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मलकाजगिरी: राज की रस्साकशी में दांव पर सीएम रेवंत की प्रतिष्ठा; तीनों प्रत्याशी पहली बार कर कर रहे जोर आजमाइश
सार
मलकाजगिरि सीट परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आई। 31.5 लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में मिनी भारत का एहसास होता है। इस सीट की 92 फीसदी आबादी शहरी है। यहां तेलुगु के अलावा तमिल, उड़िया, मलयालम, हिंदी और कन्नड़ भाषी मतदाता हैं। बीआरएस ने आर. लक्ष्मा रेड्डी को टिकट दिया है।
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ग्राउंड रिपोर्ट।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मतदाताओं के लिहाज से देश की सबसे बड़ी लोकसभा सीट मलकाजगिरि में प्रत्याशियों से ज्यादा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की प्रतिष्ठा दांव पर है। रेवंत 2019 में बाहरी होकर भी पहली बार यहीं से सांसद बने थे। छह लाख से अधिक मत पाकर उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के उम्मीदवार राजशेखर रेड्डी को करीब 10 हजार मतों से हराया था। विधानसभा चुनाव में विकाराबाद जिले की कोडंगल सीट से चुने जाने के बाद सीएम बने रेवंत रेड्डी के कंधों पर कांग्रेस को मलकाजगिरि में तीसरी जीत दिलाने की जिम्मेदारी है। मलकाजगिरि का एहसान चुकाते हुए वह सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यहीं से सांसद चुने जाने के कारण आज वह मुख्यमंत्री हैं। हालांकि, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस यहां की सातों सीटें बीआरएस से हारी है। बावजूद इसके बीआरएस यहां त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी है।
मलकाजगिरि सीट परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आई। 31.5 लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में मिनी भारत का एहसास होता है। इस सीट की 92 फीसदी आबादी शहरी है। यहां तेलुगु के अलावा तमिल, उड़िया, मलयालम, हिंदी और कन्नड़ भाषी मतदाता हैं। बीआरएस ने आर. लक्ष्मा रेड्डी को टिकट दिया है। उनकी घेराबंदी के लिए भाजपा ने बीआरएस सरकार में दो बार मंत्री रहे इटाला राजेंदर को उतारा है, जबकि कांग्रेस से पी. सुनीता रेड्डी प्रत्याशी हैं। तीनों ही पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में बीआरएस की सत्ता जाने से अब यहां भी पीएम मोदी का जादू दिख रहा है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीआरएस को पांच लाख से ज्यादा वोट मिले थे। हालांकि, विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के कई दिग्गजों ने पाला बदल लिया है, जिससे जमीनी हालात बदल गए हैं।
केसीआर के करीबी रहे इटाला अब भाजपा के झंडाबरदार
भाजपा प्रत्याशी राजेंदर इटाला बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की सरकार में वित्त व स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। जमीन कब्जाने के आरोप में 2021 में मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। तब विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए और उपचुनाव में विजयी हुए। हालांकि, विधानसभा चुनाव में हुजूराबाद और गजवेल से हार गए।
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लक्ष्मा रेड्डी : कांग्रेस से नाता तोड़ बीआरएस से जोड़ा
बीआरएस की आर. लक्ष्मा रेड्डी 30 साल कांग्रेस में रहे। एनएसयूआई से छात्र राजनीति शुरू की। चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए गृह क्षेत्र उप्पल में बुजुर्गों को दवा, सरकारी स्कूलों को पंखे व खिलाड़ियों को किट देने जैसे कामों से सियासी जमीन तैयार की। बीते विधानसभा चुनाव में टिकट न मिला तो बीआरएस में चले गए।
सुनीता रेड्डी : पति की पहचान और सीएम के साथ का सहारा
कांग्रेस प्रत्याशी पी. सुनीता रेड्डी बीआरएस से आई हैं। चार बार विधायक रहे पति पी. महेंदर रेड्डी केसीआर सरकार में मंत्री रहे। महेंदर रेड्डी ने ही रेवंत रेड्डी से मिलकर पत्नी सुनीता को कांग्रेस का प्रत्याशी बनवाया। सुनीता यहां नई हैं और बाहरी भी। पति की पहचान, रेवंत और कांग्रेस का साथ ही उनका सहारा है।
जनता जनार्दन की राय
पिछले दो चुनावों का हाल
