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Lok Sabha 2024: मिशन 80 में घोसी है बड़ी मुश्किल, कौन मारेगा पूर्वांचल का मैदान?
सार
भाजपा के प्रवक्ता एसएन सिंह ने अमर उजाला से कहा कि पूर्वांचल में एक प्रचलित कहावत है कि डूबती नाव और सूखते पेड़ से पशु-पक्षी भी किनारा कर लेते हैं। यह तो उत्तर प्रदेश की जनता है जो विकास के साथ चलने और परिवारवादी और भ्रष्टाचारवादी राजनीति को नकारने का मन बना चुकी है। उनकी पार्टी इस बार यूपी की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी।
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लोकसभा चुनाव 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ ही लोकसभा चुनाव 2024 की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। भाजपा ने इस बार अपने लिए 370 सीटों पर और एनडीए के लिए चार सौ सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसका बड़ा हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से आना है जहां भाजपा ने पहले ही 'मिशन 80' यानी सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य तय कर रखा है। लेकिन क्या भाजपा के लिए यह लक्ष्य हासिल कर पाना संभव होगा?
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विशेषकर यह देखते हुए कि इसी यूपी में घोसी जैसी लोकसभा सीट भी है जहां भाजपा अब तक केवल एक बार जीत हासिल कर पाई है। सितंबर 2023 में घोसी उपचुनाव में भाजपा को मिली बड़ी हार से भी यह प्रश्न बड़ा हो गया है कि इस बार इस सीट पर कौन बाजी मारेगा? हालांकि, भाजपा का अनुमान है कि बेहतर सामाजिक समीकरणों और पूर्वांचल में किए गए विकास कार्यों के कारण उसे इस बार यहां से जीत मिलेगी।
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हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि घोसी लोकसभा सीट पर भाजपा का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा, या यह सीट समझौते में ओम प्रकाश राजभर के पास जाएगी। अगले दो दिनों में इस पर निर्णय हो जाने की उम्मीद की जा रही है। लेकिन माना जा रहा है कि इस बार घोसी में चतुष्कोणीय लड़ाई हो सकती है। एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार के अलावा यहां से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भी इस सीट पर अपनी किस्मत आजमाएंगे।
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वहीं, 'घोसी नवनिर्माण मंच' के रूप में चौथे दावेदार बद्रीनाथ ने भी इस सीट पर अपनी दावेदारी जता दी है। वोटों में बंटवारे के कारण मामूली अंतर भी जीत-हार के नए समीकरण पैदा कर सकती है। यही कारण है कि बद्रीनाथ की घोसी सीट पर दावेदारी ने बड़े दलों की नींद उड़ा दी है।
2014 में भाजपा, 2019 में बसपा को मिली जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में घोसी में भाजपा के उम्मीदवार हरिनारायण राजभर को जीत मिली थी। उन्होंने बसपा के उम्मीदवार दारा सिंह चौहान को एक लाख 46 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा ने साथ में मिलकर चुनाव लड़ा था और इस समीकरण में घोसी से बसपा उम्मीदवार अतुल राय ने घोसी से जीत हासिल की थी। उन्होंने लगभग सवा लाख वोटों के अंतर से भाजपा के उम्मीदवार हरिनारायण राजभर को हराया था।
घोसी नवनिर्माण मंच ने उड़ाई बड़े दलों की नींद
लेकिन भाजपा, सपा-बसपा के अलावा घोसी के चौथे उम्मीदवार बद्रीनाथ ने बड़े दलों की नींद उड़ा दी है। घोसी नवनिर्माण मंच यहां के युवाओं में स्थानीय स्वाभिमान और क्षेत्रीय विकास को तेज स्वर दिया है। इससे बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण उसकी ओर आकर्षित हुए हैं। यदि इस मंच ने एक वर्ग का वोट हासिल कर लिया तो इससे तीनों प्रमुख दलों के स्थापित समीकरण बदल सकते हैं और इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
भाजपा नेता ने किया दावा
भाजपा के प्रवक्ता एसएन सिंह ने अमर उजाला से कहा कि पूर्वांचल में एक प्रचलित कहावत है कि डूबती नाव और सूखते पेड़ से पशु-पक्षी भी किनारा कर लेते हैं। यह तो उत्तर प्रदेश की जनता है जो विकास के साथ चलने और परिवारवादी और भ्रष्टाचारवादी राजनीति को नकारने का मन बना चुकी है। उनकी पार्टी इस बार यूपी की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, अन्य बेहतर सड़कों के निर्माण, एम्स, सुहेलदेव विश्वविद्यालय और रोजगार के निर्माण के कारण क्षेत्र की जनता भाजपा को वोट करेगी।
एसएन सिंह का दावा है कि आजादी के 70 साल तक जनता पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश में विकास के लिए तरसती रही है। सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री देने और देश की राजनीति का केंद्र होने के बाद भी यूपी की पहचान गरीब और बेकार राज्यों की पड़ चुकी थी। लेकिन अब यूपी में अयोध्या, काशी, मथुरा और हर जगह विकास का काम हो रहा है। जनता अब केवल विकास को ही वोट करेगी।