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ग्राउंड रिपोर्ट आंध्र प्रदेश: कडप्पा और विजयवाड़ा में विरासत की लड़ाई पर सबकी निगाहें; जमीन पर कौन कितना मजबूत

Sat, 11 May 2024 06:04 AM IST
शिव शरण शुक्ला बविंद्र वशिष्ठ
बविंद्र वशिष्ठ Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 11 May 2024 06:04 AM IST
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सार
कडप्पा और विजयवाड़ा में इस बार बड़ा ही रोचक मुकाबला है। कडप्पा में शर्मिला का मुकाबला चचेरे भाई अविनाश रेड्डी से है, जो वाईएसआर से मौजूदा सांसद हैं और उन्हें जगन मोहन का पूरा समर्थन है। दूसरी लड़ाई विजयवाड़ा की है, जहां वाईएसआरसीपी के नानी और टीडीपी के चिन्नी आमने-सामने हैं।
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Ground report of Lok Sabha elections in Kadapa and Vijayawada of Andhra Pradesh, know ground situation here
ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

आंध्र प्रदेश के चुनावी अखाड़े में कडप्पा और विजयवाड़ा पर सबकी नजर है...एक जगह भाई-बहन की जंग है...तो दूसरी ओर सगे भाइयों के बीच मुकाबला। मगर, असली अखाड़ा कडप्पा ही है...यहां सीएम जगनमोहन रेड्डी और उनकी बहन वाईएस शर्मिला के बीच विरासत की लड़ाई है, हालांकि दोनों अलग-अलग सदन के लिए मैदान में हैं। शर्मिला कांग्रेस से सांसदी की लड़ाई लड़ रही हैं, तो जगन पुलिवेंदला से विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं। शर्मिला का मुकाबला चचेरे भाई अविनाश रेड्डी से है, जो वाईएसआर से मौजूदा सांसद हैं और उन्हें जगन मोहन का पूरा समर्थन है। दूसरी लड़ाई विजयवाड़ा की है, जहां वाईएसआरसीपी के नानी और टीडीपी के चिन्नी आमने-सामने हैं। आंध्र के इन्हीं मुकाबलों पर बविंद्र वशिष्ठ की रिपोर्ट...


ग्राउंड रिपोर्ट कडप्पा: वाईएसआर की विरासत के लिए भाई-बहन में सियासी संग्राम
कडप्पा...दक्षिण आंध्र के इस शहर का नाम तेलुगु शब्द गडप्पा से आया है। गडप्पा यानी दहलीज। तिरुमला पर्वत की इस दहलीज पर कदम रखते ही सियासत के नए रंग दिखते हैं। यहां पर दक्षिण भारत के दिग्गज नेता रहे वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) की विरासत के लिए भाई-बहन में ही सियासी संग्राम है। वाईएसआर के बेटे व सीएम जगन मोहन रेड्डी को उनकी बहन वाईएस शर्मिला सीधी चुनौती दे रही हैं। कडप्पा संसदीय सीट पर चचेरे भाई वाईएस अविनाश रेड्डी के खिलाफ चुनावी ताल ठोक रहीं शर्मिला खुद को वाईएसआर के असली वारिस के रूप में पेश कर रही हैं। लड़ाई व्यक्तिगत और सियासी जुबां कड़वी हो गई है। वारिसों की इस जंग ने मसालेदार व्यंजनों के लिए मशहूर इस क्षेत्र के सियासी जायके को मिर्ची डाल और तीखा कर दिया है।


रायल सीमा इलाके में कडप्पा युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) का गृहक्षेत्र है। आंध्र में कांग्रेस ने शर्मिला को पार्टी की बागडोर सौंपने के बाद इस संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा है। यहां दो बार के सांसद अविनाश रेड्डी शर्मिला-जगन के दूसरे चाचा व पूर्व सांसद वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या केस में आरोपी हैं। उधर, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने सी भूपेश रेड्डी को टिकट थमाया है। एक दशक से यहां वाईएसआरसीपी और टीडीपी में सीधी टक्कर रही है, लेकिन इस बार शर्मिला ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

कडप्पा में इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबारी मो. उमर कहते हैं, राजशेखर होते तो आंध्र का विभाजन नहीं होता। विवेकानंद को लेकर अविनाश पर जो आरोप हैं, वो उनके घर का मामला है। सार्वजनिक जीवन में उनकी कॉलर सफेद है। चंद्रबाबू अच्छे प्रशासक हैं, पर जगन के प्रति सहानुभूति बन रही है। एनजीओ चलाने वाले चंद्र किशन का कहना है कि यह विरासत की लड़ाई है। प्रॉपर्टी-पैसे के लिए जंग है। शर्मिला के सवाल जायज हैं, लेकिन तेलंगाना से आईं कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष की बातों पर जनता कितना भरोसा करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