2019
2014
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मलकाजगिरि सीट परिसीमन के बाद 2009 में अस्तित्व में आई। 31.5 लाख से अधिक मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में मिनी भारत का एहसास होता है। इस सीट की 92 फीसदी आबादी शहरी है। यहां तेलुगु के अलावा तमिल, उड़िया, मलयालम, हिंदी और कन्नड़ भाषी मतदाता हैं। बीआरएस ने आर. लक्ष्मा रेड्डी को टिकट दिया है। उनकी घेराबंदी के लिए भाजपा ने बीआरएस सरकार में दो बार मंत्री रहे इटाला राजेंदर को उतारा है, जबकि कांग्रेस से पी. सुनीता रेड्डी प्रत्याशी हैं। तीनों ही पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में बीआरएस की सत्ता जाने से अब यहां भी पीएम मोदी का जादू दिख रहा है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीआरएस को पांच लाख से ज्यादा वोट मिले थे। हालांकि, विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के कई दिग्गजों ने पाला बदल लिया है, जिससे जमीनी हालात बदल गए हैं।
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केसीआर के करीबी रहे इटाला अब भाजपा के झंडाबरदार
भाजपा प्रत्याशी राजेंदर इटाला बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की सरकार में वित्त व स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। जमीन कब्जाने के आरोप में 2021 में मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। तब विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा में चले गए और उपचुनाव में विजयी हुए। हालांकि, विधानसभा चुनाव में हुजूराबाद और गजवेल से हार गए।
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लक्ष्मा रेड्डी : कांग्रेस से नाता तोड़ बीआरएस से जोड़ा
बीआरएस की आर. लक्ष्मा रेड्डी 30 साल कांग्रेस में रहे। एनएसयूआई से छात्र राजनीति शुरू की। चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए गृह क्षेत्र उप्पल में बुजुर्गों को दवा, सरकारी स्कूलों को पंखे व खिलाड़ियों को किट देने जैसे कामों से सियासी जमीन तैयार की। बीते विधानसभा चुनाव में टिकट न मिला तो बीआरएस में चले गए।
सुनीता रेड्डी : पति की पहचान और सीएम के साथ का सहारा
कांग्रेस प्रत्याशी पी. सुनीता रेड्डी बीआरएस से आई हैं। चार बार विधायक रहे पति पी. महेंदर रेड्डी केसीआर सरकार में मंत्री रहे। महेंदर रेड्डी ने ही रेवंत रेड्डी से मिलकर पत्नी सुनीता को कांग्रेस का प्रत्याशी बनवाया। सुनीता यहां नई हैं और बाहरी भी। पति की पहचान, रेवंत और कांग्रेस का साथ ही उनका सहारा है।
जनता जनार्दन की राय
- मलकाजगिरि में इंफ्रास्ट्रक्चर व मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ रेजिटेंड वेलफेयर एसोसिएशनंस के महासचिव बीटी श्रीनिवासन कहते हैं, पिछली बार रेवंत रेड्डी को चुना। हुआ कुछ नहीं। इस बार लोग इटाला को बेहतर मान रहे हैं। बीआरएस का वोट भी इसी ओर जाता दिख रहा है। रेलवे से सेवानिवृत्त शकील अहमद कहते हैं, यहां 90 फीसदी हिंदू हैं। इस बार कांग्रेस को मुश्किल होगी, क्योंकि चुनाव बाद कमजोर हुई बीआरएस का वोट भाजपा में जा रहा है।
- बीआरएस समर्थक विक्रांत सिंह कहते हैं, हैदराबाद को बीआरएस ने ही बदला है। पहले हाईटेक सिटी का मतलब सिर्फ साइबर टॉवर था, आज कहां तक पहुंच गया। इसी सरकार ने मुझे डबल बेडरूम का फ्लैट दिया। दो भाई भी फ्लैट पाए। मां को दो हजार पेंशन आ रही है। पार्षद-विधायक मिलते भी हैं।
- कॉन्फेक्शनरी शॉप चलाने वाले राजस्थान के मुन्ना लाल कहते हैं, पिछली बार कांग्रेस का अंधेरे में तीर निशाने पर लगा था, इस बार भाजपा जीतेगी। रेलवे से रिटायर्ड लक्ष्मण कहते हैं, कांग्रेस ने महिलाओं के लिए बस का किराया माफ किया है, और कुछ नहीं किया। इस बार मोदी को वोट दूंगा। बस स्टैंड पर मिलीं हेमलता कहती हैं कि महिलाओं के लिए मुफ्त बस और सस्ती गैस का फायदा कांग्रेस को जरूर मिलेगा।
पिछले दो चुनावों का हाल
2019
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| रेवंत रेड्डी | कांग्रेस | 38.6 |
| राजशेखर रेड्डी | बीआरएस | 37.9 |
2014
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| सी. मल्ला रेड्डी | टीडीपी | 32.3 |
| हनुमंत राव | टीआरएस | 30.5 |