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Lok Sabha Result 2024: पहली बार गठबंधन सरकार से होगा पीएम मोदी का सामना; बड़े एजेंडे पर पड़ेगा असर

Wed, 05 Jun 2024 05:52 AM IST
शिव शरण शुक्ला हिमांशु मिश्र
हिमांशु मिश्र Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 05 Jun 2024 05:52 AM IST
सार

सीएम-पीएम रहते हुए अब तक नरेंद्र मोदी ने भाजपा की बहुमत की सरकार चलाई है। इस बार 12 सहयोगी दलों से तालमेल कर सरकार चलानी होगी। अब गठबंधन की सरकार में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार मजबूत स्थिति में होंगे। वहीं इसका असर यूसीसी, एक देश एक चुनाव जैसे बड़े एजेंडे पर भी पड़ेगा। 

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Lok Sabha Result 2024: PM Modi will be the head of coalition government for first time, know its meaning
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

चुनावी राजनीति में प्रवेश के बाद करीब ढाई दशक से बहुमत की सरकारों की कमान संभालने वाले नरेंद्र मोदी बतौर पीएम अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे। नई सरकार में बेहतर प्रदर्शन करने वाले टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू और जदयू मुखिया व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मजबूत दखल होगा। उन्हें इस दौरान लोकसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाले 12 सहयोगी दलों से भी तालमेल बना कर चलना होगा।

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गौरतलब है, वर्ष 2001 में अचानक गुजरात के मुख्यमंत्री बनाए गए नरेंद्र मोदी ने राज्य में तीन बार बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व किया। इसके बाद जब राष्ट्रीय राजनीति में आए तब दो बार केंद्र में बहुमत की सरकार की कमान संभाली। भाजपा के अपने दम पर बहुमत से चूकने के कारण करीब 23 साल बाद पीएम पहली बार गठबंधन की सरकार के मुखिया होंगे।
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12 सहयोगियों का है लोकसभा में प्रतिनिधित्व
इस चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर 240 सीटें हासिल की हैं। यह बहुमत से 22 कम है। दूसरी ओर टीडीपी के 16 तो जदयू के 12 सांसद जीते हैं। इन दोनों दलों के संयुक्त सीटों की संख्या 28 है। शिवसेना शिंदे गुट की सात सीटें हैं। इसके अलावा लोजपा (आर) ने पांच, जेएनपी, रालोद दो-दो, एनसीपी, अपना दल, एजीपी, हम, आजसू और एजीपी के पास एक-एक सीटें हैं। जाहिर तौर पर गठबंधन में नायडू, नीतीश का मजबूत दखल होगा। इसके अलावा शेष दस दलों को भी साधे रखने की चुनौती होगी।
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स्थिरता पर खतरा नहीं
गठबंधन सरकार के बावजूद नई सरकार की स्थिरता पर कई कारणों से खतरा नहीं होगा। बिहार में नीतीश को भाजपा की ताकत का अंदाजा है, जबकि बतौर सीएम नायडू को केंद्र के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। उनके अलग होने के बावजूद मोदी सरकार को बहुमत खोने का डर नहीं रहेगा। हां नीतीश राज्य के लिए विशेष पैकेज, जल्द चुनाव का दबाव बना सकते हैं। इसके अलावा बिहार में अब भाजपा के लिए नीतीश को चेहरा बनाए रखने की मजबूरी है।

बड़े एजेंडे पर संशय
भाजपा की योजना प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना कर पूरे देश में यूसीसी लागू करने, सभी तरह के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में आगे बढऩे की थी। हालांकि गठबंधन सरकार होने के कारण यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन अहम एजेंडे पर कैसे आगे बढ़ती है। गौरतलब है कि इससे पहले गठबंधन सरकार की मजबूरियों के कारण वाजपेयी सरकार ने अनुच्छेद 370, राम मंदिर और यूसीसी को अपने एजेंडे से बाहर कर दिया था।


मंत्रिमंडल में बढ़ेगी सहयोगियों की भागीदारी
नई सरकार में पुरानी सरकार की तुलना में सहयोगियों का प्रतिनिधित्व बढ़ना तय है। बीती सरकार में मूल शिवसेना और अकाली दल के साथ छोड़ने के कारण सरकार में महज तीन सहयोगियों (आरपीआई, अपना दल और लोजपा-पारस) का ही प्रतिनिधित्व रह गया था। इस बार भाजपा के अल्पमत में होने के कारण ज्यादा सहयोगियों को मौका मिलना तय है। इसके अलावा इस बार मंत्रिमंडल में विभाग बंटवारे को लेकर भी संतुलन की स्थिति दिख सकती है।

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