वाईएसआर परिवार का कब्जा
कडप्पा से वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन दो बार सांसद रह चुके हैं। जगन के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी कांग्रेस के टिकट पर चार बार सांसद रहे। कांग्रेस के ही टिकट पर जगन के चाचा वाईएस विवेकानंद रेड्डी दो बार जीते। जगन भी पहली बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीते थे। दूसरी बार वे अपनी पार्टी वाईएसआर से जीते। मौजूदा सांसद अविनाश लगातार दो बार जीत चुके हैं। जगन जिस हलके (पुलिवेंदला) से चुनाव लड़ रहे हैं, वह भी कडप्पा संसदीय क्षेत्र में आता है।

मैं वाईएसआर की बेटी...जगन ने चाचा के हत्या के आरोपी को उतारा : शर्मिला
राज अन्ना बिड्डा...। यानी राज अन्ना की बेटी। वाईएसआर और विवेकानंद रेड्डी के साथ शर्मिला के ये पोस्टर कडप्पा के हर चौराहे पर हैं। गाड़ी पर लगी बड़ी स्क्रीन पर शर्मिला का संदेश दिखाया-सुनाया जा रहा है। वह कह रही हैं, मैं वाईएस राजशेखर की बेटी हूं। चाचा विवेकानंद रेड्डी की आत्मा की शांति के लिए लड़ रही हूं। वाईएसआरसीपी ने जिसे चुनाव में उतारा है, वो उनकी हत्या में आरोपी है।

उत्तराधिकारी का फैसला जनता करेगी, विरोधियों से जा मिलीं हैं बहनें : जगन
सीएम जगन मोहन जनसभाओं में कह रहे हैं, वाईएसआर के उत्तराधिकारी का फैसला जनता करेगी। दुख है कि दो बहनें शर्मिला व सुनीता (विवेकानंद की बेटी) ने उन लोगों से हाथ मिला लिया है, जो जनता के जहन से वाईएसआर का नाम मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। कडप्पा के लोग जानते हैं कि विवेकानंद की हत्या किसने की। जिस कांग्रेस ने पहले आंध्र का विभाजन किया वो अब मेरे परिवार को तोड़ना चाह रही है।

चाचा को किसने मारा...जगन नहीं दे रहे बहन को हक : चंद्रबाबू नायडू 
कडप्पा के मशहूर सेवन रोड सर्किल पर टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू जनसभा को संबोधित करते हुए सीधा सवाल करते हैं.....चाचा को किसने मारा? सगी बहन को हक नहीं देने वाले ऐसे सीएम की जरूरत है। वाईएसआर मेरे मित्र रहे हैं, लेकिन पिता और बेटे में बहुत फर्क है। वाईएसआर ने विकास की राजनीति की और बेटे ने राज्य को बर्बाद कर दिया। परिवार की लड़ाई को आधार बना चंद्रबाबू सीएम जगन पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं।

साड़ी के रंग पर भी सियासत
वाईएस शर्मिला पिछले दिनों बेटे की शादी के लिए चंद्रबाबू नायडू के घर पीली साड़ी पहन कर गई थीं। चंद्रबाबू की पार्टी टीडीपी के झंडे का रंग भी पीला है। इस पर जगन ने कहा था, वह उनकी स्क्रिप्ट पढ़ रही हैं। उनके अत्याचारों-षड्यंत्रों में अब उनकी हिस्सेदारी है। इस पर शर्मिला ने जगन को असभ्य करार देते हुए कहा था कि सीएम का महिला, खासकर छोटी बहन के कपड़ों पर टिप्पणी करना अपमानजनक है। यह सभी महिलाओं का अपमान है।

पिछले दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार  दल मत%
अविनाश रेड्डी वाईएसआरसीपी 63.41
आदिनारायण रेड्डी  टीडीपी     32.60

2014 
उम्मीदवार  दल मत%
अविनाश रेड्डी  वाईएसआरसीपी 55.95
आर श्रीनिवास रेड्डी  टीडीपी 40.10

विजयवाड़ा ग्राउंड रिपोर्ट : सीएम जगन और चंद्रबाबू की जंग में सगे भाई आमने-सामने
कृष्णा नदी के किनारे बसा आंध्र प्रदेश का दूसरा बड़ा शहर विजयवाड़ा पूर्व में इंद्रकीलाद्री की पहाड़ियों से घिरा है। 48 डिग्री तापमान के बीच सियासी पारा भी चढ़ गया है। तपती दुपहरी में सन्नाटे के बाद दिन ढलने से पहले बाजार में फिर चहल-पहल है। पहाड़ी पर बने प्रसिद्ध कनक दुर्गा मंदिर से घंटियों की आवाज के बीच भवानीपुरम में चौराहे पर पटाखे फोड़े जा रहे हैं। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के पीले झंडों से सजी खुली गाड़ी से कागज के पीले फूल बरस रहे हैं। विजयवाड़ा संसदीय क्षेत्र से टीडीपी प्रत्याशी केसिनेनी शिवनाथ चिन्नी मंदिर में शीश नवाने के बाद चुनावी सभा कर रहे हैं।

