाने आम आदमी पार्टी ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक के अपने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम भी कर दिया है। 
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जिस तरह राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, शरद पवार और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने केजरीवाल के पक्ष में बयानबाजी की, उससे भी केजरीवाल की विपक्ष के एक मजबूत नेता के तौर पर पहचान मजबूत हुई है। आम आदमी पार्टी दिल्ली में लोकसभा चुनाव की बैठकों में केजरीवाल की इस मजबूत भूमिका को पुरजोर तरीके से उठा रही है। लोकसभा चुनावों में उसे इसका लाभ मिल सकता है। जबकि इस रैली की सह आयोजक होने के बाद भी कांग्रेस दिल्ली में अपनी चुनावी तैयारियों में यही बात कहने की स्थिति में नहीं है। 
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'केजरीवाल हो सकते हैं मजबूत'
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि जिस तरह अरविंद केजरीवाल विपक्ष के पूरे राजनीतिक अभियान के केंद्र में आते हुए दिख रहे हैं, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को इसका लाभ मिल सकता है। वे ज्यादा ताकतवर होकर उभर सकते हैं। इसके पहले जिस तरह शराब घोटाले का मामला सामने आया था और जिस तरह मुख्यमंत्री आवास के निर्माण में कथित अनियमितताएं होने की बात सामने आई थी, उससे अरविंद केजरीवाल की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा था। उससे आप को नुकसान हो सकता था। लेकिन अब जिस तरह लगातार हमलों के कारण अरविंद केजरीवाल मीडिया में चर्चा में आए हैं, उससे वे ज्यादा मजबूत होकर उभर सकते हैं। 

कुमार राकेश ने कहा कि अरविंद केजरीवाल राजनीति के शातिर खिलाड़ी हैं। यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी पूरी राजनीतिक यात्रा उनके शानदार मीडिया प्रबंधन और मीडिया के कुशल उपयोग करने पर आधारित रही है। आज भी जब विपक्ष इस बात का आरोप लगा रहा है कि उसकी आवाज मीडिया में नहीं उठाई जा रही है, अपनी कोशिशों से आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल न केवल चर्चा में बने हुए हैं, बल्कि उसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश भी कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि जिस तरह आम आदमी पार्टी ने सुनीता केजरीवाल का उपयोग कर इमोशनल कार्ड खेला है, उससे भी उसे लाभ मिल सकता है। मीडिया का उपयोग कर केजरीवाल इस कार्ड को बहुत मजबूती के साथ खेल रहे थे। शायद इसीलिए भाजपा ने केजरीवाल पर हमलों में बांसुरी स्वराज और शाजिया इल्मी जैसे महिला नेताओं को सामने कर दिया। लेकिन इस प्रकरण से केजरीवाल पर हमला करने की रणनीति पर भाजपा को पुनर्विचार करने की जरूरत पड़ सकती है।


विधानसभा चुनाव में हो सकते हैं कारगर
राजनीतिक विश्लेषक विवेक सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के इर्द गिर्द सिमट जाता है। लोकसभा चुनाव और राज्यों के विधानसभा के चुनाव में भाजपा को मिलने वाले वोटों का अंतर इस बात को प्रमाणित करता है। ऐसे में 2024 में भी इस बात की संभावना है कि पूरा चुनाव मोदी के आसपास ही सिमटा रहे और ऐसे में इस बात की संभावना है कि लोकसभा चुनाव में केजरीवाल उतने ज्यादा प्रभावी न साबित हों। लेकिन लगभग साल भर बाद जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होंगे, तब केजरीवाल की दावेदारी मजबूत हो सकती है।

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