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Badaun : बदायूं से संघमित्रा मौर्य का टिकट कटा, भाजपा ने दुर्विजय सिंह शाक्य पर जताया भरोसा
Mon, 25 Mar 2024 12:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 25 Mar 2024 12:02 AM IST
सार
बदायूं लोकसभा सीट से सांसद रहीं संघमित्रा मौर्य का टिकट कट गया है। वह स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनको पिता की बगावत का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट पर अपने युवा और तेजतर्रार ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य को चुनाव मैदान में उतारा है। दुर्विजय सिंह शाक्य का जन्म 12 फरवरी 1977 को जिले के ब्लॉक समरेर के गांव ब्राह्मपुर में वैध रामलाल शाक्य के परिवार में हुआ था। उनकी माताजी रामकुंवरि का निधन पिछली वर्ष ही हुआ था। वे पांच भाई और तीन बहन हैं। भाइयों में वे सबसे छोटे हैं। उनके भाई देवेंद्र शाक्य गांव के कई वर्षों से प्रधान हैं। उनका भी दातागंज क्षेत्र की राजनीति में बहुत प्रभाव है। संघमित्रा मौर्य का टिकट कट गया है।
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गांव ब्रह्मपुर से बेसिक शिक्षा पांचवीं तक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे हायर एजूकेशन के लिए बरेली चले गए। फिर उन्होंने उच्चस्तरीय शिक्षा बीएससी, बीएड, एमए (राजनीति विज्ञान), लॉ की डिग्री और पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। वे बरेली के बिशप मंडल इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। उन्होंने अंतर्जातीय विवाह पंजाबी समुदाय की बरेली निवासी मोना भाटिया से किया, मोना भाटिया उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।
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श्री शाक्य सन 1994 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने। उन्होंने सन 1995 में विद्यार्थी जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति और सामाजिक जीवन की शुरुआत की। वे सन 1995 में सबसे पहले बरेली कॉलेज इकाई के सहमंत्री बने। सन 1997 में बरेली में विद्यार्थी परिषद में महानगर महामंत्री, महानगर उपाध्यक्ष, विभाग संयोजक और प्रदेश सह मंत्री भी रहे।
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सन 2001 में शाहजहांपुर में विद्यार्थी परिषद के विस्तारक के रूप में कार्य संभाला। उन्होंने सन 2002 से विद्यार्थी परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में मुरादाबाद- रामपुर विभाग के संगठन मंत्री का दायित्व संभाला। सन 2002 में राम मंदिर आंदोलन के शिला पूजन कार्यक्रम के दौरान गिरफ्तार हुए और 14 दिन जेल में रहे।
सन 2007 में उसहैत विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव लड़ने के लिए कहा और वह तैयारी के लिए क्षेत्र में आए उसके बाद उसहैत विधानसभा सीट गठबंधन में चले जाने के कारण चुनाव नहीं लड़े। सन 2007 में भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बने। उन्होंने हजारों यूथ कार्यकर्ताओं को भाजपा युवा मोर्चा से जोड़कर सशक्त टीम तैयार की। सन 2012 में प्रदेश सह संयोजक पिछड़ा प्रकोष्ठ भाजपा बने। सन 2014 में पांचाल क्षेत्र के उपाध्यक्ष बने। सन 2016 में ब्रज क्षेत्र के महामंत्री और सन 2020 उपाध्यक्ष बने।
इसके बाद मार्च 2023 से भाजपा ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे हैं। अभी हाल ही में दुर्विजय सिंह शाक्य के नेतृत्व में संपन्न हुए नगरीय निकाय चुनाव में ब्रज क्षेत्र से अभूतपूर्व परिणाम आए। वे अच्छे संगठनकर्ता और कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं। वे मूल रूप से संघ विचारधारा के साथ लंबे समय से राजनीति कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट पर अपने बहुत पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाकर विश्वास जताया है।
संघमित्रा मौर्य को पिता की बगावत का मिला खामियाजा
बदायूं लोकसभा सीट से सांसद रहीं संघमित्रा मौर्य का टिकट कट गया है। वह स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनको पिता की बगावत का खामियाजा भुगतना पड़ा है। वह प्रतापगढ़ जनपद की मूल निवासी है। डॉ. संघमित्रा एटा में वर्ष 2010 में जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से प्रत्याशी के रूप में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं। 2019 में भाजपा ने उनको बदायूं से टिकट दिया। बदायूं सीट पर वर्ष 1996 से सपा का कब्जा चला आ रहा था। इस चुनाव में वह जीतीं और सपा का मिथक टूटा था। उधर, पिता ने सपा का दामन थामकर हिन्दू समाज के खिलाफ जमकर बयानबाजी की। संघमित्रा मौर्य ने कहा कि पार्टी का फैसला उन्हें मंजूर है।