चिन्नी पिछले चुनाव में भाई और दो बार के टीडीपी सांसद केसिनेनी श्रीनिवास नानी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले थे। इस बार उसी भाई के खिलाफ चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू के साथ खटपट के चलते नानी तीन माह पहले पाला बदलकर मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) में शामिल हो गए। टीडीपी ने जब नानी के छोटे भाई चिन्नी को मैदान में उतारा, तो जगनमोहन ने भी विरोधी पर उसी के अस्त्र से वार करने के लिए नानी को टिकट थमा दिया। चुनावी अखाड़े में अब दोनों भाई एक-दूसरे को ललकार रहे हैं। 

चिन्नी कहते हैं, मैंने सालों भाई का साथ दिया, लेकिन उनके अक्खड़पन व अहंकार का जवाब जनता देगी। महत्वाकांक्षा के लिए नानी ने विचारधारा को ताक पर रख दिया। उधर, तिरुवुर में जनसभा में नानी कह रहे हैं, उनके साथ धोखा हुआ है। टीडीपी में रहते उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। लोग दस साल के काम, मेरी विश्वसनीयता को जानते हैं। भाइयों की इस सियासी जंग ने विजयवाड़ा में मुकाबला बेहद रोचक बना दिया है।

कांग्रेस भी अपने इस पुराने गढ़ में खोई जमीन तलाश रही है। इस संसदीय सीट पर 11 बार जीत दर्ज कर चुकी कांग्रेस को पिछले चुनाव में डेढ़ फीसदी से भी कम वोट मिले थे। इस दफा बदले प्रत्याशी के रूप में वल्लूर भार्गव को उतारा गया है। हालांकि, धरातल पर मुकाबला सगे भाइयों के बीच ही दिख रहा है। आंध्र की राजनीति को अर्से से देख रहीं रेहाना कहती हैं, कांग्रेस नो चांस। पिछले चुनाव में अकेले मैदान में उतरी भाजपा को भी यहां डेढ़ फीसदी ही वोट मिले थे, लेकिन इस बार फिर उसने टीडीपी का दामन पकड़ लिया है। फिल्म स्टार पवन कल्याण की जन सेना पार्टी भी इस गठबंधन में शामिल है। दस साल से सांसद रहे नानी को लेकर उतरी वाईएसआरसीपी को राज्य में पांच साल के काम का हिसाब भी देना पड़ रहा है।

कम्मा नेताओं पर दांव
विजयवाड़ा में इस बार टीडीपी, वाईएसआरसीपी और कांग्रेस तीनों ने कम्मा समुदाय के नेताओं पर दांव खेला है। आंध्र की राजनीति में कापू, कम्मा व रेड्डी समुदायों का बड़ा प्रभाव है। विजयवाड़ा में कम्मा का दबदबा रहा है। बेशक, कम्मा ज्यादा संख्या में नहीं है, पर वे समृद्ध व प्रभावशाली हैं। सभी प्रमुख दल दो दशकों से विजयवाड़ा में ज्यादातर कम्मा समुदाय के प्रत्याशियों को ही मैदान में उतारते रहे हैं।

... टोपी का भी खेल
विजयवाड़ा के मुस्लिम बहुल पंजा सेंटर बाजार में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विजयवाड़ा वेस्ट विधानसभा हलके से भाजपा प्रत्याशी सुजना चौधरी खास टोपी पहनकर भाषण दे रहे हैं। कहते हैं-अल्पसंख्यकों की संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराएंगे। किसी को डरने की जरूरत नहीं है। धार्मिक संस्थानों की फेंसिंग होगी। भाषण खत्म होते ही टोपी जेब में डाल लेते हैं।

नौकरी के लिए बाहर खा रहे धक्के
हैदराबाद के तेलंगाना में जाने के दस साल बाद भी आंध्र प्रदेश की राजधानी विकसित नहीं हो सकी है। चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को आदर्श राजधानी बनाने का दावा किया था। जगनमोहन रेड्डी ने तीन राजधानी बनाने की बात की, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। चुनाव में मुद्दा क्या है? इस सवाल पर होटल कारोबारी राजा तल्ख लहजे में सवाल करते हैं, व्हेयर इज द स्टेट कैपिटल? (प्रदेश की राजधानी कहां है?)। बीटेक करने के बाद टैक्सी चला रहे मुजाहिद का कहना है, रोजगार नहीं हैं। हैदराबाद की तर्ज पर आज के आंध्र में कोई बड़ी कंपनी नहीं आई। नौकरी के लिए युवा बाहर धक्के खा रहे हैं। कारोबारी कांडो प्रशांत के अनुसार जगन सरकार ने गरीब तबके के लिए कई योजनाएं चलाईं। लोगों को घर-द्वार सहूलियतें भी मिलीं। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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